Thank you France for Starting Ceiling Tiles Production in India

 


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Saint-Gobain India sets up new ceiling tiles facility at Jhagadia

Saint-Gobain adds 6 million sq meters capacity with new Jhagadia plant

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References -

https://www.thehindubusinessline.com/companies/saint-gobain-india-sets-up-new-ceiling-tiles-facility-at-jhagadia/article33627019.ece

https://www.gyproc.in/about-gyproc-company-profile

https://realty.economictimes.indiatimes.com/news/allied-industries/saint-gobain-adds-6-million-sq-meters-capacity-with-new-jhagadia-plant/80358499

https://www.constructionweekonline.in/business/16486-gyproc-india-sets-up-a-new-facility-for-ceiling-tiles

हो सकता है, इन दिनों आपने टीवी में आ रहा सेंट गोबेन Gyproc सीलिंग का ad देखा होगा, जिसमे कहा जाता है, की कुछ चीज़ें सिर्फ जरूरत के लिए नहीं बल्कि फीलिंग के लिए की जाती है.




दोस्तों, फ्रेंच कंपनी सेंट गोबेन कर तो रही है, सीलिंग से फीलिंग का प्रचार. लेकिन यहाँ पर सवाल यह है, की आखिर ये सीलिंग टाइल्स भारत में आती कहाँ से है.




वैसे आपको इस सवाल का जवाब पता होगा, भारत में अधिकतर सीलिंग टाइल्स इम्पोर्ट की जाती है, और कहने की जरूरत नहीं है, सस्ती और लौ क्वालिटी सीलिंग टाइल्स भारत में डंप करने में चीन सबसे आगे है.




जैसे जैसे भारत आगे बढ़ रहा है, हम सभी अपनी जरूरत से ज्यादा फीलिंग को महत्व दे रहे हैं, जिस कारण सीलिंग टाइल्स की डिमांड बढ़ती चली जा रही है. कहने का मतलब यह है, की सीलिंग टाइल्स की डिमांड बढनी है. इस मार्किट को ध्यान में रखते हुए  सेंट गोबेन ने निर्णय लिया, की वह सीलिंग टाइल्स इम्पोर्ट बंद करने के लिए उनका उत्पादन भारत में करेगी.




और कल वह दिन आ ही गया, जब सेंट गोबेन  ने सेलिंग टाइल्स का लोकल प्रोडक्शन करने के लिए अपने पहले मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में काम चालू कर दिया. यहाँ पर हाई लाइट करना जरूरी है, हम कसमे वादों और ऐलानों की बातें नहीं कर रहे हैं, बल्कि सेंट गोबेन  का यह प्लांट गुजरात में लग चूका है.




21 हज़ार स्क्वायर फ़ीट एरिया में फैली इस फैक्ट्री में हर साल 60 लाख स्क्वायर मीटर जिप्सम सीलिंग टाइल्स का उत्पादन किया जायेगा. और इस प्लांट को लगाने में इस कंपनी ने 8 करोड़ का निवेश किया है. ताकि भारत में ही हाई क्वालिटी सीलिंग टाइल्स का उत्पादन वाजिब दाम पर किया जा सके.




चूँकि हम सभी को हज़ारों करोड़ों की बातें करने का शौक लग चूका है, इसलिए आप में से कुछ लोगों को यह 8 करोड़ की नई प्रोडक्शन फैसिलिटी का लगना एक छोटी मोती घटना लग सकती है, लेकिन हमारा आग्रह है, की इस फैक्ट्री के सन्दर्भ में आप इन्वेस्टमेंट की साइज नहीं, बल्कि उसके पीछे की इंटेंट को देखिये.




पॉइंट सिंपल हैं, तलवार का अपना काम है, और सुई का अपना. इसलिए वह पुरानी कहावत है न, की तलवार को देखकर हमने सुई की उपेक्षा  नहीं करनी चाहिए, क्योकि जहाँ सुई काम आती है, वहां तलवार बेकार हो जाती है.


दोस्तों आप ही बताएं, हम सभी चाहते हैं, की भारत को हथियारों में आत्मा निर्भर होना चाहिए, तो क्या हम सीलिंग टाइल्स के मामले में इम्पोर्ट पर ओवर डिपेंडेंट बने रहे?


जहाँ तक हम समझ सकते हैं, सेंट गोबेन  जिस प्रकार वोकल फॉर लोकल होकर मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट में शामिल हो रही है, उसका हम स्वागत करते हैं, और उम्मीद करते हैं, जैसे जैसे भारत में सीलिंग टाइल्स की डिमांड बढ़ेगी, वह इस छोटी सी शुरुआत का विस्तार समय समय पर करती रहेगी.




क्योकि कुछ लोग बाल की खाल निकालते हैं, इसलिए यहाँ पर क्रिस्टल क्लियर करना जरूरी है, इस वीडियो के माद्यम से हम सेंट गोबेन Gyproc सीलिंग का प्रचार नहीं कर रहे हैं. और नाही यह वीडियो सेंट गोबेन के द्वारा स्पॉन्सर्ड है. 




यदि आप सेलिंग टाइल्स कभी खरींदें, तो हमारा आग्रह सिर्फ इतना है, की आप मेड इन इंडिया टाइल्स ही खरीदें. चाहे वह किसी भी कंपनी ने भारत में बनाई हों.

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