Super News - India to get Control of Chabahar Port for 10 Years



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References - 

https://en.mehrnews.com/news/165789/Indian-equipment-for-Chabahar-development-to-arrive-by-Mar

https://theprint.in/diplomacy/jaishankar-in-iran-as-indias-worried-about-china-deal-beijing-grabbing-chabahar-port/498260/

https://en.wikipedia.org/wiki/Chabahar_Port

https://www.news18.com/news/india/india-gets-control-of-strategic-chabahar-port-in-iran-for-18-months-1664205.html

https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/india-takes-over-operations-of-part-of-chabahar-port-in-iran/articleshow/67424219.cms?from=mdr


इस साल अगस्त सितम्बर महीने की ही तो बात है, जब इस तरह की खबरें आयी थी, की चीन और ईरान के बीच 400 बिलियन डॉलर के एग्रीमेंट होने वाले हैं. और यह अंदेशा प्रकट किया गया था, की चीन भारत से चाबहार पोर्ट को छीन लेगा.




साथ ही साथ यह  खतरा भी जताया गया था , की जल्द ही चीन रूस टर्की पाकिस्तान और ईरान मिलकर पांच देशो का एक सिक्योरिटी अलायन्स बना सकते हैं.




इसी बैकग्राउंड में SCO सम्मलेन में भाग लेने गए भारतीय विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री एक एक करके ईरान में रुके और यह कोसिस करि, ताकि भारत और ईरान के बीच के सम्बन्धो को फिर से पटरी पर लाया जा सके.




डिफेंस और डिप्लोमेटिक लेवल पर हुई इस बातचीत ने रंग तब दिखलाया, जब कुछ दिनों पहले ईरान ने आधिकारिक रूप से भारत चाबहार रेलवे लाइन प्रोजेक्ट के लिए इक्विपमेंट सप्लाई करने के लिए रिक्वेस्ट भेज दी.




इसके अलावा भारत तीन साल से इंतजार कर रहा था, की चाइनीस कंपनी चाबहार पोर्ट के लिए चार रेल माउंटेड क्रेन्स कभी ना कभी तो सप्लाई करेगी.




लेकिन चाइनीस कंपनी लगातार बहाने बनाती रही,  और अंत में तंग आकर सितम्बर महीने में भारत सर्कार ने चाइनीस कंपनी को दिया यह डॉलर में हुआ कॉन्ट्रैक्ट  कैंसिल कर दिया. और साथ ही साथ नया टेंडर जारी कर दिया, जिसमे पूरी डील रुपयों अथवा यूरो में होनी थी.




क्या पता अमेरिका में अगले प्रशाशन की ईरान और चाबहार पोर्ट के प्रति क्या नीति रहती है, इसलिए ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी की कहावत को अमल में लाते हुए भारत ने रुपयों अथवा यूरो में चाबहार पोर्ट के लिए इक्विपमेंट खरीदने का निर्णय लिया था.




हालांकि यह निर्णय लेने में भारत सर्कार ने तीन सालों का समय लगा दिया, लेकिन अब लगता है, की चीज़ें रफ़्तार पकड़ने लगी है. यही देखने को मिला जब ईरान के पोर्ट एंड मेरीटाइम आर्गेनाइजेशन हेड ने कहा की, अगले साल मार्च महीने तक चाबहार पोर्ट के लिए इक्विपमेंट्स का पहला शिपमेंट भारत से आ जायेगा.




इस प्रकार एक बात तो साफ़ हो जाती है, की चाबहार पोर्ट में भारत के भविस्य पर चाइनीस तलवार नहीं लटक रही है.




इसके अलावा सायद आपके ध्यान में हो, वर्ष 2016 के एग्रीमेंट के अनुसार चाबहार पोर्ट के ऑपरेशन का 10 वर्षो का कॉन्ट्रैक्ट भारत को मिलना था. लेकिन इस एग्रीमेंट को कागज़ो से जमीं पर उतारा नहीं जा सका .




परिणाम स्वरुप भारत और ईरान के बीच नयी सहमति बनी साल 2018 में जिसके अंतर्गत भारत को पिछले साल दिसंबर महीने में चाबहार पोर्ट को ऑपरेट करने का अधिकार अगले 18 महीनो के लिए मिल गया.




हमें अच्छे से याद है, जब हमने इस टॉपिक पर वीडियो बनाया था, तब आप में से कई दर्शको ने आश्चर्य प्रकट किया था, की किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की जिंदगी में 18 महीने तो बहुत छोटा समय होता है.




अब अच्छी बात यह है, ईरान के पोर्ट एंड मेरीटाइम आर्गेनाइजेशन के शीर्ष अधिकारी का कहना है, की ईरान भारत को चाबहार पोर्ट टर्मिनल को ऑपरेट करने का अधिकार 10 वर्षो तक देने के लिए तयारी कर रहा है.




जैसा की हमने पहले भी देखा है, ईरान की कथनी और करनी में अंतर कुछ ज्यादा ही है, इसलिए जब तक इस पोर्ट का ऑपरेशन 10 बर्षो के लिए हमें नहीं मिल जाता है, तब तक ईरान से आने वाली इन मीठी मीठी बातों पर भरोसा करने से हमें बचना होगा.




लेकिन बड़ी बात यह है, की हाल के कुछ सप्ताहों में चाबहार रेलवे लाइन हो या चाबहार पोर्ट हो, दोनों ही के सन्दर्भ में ईरान के भारत के प्रति व्यवहार में हल्का सा परिवर्तन तो जरूर आया है.




नहीं तो पहले तो हर दो तीन सप्ताह में चाबहार project में देरी होने का बिल ईरान भारत के ऊपर फाड़ देता था.




जैसा की आप सभी कहते हैं, ईरान के केस में हम सभी दूध के जले हैं, इसलिए हमने छांछ को भी फूंक फूंक कर पीना चाहिए. हम आपके इस विचार से पूरी तरह सहमत है.




आइये देखते हैं, अगले अमेरिकी प्रशासन की ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के प्रति क्या रणनिति होती है. हाल फिलहाल यह संतोष जनक है, की इस बेहद जटिल परिदृश्य में भारत चाबहार पोर्ट के सन्दर्भ रिस्क manage कर पाने में सफल होता हुआ दिखाई दे रहा है.


कहने की जरूरत नहीं है, जबकि भारत चाबहार पोर्ट पर लगातार आगे बढ़ने की कोसिस कर रहा है, उसी दौरान इस बंदरगाह से होकर तेजी से बढ़ता हुआ व्यापार सिद्ध करता है, की इंडियन टैक्स पयेर्स का पैसा चाबहार पोर्ट में बर्बाद नहीं हुआ है.

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