New India Taiwan Agreement - India solved Biggest Taiwanese Problem
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India, Taiwan to ink labour mobility pact
India, Japan sign agreement to give skilled Indian workers access to Japanese job market
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References -
https://www.tribuneindia.com/news/nation/india-taiwan-to-ink-labour-mobility-pact-198271
https://www.hindustantimes.com/india-news/india-japan-sign-agreement-to-give-skilled-indian-workers-access-to-japanese-job-market-101610982197561.html
इस वीडियो की शुरुआत में हम धन्यवाद देना चाहेंगे, पिछले 10 महीनो से हमारे चैनल के सिल्वर मेंबर रहे समरजीत पट्टनायक जी (Smarajit Pattanaik) को.
अभी कुछ ही दिनों पहले हमने कवर किया था, की 14 कार्यो में कुशल इंडियन वर्कर्स के जापान में मूवमेंट को इजी एंड सिस्टम ड्रिवेन करने के लिए भारत और जापान ने फाइनल किया था एक एग्रीमेंट.
जिसके तहत जापान में जाने के पहले भारतीयों को स्किल रेक्विरेमेंट तो पूरी करनी ही थी, साथ में उन्हें जापानी लैंग्वेज टेस्ट भी पास करना था.
पॉइंट सिंपल था, जापान को वर्कर्स की जरूरत है, और भारत के पास वर्कर्स की कोई कमी नहीं है, मतलब जापान के ताले की चाबी भारत के पास है. इसलिए इस एग्रीमेंट का महत्वा बहुत अधिक था, क्योकि बातों और घोशणाओं से ज्यादा महत्वा होता है, सिस्टम का, क्योकि लोग आते जाते रहते हैं, सिस्टम बना रहता है.
चलो इस प्रकार भारत ने अपने मित्र जापान की एक बड़ी प्रॉब्लम तो सॉल्व कर दी, लेकिन जापान का ही एक पडोसी देश है, ताइवान. जहाँ पर पिछले साल मरने वाले लोगों की संख्या पैदा होने वाले बच्चों से ज्यादा थी.. बात साफ़ है, जापान साउथ कोरिया की तरह ताइवान की आवादी घट रही है. इसिलए जो प्रॉब्लम जापान की है, वही परेशानी ताइवान को भी है.
तीन साल पहले की बात है, ताइवान की इस समस्या के समाधान के लिए भारत ने उसके साथ लेबर मोबिलिटी पैक्ट को finalize करने के ऊपर विचार करना चालू किया था. यह वही समय था, जब भारत और चीन के बीच ढोकलाम विवाद अपने चरम पर था.
ढोकलाम विवाद के सुलझते ही चालू हुआ भारत के प्रधानमंत्री और चाइनीस राष्ट्रपति के बीच सालाना इनफॉर्मल टॉक्स का सिलसिला. जबकि हम सभी को पता था, की चीन के मुँह में राम और बगल में छुरी है, फिर भी हमने इस इनफॉर्मल टॉक्स के तमाशे को जैसे तैसे करके सहन किया.
लेकिन इस तमाशे की कीमत चुकाई ताइवान ने, जी हाँ दोस्तों, भारत और ताइवान के बीच होने वाले लेबर मोबिलिटी पैक्ट को डाल दिया गया कोल्ड स्टोरेज में . जाहिर है, भारत लगातार चीन का तुस्टीकरण करने की कोसिस कर रहा था.
इसी बीच पिछले साल लद्दाक और इस साल अरुणाचल में चाइनीस काली करतूतों की खुल गयी कलई. वैसे भी यह तो कॉमन सेंस की बात है, तुस्टीकरण की निति से कभी किसी का कोई भला नहीं हुआ है.
अब जबकि एक बार फिर भारत और चीन के बीच का तनाव ढोकलाम की उचाईयो को लाँघ चूका है, तो इंडिया ताइवान मोबिलिटी पैक को निकाला गया है, ठन्डे बस्ते से बहार. और the ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक भारत और ताइवान इस एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहे हैं, और जल्द ही इस एग्रीमेंट के होने की सम्भावना है.
यहाँ पर गौर करने वाली बात है, की पहले से ही थाईलैंड और वियतनाम से वर्कर्स ताइवान में जाते रहे हैं, और मलेसिया के साथ कुछ समय पहले ताइवान ने ऐसा ही लेबर मोबिलिटी पैक्ट किया है, लेकिन उसे अभी तक activate किया जाना बाकि है.
कहने का मतलब यह है, की भारत को घडी की रफ़्तार से तेज भागना होगा, क्योकि थाईलैंड वियतनाम और मलेसिया पहले से ही मौके पर चौका लगाने की कोसिस में लगे हैं.
हाँ यह बात है, की इन देशो में वह लोग हैं, जो ताइवान की भासा बोल और समझ लेते हैं, और भारत में ऐसे लोगों का आभाव है, तो इसके जवाब में हम सिर्फ यह कह सकते हैं, की जब जापान जाने के लिए इंडियन वर्कर्स जापानी भाषा सीख सकते हैं, तो हम ताइवान की भासा भी सीख लेंगे, हाँ थोड़ी बहुत मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है.
वैसे भी जापान की तरह ताइवान भी लैंग्वेज टेस्ट ले सकता है, और जो भारतीय उसे पास करें, उन्हें ही ताइवान में allow किया जाये, हम सिर्फ कहना यह चाह रहे हैं, भासा ज्ञान का आभाव कोई ऐसी बीमारी नहीं है, जिसका इलाज़ हकीम लुकमान के पास भी ना हो.
और हाँ, अभी जब हम बात कर रहे हैं, तब ताइवान में सात लाख विदेशी वर्कर्स काम कर रहे हैं, और करीब दस हज़ार भारतीय ताइवान में रह रहे हैं, जिनमे अधिकतर स्टूडेंट्स हैं. कहने का तात्पर्य यह है, की भारत से वर्कर्स एंड स्टूडेंट्स का पहले से ही ताइवान को मूवमेंट हो रहा है, बस अब सरकार ने एक प्रॉपर सिस्टम खड़ा करना है, ताकि यह Movement बड़ी संख्या में आसानी से हो सके. और इसी लिए दोनों देश लेबर मोबिलिटी पैक्ट पर गम्भीरता पूर्वक काम कर रहे हैं.
जैसा की हम सभी देख रहे हैं, की चीन ने अरुणाचल की भारतीय भूमि पर गांव बसा लिया है, चालबाज़ चीन के इस कारनामे का भारत ने मुहतोड़ जवाब देना चाहिए, यह हम सभी का आग्रह है. एक तरीका जिसे चीन को सबसे ज्यादा चिनमिनी उठेगी, वह है यह लेबर मोबिलिटी पैक्ट.
चीन के खिलाफ जवाबी कारवाही के वैसे तो कई विकल्प हैं, लेकिन यदि भारत ताइवान के साथ यह एग्रीमेंट भी कर लेगा, तो One चाइना की पालिसी टूट भी जाएगी, और चीन को जहर का घूँट पीकर सिर्फ बैठा रहना पड़ेगा. यह तरीका ऐसा है, जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी ना टूटे. भारत ने ताइवान के साथ यह लेबर मोबिलिटी पैक्ट करना चाहिए या नहीं, आप हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताएं.
वीडियो के अंत में एक बार फिर सिल्वर मेंबर समरजीत पट्टनायक जी को धन्यवाद देते हुई हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
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