Modi ji Successfully got Huge American Investment in Infrastructure
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References
https://www.businesstoday.in/current/economy-politics/us-financial-body-announces-54-million-investment-to-support-india-infra-projects/story/425748.html
https://www.hindustantimes.com/business-news/us-financial-body-to-invest-54-million-in-india-for-infrastructure-projects/story-jEAOdmPO28AjnWvwhVjBoK.html
https://en.wikipedia.org/wiki/National_Investment_and_Infrastructure_Fund
https://en.wikipedia.org/wiki/U.S._International_Development_Finance_Corporation
https://en.wikipedia.org/wiki/Blue_Dot_Network
आज के वीडियो पार्टनर हैं, श्रीकांत मराठे जी (Shrikant Marathe). इस स्पॉन्सरशिप के लिए आपको धन्यवाद.
यह सच्चाई हम सभी को स्वीकार्य है, की पिछले कुछ वर्षों में असाधारण इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के बाबजूद, अभी भी इस फील्ड में जितना कुछ हुआ है, उसकी तुलना में बहुत कुछ करना बाकी है.
साथ ही साथ यह भी कॉमन सेंस की बात है, की इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश आज किया जाता है, लेकिन निवेश के प्रतिफल के लिए लम्बी प्रतीक्षा करनी होती है. उदहारण के लिए हम सभी को ज्ञात है, की जापान बुलेट ट्रैन प्रोजेक्ट के लिए बेहद कम व्याज दर पर भारत को लोन मुहैया करवाया है.
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग सुनिश्चित करने के लिए ही, मोदी सर्कार ने वर्ष 2015 में स्थापना की थी, नेशनल Investment and Infrastructure फण्ड, नीफ की . पांच साल पुरे होने को हैं, और आज नीफ 4.3 बिलियन डॉलर के फण्ड को मैनेज कर रहा है.
बेहद सरल सब्दो में इस सरकारी फण्ड के पास 4.3 बिलियन डॉलर पैसे की पावर है, जिसे वह क्रिटिकली इम्पोर्टेन्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर लम्बी अवधि में लाभ की आशा और विस्वास के साथ खर्च कर सकता है. दूसरे सब्दो में नीफ के पास जितना पैसा होगा, उसकी तागत भी उतनी ही अधिक होगी.
इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, नीफ ने भारत के सबसे बड़े कोर इंफ्रास्ट्रचर फण्ड मास्टर फण्ड के लिए पुरे पैसे जुटा लिए.
Basically नीफ एक प्लेटफार्म है, जिसमे उदहारण के लिए सबसे पहले साल 2017 मे अबू धाबी के फण्ड ने 1 बिलियन डॉलर जमा कराये थे.
सिंपल सब्दो मे यह ठीक वैसे ही है, जैसे हम सभी बैंक मे पैसा जमा कराते हैं, और बैंक उसी पैसे को लोन के रूप मे बांटते हैं, ठीक उसी प्रकार दुनिया भर के बड़े बड़े फण्ड नीफ मे अपना पैसा लगाते हैं, और नीफ उस पैसे से इंडियन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लोन के रूप मे फ्लेक्सिबल फंडिंग देता है.
अब सवाल यह उठता है, की मास्टर फण्ड के लिए फण्ड रेजिंग नीफ ने कैसे कम्पलीट की.
तो इसका जवाब यह है, UAE की सर्कार के द्वारा समर्थित फण्ड ने जहाँ मास्टर फण्ड मे सबसे पहले पैसा लगाया था, वही USA के फेडरल इंस्टीटूशन U.S. International Development Finance कारपोरेशन DFC ने नीफ मे निवेश करके फण्ड रेजिंग को कम्पलीट किया है.
जी हाँ दोस्तों, नीफ के मास्टर फण्ड मे DFC ने 54 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, ताकि वह नीफ के जरिये इंडियन क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर मे निवेश कर सके.
इस बारे मे और चर्चा करने से पहले हम आपसे आग्रह करते हैं, आप प्लीज हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए, ताकि ऐसे ही पॉजिटिव वीडियो भविस्य मे बनाते रहने के लिए हमे आपसे प्रोत्साहन मिलता रहे.
टॉपिक पर लौटते हुए, अब आप सोच रहे होंगे, की 54 मिलियन Dollar तो बहुत कम होता है, तो दोस्तों बूँद बूँद से ही सागर भरता है. और दोस्तों यह तो केवल शुरुआत है, DFC के पास डॉलर की कोई कमी नहीं है, जैसे जैसे नीफ का काम आगे बढ़ेगा, वैसे वैसे अमेरिका से डॉलर की बरसात भी होती रहेगी.
वैसे सायद आपको पता हो, यह अमेरिकन पेंशन और सरकारी फंड्स के पैसे का ही कमाल है, की आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था बन बैठा है. यह अमेरिकन investment डिसिशन सही था या गलत, इस बात की चर्चा तो होती रहेगी, लेकिन अमेरिकन डॉलर की तागत क्या है, यह हम सभी को अच्छे से पता है.
और भी अच्छी बात यह है, की DFC के शामिल होने से यह सुनिश्चित हो गया है, की NIIF भी ब्लू डॉट नेटवर्क मे एफ्फेक्टिवेली शामिल हो गया है, क्योकि DFC ने ब्लू डॉट थीम के अंतर्गत ही यह पैसा भारत मे डाला है.
सायद आपको याद हो, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के जरिये चीन पूरी दुनिया मे कर्ज का जाल बिछा रहा है, इसलिए इस चाइनीस जाल के खिलाफ ब्लू डॉट नेटवर्क वर्ष 2019 से स्थापित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर का पारदर्शी ढंग से निर्माड किया जाता है, जिसकी लोकल लोगों को जरूरत हो.
नहीं तो बेल्ट एंड रोड के अंतर्गत हम्बनटोटा बंदरगाह जैसे इंफ्रास्ट्रक्टरल सफ़ेद हाथी ही चीन ने पैदा किये हैं, जिसका लाभ लोकल लोगों को नहीं मिला किन्तु जिससे दूर बैठे चीन की ग्लोबल amibition पूरी हो रही है.
इसलिए ब्लू डॉट नेटवर्क मे शामिल होकर भारत और अमेरिका चीन की लकीर को मिटा कर छोटा नहीं कर रहे हैं, बल्कि चाइनीस लकीर से बड़ी एक नई लकीर खींच रहे हैं.
और तो और DFC ने खुद साफ़ साफ़ कहा है, की वह इंडियन इंफ्रास्ट्रक्चर मे निवेश इसलिए कर रहा है, ताकि इंडियन इकॉनमी के विकास को रफ़्तार मिल सके, और DFC का यह उद्देस्य अमेरिकन गवर्नमेंट पालिसी से मेल खाता है.
कहने का मतलब यह है, की हम अपेक्षा कर सकते हैं, की इंडियन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मे और भी अमेरिकन निवेश नियमित रूप से आता रहेगा.
अंत में इस वीडियो के स्पांसर श्रीकांत मराठे जी को धन्यवाद देते हुए हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
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