Thank You President Trump for giving Big Blows to China
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References -
https://swarajyamag.com/insta/tibetan-buddhists-should-pick-the-next-dalai-lama-china-has-no-authority-us-official
https://www.tribuneindia.com/news/himachal/china-has-no-theological-basis-to-pick-the-next-dalai-lama-us-172115
https://en.wikipedia.org/wiki/United_States_Ambassador-at-Large_for_International_Religious_Freedom
https://theprint.in/diplomacy/us-plans-new-fleet-for-indo-pacific-region-as-it-focuses-on-ties-with-india-countering-china/546771/
आज के वीडियो को स्पांसर किया है, प्रशांत जी ने (Prashant Ladhe), वीडियो स्पॉन्सरशिप के लिए आपको धन्यवाद.
जैसा की आपको याद होगा, अक्टूबर महीने की बात है, जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने तिब्बत के लिए अपने कार्यकाल का पहला स्पेशल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया था.
हालाँकि हमेसा से चीन इस स्पेशल कोऑर्डिनेटर की परछाई से भी डरता रहा है, लेकिन अमेरिका के अनुसार इस अधिकारी का काम होता है, peoples रिपब्लिक ऑफ़ चाइना PRC और दलाई लामा के बीच बातचीत चालू करवाना.
वैसे दलाई लामा से मुलाक़ात की बात छोड़िये, हम सभी को पता है, चीन तो अगले दलाई लामा की नियुक्ति अपने मन माफिक करवाने की फ़िराक में हैं.
हम सभी को यह आशंका है, की दलाई लामा कौन होगा, कब होगा, इस सवालों में PRC की बिलकुल भी रूचि नहीं है, वह तो दलाई लामा के पद पर मेड इन चाइना कठपुतली बिठा कर तिब्बत की आजादी की आग को हमेसा के लिए ठंडा करने की फ़िराक में लगा है.
इस बैकग्राउंड में इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम के लिए काम कर रहे अमेरिकी एम्बेसडर ने धर्मशाला की यात्रा की और वहां पर भारत में रह रहे तिब्बत शरणार्थियों से मुलाक़ात की.
जिसके बाद उन्होंने आधिकारिक रूप से कह दिया, की अगले दलाई लामा का निर्णय लेने का चीन के पास कोई अधिकार नहीं है. किसी भी अन्य धर्म और मत के मानने वालों की तरह यह तिब्बत के बौद्ध लोगों का अधिकार है, की वह तय करें, की 85 वर्षीय दलाई लामा के बाद अगला दलाई लामा कौन होगा.
वैसे अभी तो वर्तमान दलाई लामा ने भी अपना मन नहीं बनाया है, की अगला दलाई लामा होगा भी की नहीं, और होगा, तो कौन होगा.
लेकिन क्या करें, चीन है की मानता ही नहीं है, वह तो वस एक ही रट लगाए है, की अगले दलाई लामा का चुनाव वह करेगा.
फिर भी यह अच्छी बात है, की कम से कम समय समय पर अमेरिका इस बारे में अपनी स्थिति को स्पस्ट करता रहता है.
वैसे भी हर दिया बुझने के पहले तेज जलता है, इसलिए ट्रम्प प्रशाशन अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में अपनी हार के जिम्मेदार चीन से पूरा पूरा बदला लेने की कोसिस करते नजर आ रहे हैं.
इस परिदृश्य में हम सभी की यह अपेक्षा है, की भारत सर्कार भी अगले दलाई लामा को लेकर अपनी स्थिति को स्पस्ट करे. क्योकि यदि हम हमेसा की तरह चुप बैठे रहें, तो इसका मतलब होगा, की हम इस बात से सहमत है, की अगले दलाई लामा के चुनाव में चीन का अप्रूवल जरूरी है.
इसलिए भारत ने मौन स्वीकृति ना देते हुए, इस सन्दर्भ में बोलकर चीन की साजिस के खिलाफ अपना विरोध Crystal clear करना चाहिए.
फिर वही बात, कल हमने तिब्बत की लड़ाई तिब्बत में नहीं लड़ी, तो आज हमें चीन का सामना लद्दाक में करना पड़ रहा है. पॉइंट सिंपल है, भारत one चाइना की पालिसी का पालन तभी करेगा, जब चीन one इंडिया की पालिसी को सलाम ठोकेगा.
इसी सन्दर्भ में अमेरिका के नेवी सैक्रैटरी ने बताया है, की जल्द ही अमेरिका इंडो पसिफ़िक रीजन में यातायात की स्वतंत्रता और अंतरास्ट्रीय कानूनों का पालन निश्चित करवाने के लिए एक डेडिकेटेड नेवल फ्लीट तैयार करने वाले है.
सरल सब्दो में इसका मतलब है, अति आक्रामक चीन से निपटने के लिए अमेरिका अब ऐसे सिस्टम्स का विकास कर रहा है, ताकि मौका पड़ने पर चीन का मुँह तोड़ा जा सके. क्योकि गोस्वामी तुलसीदास कह गए हैं, बिना भय के प्रीत नहीं होती है.
इसलिए चीन के खिलाफ इंडो पसिफ़िक रीजन में लड़ने के लिए एक अलग ही नौ सैनिक शक्ति तैयार की जा रही है, वैसे यह देखने में अच्छा लगता है, की देर से ही सही अमेरिका समेत पूरी दुनिया की बुद्धि पर पड़े ताले खुल रहे हैं. और वह चीन के चैलेंज से निपटने के लिए तयारी कर रहे हैं.
वैसे भी प्यार भरी बातों से कुछ नहीं होता हैं, जब तक आपके पास पीटने के लिए लाठी ना हो.
कास दुनिया के ये बड़े बड़े नेता अपने कॉमन सेंस का थोड़ा इस्तेमाल पहले कर लेते तो आज चीन दुनिया के लिए भस्मासुर ना बनता.
यहाँ पर हमें कोई गलत फहमी नहीं पालनी, इसलिए देखते हैं, कहीं ऐसा ना हो जाए, की ओबामा की तरह बाइडन administration फिर चीन की चापलुसी में लग जाये.
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