Smart Strategy of Modi Ji - New Online System Launched to Stop Coal Import
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References -
https://www.thehindubusinessline.com/economy/centre-to-implement-coal-import-monitoring-system-from-february-1/article33405037.ece
https://www.business-standard.com/article/companies/coal-india-plans-to-substitute-80-85-mt-of-imported-coal-in-current-fiscal-120121700901_1.html
https://www.livemint.com/news/india/india-makes-future-coal-import-disclosures-mandatory-11608788497319.html
https://in.reuters.com/article/india-coal-imports-disclosure/india-makes-future-coal-import-disclosures-mandatory-idINKBN28Y0HM
आज के वीडियो पार्टनर हैं, जनप्रीत मक्कड़ जी (Janpreet Makkar ). इस स्पॉन्सरशिप के लिए आपको धन्यवाद.
यह एक जमीनी सच्चाई है, की दुनिया में सबसे अधिक कोयले का भंडार रखने वाले टॉप 5 देशो में भारत को गिना जाता है. और कोल् इंडिया को दुनिया की सबसे बड़ी कोल् प्रोडूसिंग कंपनी माना जाता है.
लेकिन फिर भी भारत करता है, कोयले का इम्पोर्ट. आँखें खोलने के लिए यही काफी है, की पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने १ लाख करोड़ रूपया खर्च करके कोयला आयत किया था. और तो और साल दर साल भारत के द्वारा किये जाने वाले कोल् इम्पोर्ट में बढ़ोतरी भी हो रही है
इस बैकग्राउंड में 10 दिनों पहले हमने एक वीडियो में कवर किया था, की किस प्रकार मोदी सर्कार कोसिस कर रही है, ताकि इंडियन कोल् इम्पोर्ट को कम किया जा सके.
तब कुछ दर्शको ने कमेंट किया था, की भारत का कोयला ख़राब है, उसमे से आग कम और राख ज्यादा निकलती है. इसलिए हमें इम्पोर्ट करना पड़ता है. लौ क्वालिटी कोल् की बात सही हो सकती है, स्पेशल जरूरत के हिसाब से भारत को स्पेशल कोयले की जरूरत पड़ती होगी, यह सब कॉमन सेंस की बातें हैं, और हम में से कोई यह नहीं कह रहा है, की जो कोयला हमारे देश में है ही नहीं, उसे इम्पोर्ट भी मत करो.
हमारा और मोदी सर्कार का कहना यही है, की यदि भारतीय कोयले से काम चलता हो, तो भाई कम से कम उस कोयले को खरीदने के लिए डॉलर मत जलाओ.
यहाँ तक की पिछले फाइनेंसियल ईयर में भारत ने कोल् इम्पोर्ट किया था, 248 मिलियन टन, जिसमे से कोल् इंडिया का अनुमान था की वह करीब 80 से 85 मिलियन टन कोयले की जरूरत पूरा कर सकती है. मतलब कोल् इंडिया को पता है, की वह हर तरह के Imported कोयले की जरूरत को पूरा नहीं कर सकती है. आप ही बताएं, समुद्र तट के पास के पावर प्लांट जो अभी धड़ल्ले से कोल् का इम्पोर्ट करते हैं. उनकी कोल् requirement को पूरा करने की कोसिस क्या कोल् इंडिया ने नहीं करनी चाहिए.
आगे बढ़ने से पहले एक जरूरी बात, मायूसी के इस माहौल में मुस्कान के लिए हमारे ऐसे ही पॉजिटिव वीडियो देखते रहें, इसलिए कृपया चैनल सब्सक्राइब कीजिये ताकि आप चिपके रहे हमेसा हमारे चैनल के साथ.
जैसा की आपके ध्यान में होगा, की कोरोना वायरस से जुड़े विवाद के कारण चीन ऑस्ट्रेलिया से कोल् इम्पोर्ट करने से बच रहा है, और इंडोनेशिया पर उसकी निर्भरता बढ़ने से ग्लोबल कोल् की कीमतों में उछाल नोटिस किया गया है, जिससे इम्पोर्टेड कोल् की तुलना में इंडियन कोल् अब किफायती हो गया है. मतलब लोहा गरम है, और मोदी सर्कार ने हथोड़ा भी दे मारा .
क्योकि 1 फरबरी से लागु होने जा रहा है, कोल् इम्पोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम CIMS. जिसके अंतर्गत यदि किसी भी इम्पोर्टर को एंथ्रेसाइट कोल्, बिटुमिनस कोल्, कोकिंग कोल्, और स्टीम कोल् का आयात करने के पहले CIMS में इनफार्मेशन की एडवांस्ड एंट्री करके रजिस्ट्रेशन नंबर लेना होगा.
जो की 75 दिनों तक वैलिड रहेगा, और इस नंबर के ऊपर ही कस्टम डिपार्टमेंट इम्पोर्टेड कोल् को क्लीयरेंस दे पायेगा.
इसका लाभ यह होगा, की अब कोई भी मन माने ढंग से किसी भी प्रकार के कोयले का इम्पोर्ट नहीं कर पायेगा, बल्कि सर्कार को पता रहेगा, की किस तरह के कोयले का कितना इम्पोर्ट हो रहा है. स्वाभाविक है, अब यह पता लगाने में आसानी होगी, की कहीं हम उस कोयले का तो इम्पोर्ट नहीं कर रहे हैं, जो की भारत में भर भर के मौजूद है.
चूँकि CIMS एक ऑनलाइन सिस्टम है, और पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड है, इस लिए उम्मीद की जा सकती है, की कोयले के इम्पोर्टर्स को इसे अपनाने में परेशानी नहीं होगी, वैसे अब उनके पास और कोई ऑप्शन है भी नहीं. हो सकता है, एक दो दिन में वह अखबारों में रोने धोने की रस्म अदायगी जरूर पूरी करें.
यहाँ पर ध्यान रखने वाली बात यह है, की यह नया सिस्टम कोई अचानक से नहीं बन गया है, बल्कि सितम्बर महीने में ही आत्म निर्भर भारत अभियान के अंतर्गत मोदी जी ने इस बात पर बल दिया था, की जिस चीज़ की कैपेसिटी भारत में है, हमने उसे इम्पोर्ट नहीं करना चाहिए.
वैसे भी इम्पोर्ट मॉनिटरिंग का जो यह सिस्टम लागु हो रहा है, वह कोई कोयले के लिए अनोखा नहीं है, बल्कि स्टील इम्पोर्ट को रोकने के लिए ऐसे ही सिस्टम का विकास किया था, ताकि स्टील के घरेलु उत्पादन को बढ़ाने और अनाप सनाप डंपिंग को रोकने के लिए भारत सर्कार समर पर सही कदम उठा सके.
इस स्टील इम्पोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम का indirect बेनिफिट आप में से उन लोगों को पक्के से मिला होगा, जिन्होंने इंडियन स्टील कम्पनीज में निवेश किया हुआ होगा.
वैसे भी यह कॉमन सेंस की बात है, की इम्पोर्ट रोकने के पहले भारत सर्कार को पता होना चाहिए, कौन कब और किस लिए आयत कर रहा है. अब यह बात और है, की इस कॉमन सेंस का अविष्कार करने में हमें कई दशकों का समय लग गया. सायद इसीलिए कहा जाता है, की कॉमन सेंस कॉमन नहीं होता है.
अंत में इस वीडियो के स्पांसर जनप्रीत मक्कड़ जी को धन्यवाद देते हुए हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
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