Well Done Indian Army for teaching China right lesson in Sikkim
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India, China troops clash at Naku La in Sikkim, injuries on both sides
Indian soldiers thrash, push back Chinese soldiers at Naku La in Sikkim; Army issues statement
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References -
https://www.oneindia.com/india/india-thwarts-chinese-intrusion-attempt-at-naku-la-3207041.html?utm_medium=Desktop&utm_source=OI-EN&utm_campaign=Topic-Article
https://www.aajtak.in/india/news/story/india-china-face-lac-dispute-indian-army-chinese-army-clash-live-updates-1197420-2021-01-25
https://www.nationalheraldindia.com/opinion/reflections-on-republic-day-there-can-be-no-asian-century-withoutindia-pakistan-china-amity
आज के पाजिटिविटी पार्टनर हैं, श्रीकांत मराठे जी (Shrikant Marathe). स्पॉन्सरशिप के लिए आपको धन्यवाद.
जैसा की आपको पता लग गया होगा, की तीन दिनों पहले सिक्किम में चिन्दी चोर चाइना यथा स्थिति को बदलने की कोसिस कर रहा था, जिसे ना केवल भारतीय सेना ने विफल किया, बल्कि 20 चाइनीस सैनिको को मार मार कर मोमो भी बना दिया.
हाँ इसी बीच भारत और चीन के बीच लद्दाख विवाद को ख़तम करने के लिए 15 घंटे तक चली मीटिंग. यह देखने लायक होगा, की किस लाल पीले मुँह को लेकर चीनी आये होंगे. लद्दाख पर बात करने से पहले सयाने चीन ने सिक्किम का मोर्चा खोलने की सोची होगी, यहाँ तो चौबे जी छब्बे बनने गए थे, लेकिन दुबे बनकर मीटिंग में लौट आये. हाँ यह बात जरूर है, की चीन के जले पर नमक छिड़कते हुए भारतीय सेना इसे एक छोटी मोती घटना के रूप में दिखाया है.
लेकिनरिपब्लिक डे के ठीक पहले यह वीरतापूर्ण खबर के लिए सबसे पहले तो सजग भारतीय सेना को बहुत बहुत बधाई, और यह भी तब हो रहा है, जब की कुछ दिनों पहले लेट लिबरल मीडिया ने जान बूझकर ववाल खड़ा किया था, की अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना की नाक के नीचे चीन ने एक गांव बसा दिया.
जिस अख़बार ने यह खबर छापी, उन्हें भी पक्के से पता होगा. की जिस जगह पर चीन ने गांव बसाया है, वह 1962 के युद्ध के पहले से चीन के कब्जे में थी. इसलिए साफ़ हो जाता है, की जान बूझकर बात का बतंगड़ बनाने का प्रयास किया गया.
लेकिन यहाँ पर बड़ा सवाल यह है, की आखिर क्यों लद्दाख, नेपाल, सिक्किम, भूटान और अरुणाचल प्रदेश पर चाइनीस ड्रैगन लार टपकाता रहता है.
तो इसका जवाब सायद आपको पता हो, वर्तमान peoples रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के फाउंडर माओ का मानना था, की यदि तिब्बत हथेली है, तो लद्दाख, नेपाल, सिक्किम, भूटान और अरुणाचल प्रदेश उसकी पांच उंगलियां है.
और चूँकि तिब्बत पर चीन का कब्ज़ा हो चूका है, इसलिए शेष पांच उंगलियों को हथियाने की फ़िराक में चीन हमेसा लगा रहता है.
जबकि 70 साल पुराने चीन के इस फाइव फिंगर ड्रीम के बारे में भारतीय विदेश मंत्रालय को तो निश्चित रूप से पता होगा, लेकिन फिर भी हम सभी चीन की चासनी भरी बातों में फंस गए. सीमा पर फैली शांति को परमानेंट समझ कर हम तो घोड़े बेचकर सो गए, लेकिन चीन लगातार इन 70 साल पुराने सपने को साकार करने में लगा हुआ है.
इसलिए आज जो लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक हो रहा है, वह कोई इसलिए नहीं हो रहा है, की भारत अमेरिका की गोदी में जाके बैठ गया है. अरे साहब दूर जाने की क्या जरूरत है, नेपाल को ही देख लीजिये. जबकि नेपाल में चीन की चापलूस सरकार सत्ता में बैठी है, फिर भी हाल ही के दिनों में चीन ने नेपाल की जमीं पर आपने गांव बसा दिए. इसलिए पॉइंट सिंपल हैं, यदि भारत चीन के तलवे भी चाटे, तो भी बिगड़ैल बालक चीन फाइव फिंगर ड्रीम की लॉलीपॉप को नहीं छोड़ने वाला.
इसलिए हमें तो कोई गलतफहमी नहीं है, की भारत और चीन के बीच कभी सच्चे मायनो में दोस्ती हो सकती है.
हाँ यह बात और है, की आज जब सिक्किम में चीन के मुँह की खाने की खबर आयी है, उसी दिन नेशनल हेराल्ड में पने आपको बहुत बड़ा विद्वान समझने वाले व्यक्ति का लेख निकला है, जिसमे उन्होंने कहा है, इंडिया पाकिस्तान और चीन के बीच दोस्ती प्यार मोहब्बत के बिना यह सदी एशिया की सदी नहीं हो सकती है. और इनके अनुसार इस रस्ते की सबसे बड़ी बाधा हैं, मोदी साहेब.
देख लीजिये साहब, किस तरह यह चमचे दोनों तरफ खेलते हैं, चित्त भी इनकी और पट्ट भी इनकी होती हैं. अरुणाचल प्रदेश में चीन ने गांव बसा लिया, तो यह कहते हैं, की मोदी जी क्या सो रहे है. और जब भारत चीन को मुँह तोड़ जवाब देता हैं, तो यह मोदी जी पर राष्ट्रवादी आक्रामक होने का आरोप जड़ देते हैं.
इसलिए जिसको जो कहना हो कहता रहे, भारतीय सेना फाइव फिंगर के चाइनीस ड्रीम को पूरा नहीं होने दे रही है, यह हमारे लिए संतुस्टी का विषय तो है, लेकिन और भी अच्छा होगा, यदि हम पांच उंगलियों को बचाने के बजाये, सीधे हथेली यानि की तिब्बत को आजाद कराने की मुहीम पर आक्रामक होकर आगे बड़े. पॉइंट सिंपल हैं, यदि चीन से लड़ाई होनी ही है, तो तिब्बत में होनी चाहिए, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में नहीं. यदि कहीं तिब्बत आजाद हो गया, तो ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी
अंत में इस वीडियो के Sponsor श्रीकांत मराठे जी को धन्यवाद देते हुए हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
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