Success of PLI Scheme - Pharma companies to setup 4000 Cr New plants
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First set of five bulk drug, pharma input projects under PLI scheme cleared
Aurobindo Pharma, KAPL get nod for promotion of manufacturing bulk drugs
Aurobindo, Kinvan, K'taka Antibiotics first to get PLI for drugs
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References -
https://www.businesstoday.in/sectors/pharma/aurobindo-kinvan-ktaka-antibiotics-first-to-get-pli-for-drugs/story/428830.html
https://www.business-standard.com/article/companies/aurobindo-pharma-kapl-get-nod-for-promotion-of-manufacturing-bulk-drugs-121012201186_1.html
https://www.thehindubusinessline.com/companies/first-set-of-five-bulk-drug-pharma-input-projects-under-pli-scheme-cleared/article33637838.ece
आज पूरी दुनिआ में इंडियन फार्मेसी के चर्चे हो रहे हों, हम सभी को यह जमीनी कड़वी सच्चाई पता है, की भले ही भारत ग्लोबल फार्मेसी है, लेकिन दवाओं के रॉ मटेरियल एपीआई के लिए हम मुख्या रूप से चीन पर निर्भर हैं. पॉइंट सिंपल है, भारतीय फार्मा इंडस्ट्री का अस्तित्वा सबसे बड़े भारतीय दुश्मन चीन पर निर्भर है. निर्भरता सिर्फ शोषण को जन्म देती है, यही देखने को मिला, जब ग्लोबल कोरोना लॉक डाउन के चलते चीन से आने वाली एपीआई की सप्लाई पर तलवार लटक गयी.
कोरोना की चोट तो अभी बहुत ताजा है साहब, समय से आगे चलते हुए आप सभी ने हमेसा से मांग की ही थी, कभी एपीआई के मामले में पूरी तरह सेल्फ डिपेंडेंट रहे भारत को फिर से आत्मा निर्भर बनना चाहिए. और आपकी इसी मांग पर अमल करते हुए मोदी सर्कार ने पिछले साल लांच की थी, 7 हज़ार करोड़ रुपयों की PLI स्कीम.
इस PLI स्कीम के तहत 4 टारगेट सेगमेंट में ऐसी 36 API के लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने की कोसिस की गयी थी, जिनके इम्पोर्ट के लिए भारत पूरी तरह से चीन पर निर्भर है. और इन चारो सेगमेंट में दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए एक दो नहीं, बल्कि 250 एप्लीकेशन जमा की गयी थी, पिछले साल नवंबर में.
कहने का मतलब यह है, की जब विद्वानों ने PLI स्कीम को फेकू का जुमला कह कर कोसना चालू कर दिया था, तभी इंडियन फार्मा कंपनियां PLI स्कीम का लाभ उठाने के लिए लाइन में लग रही थी.
नवंबर महीने में एप्लीकेशन दाखिल किये गए और 2 महीने के भीतर सिलेक्शन भी होना चालू हो गया है. इसे कहते हैं, रफ़्तार से काम करना.
जी हाँ दोस्तों, पहले टारगेट सेगमेंट में तीन कंपनियों का चुनाव किया गया है, और शेष बचे तीन सेगमेंट के लिए कंपनियों का सिलेक्शन अगले 45 दिनों में पूरा कर लिया जायेगा.
इन तीन कंपनियों के नाम हैं, हैदराबाद की औरोबिन्दो फार्मा, मुंबई की किण्वन प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक सेक्टर फार्मा कंपनी कर्णाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स.
ये तीनो कम्पनिया 3761 करोड़ रुपयों का निवेश करके लगाएगी, एक दम नए नए प्लांट्स. जो की 1 अप्रैल 2023 से प्रोडक्शन चालू करने वाले हैं, और जिनमे 3825 लोगों को रोजगार मिलने की सम्भावना है.
जैसा की आपको जानकारी होगी, PLI सब्सिडी स्कीम एक टाइम बाउंड सब्सिडी प्रोग्राम है, मतलब 2023 के बाद अगले छह सालों में इन तीनो कंपनियों को 3600 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में प्रोडक्शन के अनुपात में दिए जायेंगे.
कहने का मतलब यह है, की सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए इन तीनो कंपनियों को घडी की रफ़्तार से आगे भागना होगा, स्वाभाविक है, इस प्रकार प्रोबेबिलिटी बढ़ जाती है, की इस सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए यह कम्पनिया जल्द से जल्द पेनिसिलिन G जैसी बेसिक लेकिन सुपर इम्पोर्टेन्ट API का लोकल प्रोडक्शन चालू करेंगी, और भारत इनमे आत्मा निर्भर बनेगा.
यदि आप share market के खिलाडी हैं, तो आप उन कंपनियों पर फोकस कर सकते हैं, जिनका सिलेक्शन इस Pharma PLI सब्सिडी स्कीम में हो रहा है.
हम यहाँ पर कहना सिर्फ यह चाह रहे है, की PLI स्कीम के चलते यह कम्पनिया अपनी कैपेसिटी में विस्तार कर रही है, और चूँकि अब यह रॉ मटेरियल का भी स्वयं उत्पादन करेंगी, तो इनके दवाओं की कॉस्ट भी पक्के से कम होगी. मतलब इनके profit मार्जिन भी बढ़ सकते है.
दोस्तों, यह ऐसे फंडामेंटल इम्प्रूवमेंट होते हैं, जो किसी भी जमीं पर रेंगने वाले शेयर को राकेट बना देते हैं, और हाल ही में PLI स्कीम का जादू हम सभी ने डिक्सॉन टेक्नोलॉजी और एम्बर एंटरप्राइज जैसी कंपनियों के शेयर प्राइस में देखा ही है. अब पहले से चढ़े हुए फार्मा कंपनियों के भाव कितने बढ़ेंगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा.
चीन से एपीआई सप्लाई चैन भारत में आ रही है, तो इस फंडामेंटल सप्लाई चैन शिफ्ट का indirect लाभ उठाने की चेष्ठा हम सभी ने करनी चाहिए. नहीं तो वही होगा, की एपीआई में भारत आत्मा निर्भर बन जायेगा, और हम सभी सिर्फ ताली पीटते रह जायेंगे. वैसे भी यह सब आपकी मांग के अनुसार हो रहा है, इसलिए इससे होने वाले लाभ पर भी आपका हक़ है.
यहाँ पर दिक्कत सिर्फ यह है, की PLI स्कीम के अनाउंसमेंट को सबने बढ़ चढ़कर कवर किया, लेकिन अब जबकि कम्पनिया सेलेक्ट होने लगी हैं, और तेजी से काम आगे बढ़ रहा है, तो इस जमीनी घटनाक्रम को कवर करने का किसी के पास समय नहीं है,
यही कारण है, रात में बरनोल की मालिश करवाने वाले लेफ्ट लिबरल चमचे सुबह उठकर मोदी जी को फेंकू और PLI स्कीम को जुमला कह पाने की हिम्मत जुटा लेते हैं.
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