Thank You Modi Ji for making India Global Hub of Aircraft leasing & financing
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हाल के कुछ समय में भारत में घरेलु उड़ान के छेत्र में काफी प्रगति हुई हैं. परिणाम स्वरुप भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है.
भारत में कई पब्लिक और प्राइवेट एयर लाइन सर्विसेज काम कर रही हैं, लेकिन हमारी तरह सायद आपको भी जानकर हैरानी होगी, की भारत के आकाश में उड़ने वाले यात्री विमानों में से 70 से 80 फीसदी विमान किराये के होते हैं.
भले ही उड़ान सेवाएं देने वाली कंपनियों को नफा नुकसान होता रहे, जिन ग्लोबल कंपनियों से यह विमान किराये पर लिए गए हैं, उन्हें हमेसा तगड़ा मुनाफा होता है.
वर्ष 2019 में 20 बिलियन डॉलर के किराये पर भारत के आसमान में 507 हवाई जहाज यात्री सेवाएं दे रहे थे.
1000 और विमान किराये पर लिए जाने पर काम चल रहा है, और वर्ष 2050 तक भारत में 5000 किराये के एयर क्राफ्ट ऑपरेट कर रहे होंगे.
इस प्रकार यह तो साफ़ हो जाता है, की भारत में किराये के एयरक्राफ्ट की वर्तमान जरूरत में भारी भरकम इजाफा होने की सम्भावना है.
लेकिन आश्चर्य की बात यह है, इंडियन एयर लाइन ऑपरेटर्स को यदि किराये पर हवाई जहाज लेना हो, तो उन्हें यह सर्विस भारत में उपलब्ध नहीं है.
भारत में उड़ने वाले ज्यादातर विमान आयरलैंड में रजिस्टर्ड विमान मालिकों से किराये पर लिए जाते हैं. और तो और यह किराया डॉलर में अदा किया जाता है, लेकिन भारतीय एयर लाइन्स का बिज़नेस होता रुपयों में है, परिणाम स्वरूप डॉलर के मुकावले रुपये के उतार चढ़ाव का भी हिसाब किताब भारतीय एयरलाइन ऑपरेटर्स को रखना पड़ता है.
जबकि पूरी दुनिया अपनी इस जरूरत को पूरा करने के लिए आयरलैंड पर निर्भर है.
चीन को यह किराये का बिज़नेस 10 साल पहले समझ आ गया, और उसने भी अपने देश में विमान मालिकों को हवाई जहाज किराये पर देने की सुविधा मुहैया करवा दी.
क्या पता, भारत के आसमान में उड़ने वाले यात्री विमान कहीं चीन से किराए पर ना लिए गए हों.
और ऐसा नहीं है, की आयरलैंड और चीन में केवल विमान किराये पर दिए जाते हैं, एयरक्राफ्ट के मालिकों को भारी भरकम निवेश पर यह हवाई जहाज खरीदने होते हैं, इसलिए एयर क्राफ्ट फाइनेंसिंग इंडस्ट्री का भी विकास हो गया, साथ ही साथ एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस के काम में भी लोगो को रोजगार मिलता है,
पॉइंट सिंपल हैं, एयरक्राफ्ट लीजिंग के धंधे में फाइनेंसिंग और रोजगार के अवसर भर भर के मिलते हैं.
पिछले 70 सालों में भारत इस एयरक्राफ्ट लीजिंग के लिए विदेशो पर निर्भर था, लेकिन अब भविस्य बदल चूका है.
जी हाँ दोस्तों, कुछ दिनों पहले गिफ्ट सिटी गुजरात को फाइनेंसिंग एयरक्राफ्ट परचेस और लीजिंग एक्टिविटीज का केंद्र बनाने का निर्णय भारतीय वित्त मंत्रालय ने ले लिया है.
अब एयरक्राफ्ट लीजिंग नामके फाइनेंसियल प्रोडक्ट को गिफ्ट सिटी में पूरा किया जा सकता है.
बेहद सरल सब्दो में, भारत के घरेलू उड़ान मार्केट को देखते हुए दुनिया के बड़े बड़े विमानों के मालिक गिफ्ट सिटी में रजिस्टर हो सकेंगे, भारत की डिमांड को पूरा करने के लिए इंडियन बैंक्स से लोन लेकर विमान खरीद पाएंगे, और फिर उन विमानों को इंडियन एयरलाइन ऑपरेटर्स को किराए पर दिया जा सकेगा.
दूसरे सब्दो में अब इंडिगो एयरलाइन्स को एयरक्राफ्ट किराये पर लेने के लिए आयरलैंड और चीन की खाक नहीं चहनि पड़ेगी, और अब वह रुपये में एयरक्राफ्ट का किराया भी अदा कर पायेगी.
जाहिर है, एयरक्राफ्ट फाइनेंसिंग और लीजिंग से एक पूरी इंडस्ट्री का भारत में विकास होगा, और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे.
इस इंडस्ट्री के हमारे यहाँ ना होने से हर साल २.5 बिलियन डॉलर भारत से विदेशो को चले जाते थे, अब उम्मीद है, गिफ्ट सिटी में यह सुविधा आ जाने से यह बेसकीमती विदेशी मुद्रा भंडार बचाने में आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत मदद मिलेगी.
हाँ, यह बात जरूर है, की इंडियन मार्केट हाथ से फिसलता देखकर आयरलैंड और चीन जैसे मगर मच्छ हाथ पर हाथ धरकर बैठेंगे नहीं, इसलिए इस नए उद्योग को अपने पैर ज़माने में मुस्किलो का सामना तो पक्के से करना पड़ेगा.
बड़ी बात है, की देर से ही सही लेकिन अच्छे काम की दुरुस्त शुरुआत हो गयी है.
हमारे देश में ऐसे लोग बहुत हैं, जो कहते हैं, की मोदी सर्कार में कुछ काम नहीं हो रहा है, उनसे एक छोटा सा सवाल यह है, की एयरक्राफ्ट के लोन और किराये का व्यापार आज तक भारत में develop क्यों नहीं किया गया??
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