Super News - France to work with India in Jammu & Kashmir



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References -

https://www.outlookindia.com/website/story/india-news-france-shows-interest-in-collaboration-for-projects-in-kashmir-and-northeast-india/364878

https://currentnews.in/pak-gifts-disputed-land-to-china-to-set-up-base/

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आज के टॉपिक की बात करते हुए, यह बात जगजाहिर है, की वर्ष 1963 में चीन पाकिस्तान के एग्रीमेंट के अंतर्गत पाकिस्तान ने भारतीय गिलगित बाल्तिस्तान की 2 हज़ार दो सौ square माइल्स जमीं चीन को गिफ्ट कर दी थी.




यह तो हो गयी पुरानी बात,  अभी भी भारत की जमीं पर चीन और पाकिस्तान मिलकर चीन पाकिस्तान इकनोमिक corridor के अंतर्गत इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माड़ कर रहे हैं.




कहने का मतलब है, की पाकिस्तान और चीन मिलकर भारत की जमीं का दुरुपयोग भारत को ही चोट पहुंचाने के लिए करते हैं, लेकिन पिछले 70-72 सालों में सायद ही ऐसा कभी हुआ होगा, की जम्मू और कश्मीर में अपनी जमीं पर भारत ने अपने किसी मित्र देश के साथ मिलकर कोई joint प्रोजेक्ट पूरा करने के बारे में सोचा तक हो.




आप ही बताएं, यदि चीन पाकिस्तान गिलगित बाल्तिस्तान में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माड़ कर सकते हैं, तो भारत फ्रांस दोनों मिलकर जम्मू कश्मीर और लद्दाक में किसी प्रोजेक्ट पर कंधे से कन्धा क्यों नहीं मिला सकते हैं??






हाँ, यह बात 100% पक्की है, की ऐसा कुछ होने पर चीन और पाकिस्तान दोनों के दोनों रंगा बिल्ला के पेट में दर्द जरूर होगा, लेकिन क्या इसी डर से हम अपनी आशा की उड़ान को सिमित कर दें.






ऐसा नहीं है, की भारत को यहाँ पर फ्रांस को इसके लिए मनाने की जरूरत है, अभी कल ही की तो बात है, भारत में फ्रांस के राजदूत ने मोदी कैबिनेट में नार्थ ईस्ट के विकास का काम देख रहे मंत्री जीतेन्द्र प्रशाद से मुलाक़ात की,




जिसमे उन्होंने स्पस्ट सब्दो में रुझान दिखाया की फ्रांस जम्मू कश्मीर में टूरिज्म एवं अन्य छेत्रों में भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है.




और जम्मू कश्मीर ही क्यों, उत्तर पूर्व के राज्यों की विकास यात्रा में भी फ्रांस सहयोग देने के लिए ready है.




सायद आपको पता हो, हाल के कुछ समय में इसराइल ने उत्तर पूर्व के राज्यों असम मेघालय त्रिपुरा और मिजोरम में कई फ़ील्ड्स में खास तौर पर कृषि के छेत्र में काफी काम किया है. 




इसलिए जहाँ तक उत्तर पूर्वी राज्यों का सवाल है, इसराइल पहले ही वहां पर आगे बढ़ चूका है, और फ्रांस भी अब राह में पीछे छूटने के लिए तैयार नहीं है.






लेकिन यहाँ पर मेंशन करना जरूरी है, की हम सभी इंतजार कर रहे हैं, की जल्द से जल्द भारत इसराइल अथवा फ्रांस के साथ मिलकर अरुणाचल प्रदेश में किसी जॉइंट प्रोजेक्ट पर काम करें.




क्योकि अभी यह बात क्लियर नहीं है, की फ्रांस चीन को खुल्लम खुल्ला चुनौती देते हुए क्या अरुणाचल प्रदेश में काम करेगा.


अरे फ्रांस की बात छोड़िये साहब, हमें तो यह भी नहीं पता, की क्या हमारी भारत सरकार इस क्रान्तिकारी कदम को उठाने की दिशा में आगे बढ़ेगी.






कोई बात नहीं, अरुणाचल प्रदेश को बाद में भी देखा जा सकता है, अभी यदि फ्रांस और भारत मिलकर जम्मू कश्मीर में किसी जॉइंट प्रोजेक्ट पर आगे बड़े, तो यह शुरुआती कदम भी कोई छोटा मोटा नहीं होगा, बल्कि इस प्रोजेक्ट की गूँज इस्लामाबाद से लेकर बेजिंग तक सुनाई देगी.




कहने की जरूरत नहीं है, भले ही बात यहाँ पर जम्मू कश्मीर के विकास की हो रही है, लेकिन यह बात हमारे देश की सेक्युलर जमात के भी गले नहीं उतरेगी.




Anyway, दोस्तों अब वक़्त आ गया है, की भारत चीन और पाकिस्तान की खुराक, इन ही दोनों देशो को खिला दे. अब जबकि फ्रांस ने एक कदम आगे बड़ा दिया है, तो भारत को दो कदम आगे बढ़ाने के बारे में संकोच नहीं करना चाहिए.




वैसे भी फ्रांस आजकल पाकिस्तान पर खार खाया बैठा है, इसलिए उसे भी हिसाब किताब चुकता करने का सुनहरा मौका चाहिए.




इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में लिखकर आप हमें जरूर बताएं, जम्मू कश्मीर में इंडिया फ्रांस जॉइंट प्रोजेक्ट का आप समर्थन करते हैं, या नही. 




अंत में इस वीडियो के स्पांसर prime_spell instagram account को धन्यवाद के साथ हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.

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