Europe and America understood the Real Value of India
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Soybean meal exports rise six-fold in January
Soymeal exports jump 6-folds to 3.36 lakh tonnes in January
In need of non-GM product, US turns biggest buyer of Indian soymeal
India's soymeal exports could more than double as prices rally
India’s soymeal exports could more than double as prices rally
India sees robust export demand for its soya meal
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References -
https://www.reuters.com/article/india-soymeal-exports-idUSKBN29J13U
https://www.moneycontrol.com/news/business/soymeal-exports-jump-6-folds-to-3-36-lakh-tonnes-in-january-6488201.html
https://www.financialexpress.com/market/commodities/india-sees-robust-export-demand-for-its-soya-meal/2167424/
https://www.hellenicshippingnews.com/indias-soymeal-exports-could-more-than-double-as-prices-rally/
https://www.moneycontrol.com/news/rubique/expert-talks/in-need-of-non-gm-product-us-turns-biggest-buyer-of-indian-soymeal-6172071.html
https://www.financialexpress.com/market/commodities/soybean-meal-exports-rise-six-fold-in-january/2193031/
आज के पाजिटिविटी पार्टनर हैं, J जयरामन जी (J Jayaraman ). कई दिनों के बाद पहली स्पॉन्सरशिप के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद.
सायद आपको जानकारी हो, बेहद सरल सब्दो में सोयाबीन से तेल निकालने के बाद जो by प्रोडक्ट बचता है, उसे सोया मील कहा जाता है. जिसमे प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है, उदहारण स्वरुप इसे सोया बड़ी के रूप में हम खाते हैं, और इस सोयामील को मुर्गे मुर्गियों को भी खिलाया जाता है.
अब आप सवाल पूछ सकते हैं, की आज हम सोया चंक और चिकन की बातें क्यों कर रहे हैं, तो दोस्तों point यहाँ पर हैं, भारत को मिल रहे रिकॉर्ड तोड़ मुनाफे का.
पिछले वित्तीय वर्ष तक भारत से होने वाले सोयामील मील के एक्सपोर्ट में साल दर साल गिरावट दर्ज की गयी, जबकि भारत भी सोयाबीन के प्रमुख उत्पादकों में गिना जाता है, लेकिन सोया मील के मामले में भारत कभी भी दुनिया में धाक नहीं जमा पाया, और इसका कारण यह है, की ग्लोबल सोयामील की तुलना में भारतीय सोयामील पड़ता था मंहगा.
लेकिन पिछले कुछ महीनो में हवा ने रुख बदल लिया, और हाल ही में गुजरे जनवरी महीने में भारत से होने वाले सोयामील के एक्सपोर्ट में बेतहासा बढ़ोतरी हुई है, जो की अब जनवरी 2020 की तुलना में छह गुना हो चूका है, मतलब जनवरी 2020 में भारत ने किया था 58 हज़ार टन सोयामील का एक्सपोर्ट, जो जनवरी 2021 में बढ़कर हो गया, 3.36 लाख टन.
परिणाम स्वरुप अनुमान के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में वर्तमान वित्तीय वर्ष में भारत से होने वाला सोयामील एक्सपोर्ट डबल होने जा रहा है.
अब सामने सवाल यह है, की अचानक से ऐसा क्या हो गया, की इंडोनेसिया फ्रांस और जर्मनी ने भारत से भर भर के सोयामील ख़रीदा.
तो इसका कारण यह है, की हाल ही में United States Department of एग्रीकल्चर का एस्टीमेट आया, जिसमे आशंका प्रकट की गयी, की भारत के सोयाबीन प्रोडक्शन में 20% की कमी आने वाली है, ग्लोबल सप्लाई में कमी होने के डर का परिणाम यह हुआ, की ग्लोबल सोयामील की कीमतें बढ़ने लगी, फिर क्या था, कल तक भारत का महंगा माना जाने वाला सोयामील अब दुनिया के लिए सस्ता हो गया.
और तो और साहब अमेरिका जो की दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक है, वह तक भारत से सोयामील इम्पोर्ट कर रहा है, अब आप पूछ सकते हैं, की भला अमेरिका को कियो इंडियन सोयामील की जरूरत पड़ गयी.
तो इसका जवाब यह है, की अमेरिका में जेनेटिकली मॉडिफाइड GMO सोयाबीन का मुख्या रूप से उत्पादन किया जाता है, लेकिन आज कल जमाना आर्गेनिक और नॉन GMO का है, simple सब्दो में जिन अमेरिकन लोगों को नॉन GMO चिकन खाना है, उनको खुराक में भी नॉन GMO सोयामील खिलाना पड़ता है.
इसलिए अमेरिका को करना पड़ रहा है, इंडियन नॉन GMO सोयामील का इम्पोर्ट.
साथ ही साथ यहाँ पर ध्यान में रखना जरूरी है, भारत सर्कार भी एक्सपोर्ट प्रमोशन स्कीम की तहत सोयामील एक्सपोर्टर्स को 5 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही थी, इस प्रकार सोयामील एक्सपोर्ट के लिए पोर्ट हैंडलिंग एंड ट्रांसपोर्ट कॉस्ट तो indirectly भारत सर्कार ही पे कर रही थी. स्वाभाविक है, इस सब्सिडी के कारण भारतीय सोयामील एक्सपोर्ट और भी मजबूती से ग्लोबल मार्किट में compete कर पाया है.
कहने का मतलब यह है, की इस वित्तीय वर्ष में यदि भारतीय सोयामील एक्सपोर्ट डबल होने जा रहा है, तो यह कोई मंत्र फूंकने से नहीं हुआ है, बल्कि एक्सटर्नल इंटरनल और गवर्नमेंटल जब सब के सब फैक्टर्स favorable हो गए, तभी यह सुखद परिणाम हमारे सामने आ रहे हैं.
जैसा की हमने पहले भी कवर किया है, पुरानी व्यवस्था के कारण हम यहाँ तक तो आ गए, लेकिन आगे जाने के लिए हमें अपने आपको ग्लोबल कम्पटीशन के लिए तैयार और मजबूत रखना होगा, और इसी के लिए कृषि कानूनों में किया जा रहा है सुधार, ताकि ग्लोबल मार्किट में हो रहे उतार चढ़ाव का भारत सीधा और तुरंत लाभ उठा सके.
अंत में इस वीडियो के Sponsor J जयरामन जी को धन्यवाद देते हुए हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
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