New World Solar Bank to distribute loans worth $50 Billion
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ISA to launch World Solar Bank at global climate meet in Nov
World Solar Bank aims to infuse $10 bn in solar projects across ISA members
ISA to consider solar bank plan
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References -
https://www.livemint.com/news/india/isa-to-consider-solar-bank-plan-11611507785943.html
https://www.business-standard.com/article/economy-policy/world-solar-bank-aims-to-fund-10-bn-in-solar-projects-across-isa-countries-120092201519_1.html
https://www.livemint.com/industry/energy/isa-to-launch-world-solar-bank-at-global-climate-meet-in-nov-11613582696670.html
जैसा की हम सभी देख रहे हैं, आज कल पेट्रोल डीज़ल की कीमतें बेलगाम घोड़े की तरह भागे जा रही हैं, अगर इन कीमतों को हमेसा के लिए काबू में लाना है, तो हमें कुछ गिने चुने आयल प्रोडूसिंग कन्ट्रीज पर अपनी डेपेंडेन्स को कम करना होगा, वैसे भी कॉमन सेंस कहता है, निर्भरता सिर्फ शोषण को जन्म देती है.
रेगिस्तान में मिलने वाले कच्चे तेल के अलावा दुनिया के पास सौर ऊर्जा जैसे वैकल्पिक श्रोत का विकास और विस्तार होना चाहिए. हाल ही के वर्षो में सौर ऊर्जा के छेत्र में काफी प्रगति भी हुई है. और इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के लिए कुछ वर्षो पहले स्थापना की गयी थी, इंटरनेशनल सोलर अलायन्स की. जिसमे भारत और मित्र फ्रांस ने नेतृत्वा की भूमिका निभाई थी.
लेकिन वह कहते हैं ना की, जब तक बातों को बजट की तागत ना मिले, खाली पीली बातों से कुछ नहीं होता है. इसलिए चाहे भारत की जरूरत हो, अथवा इंटरनेशनल सोलर अलायन्स में शामिल अन्य देशो की समस्या हो. सभी को बड़े बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए विशेष लोन अथवा फाइनेंसिंग फैसिलिटी की जरूरत है. यह कॉमन सेंस की बात है, easily अवेलेबल एंड अफोर्डेबल सोलर पावर प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग के बिना बड़े पैमाने पर हम कभी भी सौर ऊर्जा का दोहन नहीं कर सकते है.
जब कोई समस्या सोल्व होती है, तो पैदा होता है, व्यापर का नया अवसर, जब लोन की बात चल रही है, तो लोन देने के लिए बैंक की जरूरत भी होगी, और लोन दिया भी ऐसे जायेगा, की लोन देने वाला बैंक हमेसा फायदे में रहे. कहने का मतलब यह है, यहाँ कोई पैसा लुटाने की बात नहीं चल रही है, बल्कि एक ऐसे सिस्टम का विकास करने की कोसिस की जा रही है, ताकि भविस्य में कभी भी किसी भी सोलर पावर प्रोजेक्ट को पैसे की कमी के कारण रुकना ना पड़े.
इस प्रकार अस्तित्वा में आ रहा है, दुनिया का पहला वर्ल्ड सोलर बैंक, जिसे इस वर्ष नवंबर महीने में इंटरनेशनल सोलर अलायन्स लांच करने जा रहा है. और 30 प्रतिशत भागीदारी के साथ भारत इस इंटरनेशनल बैंक का भी लीडिंग मेंबर बनने जा रहा है. जाहिर है, भारत के साथ इंटरनेशनल सोलर अलायन्स के अन्य देश भी इसमें हिस्सेदारी रखेंगे, और फिर बाजार से पैसे उठाकर यह वर्ल्ड सोलर बैंक चल पड़ेगा.
वर्ल्ड सोलर बैंक की स्केल का अंदाज़ा लगाने के लिए सिर्फ इतना ही काफी है, की यह बैंक अगले 10 सालों में ISA मेंबर कन्ट्रीज में सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए 50 बिलियन डॉलर के लोन बांटने जा रहा है. यहाँ पर कहने की जरूरत है, की वर्ल्ड सोलर बैंक जिम्मेदार वैश्विक संस्था बनेगी, मतलब पैसा उन्ही प्रोजेक्ट पर लगाया जायेगा, जिनमे उसके डूबने की सम्भावना ना के बराबर हो.
वर्ल्ड सोलर बैंक की सबसे अच्छी बात यह है, की यह पहला ऐसा मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक होगा, जिसका हेड क्वार्टर भारत में स्थित होगा.
आपको सायद पता हो, साल 2014 में ब्रिक्स द्वारा स्थापित New डेवलपमेंट बैंक का हेडकॉर्टर चीन में हैं, वर्ल्ड बैंक अमेरिका में हैं, एशियाई डेवलपमेंट बैंक फ़िलीपीन्स में हैं. ऐसा लगता है, अकेला भारत ही इस रेस में सबसे पीछे छूट गया था. कोई बात नहीं अब वह दिन लदने वाले हैं.
अब भारत में भी होगा ग्लोबल बैंक, जो की दुनिया भर के सोलर प्रोजेक्ट को पैसा उधार देगा. क्रिस्टल क्लियर हैं, कच्चे तेल का खेल ख़तम हो सकता है, लेकिन जब तक जीवन हैं, तब तक सूरज है, इसलिए भारत में स्थापित होने वाले वर्ल्ड सोलर बैंक का भविस्य उज्जवल है, इसमें कोई संदेह है ही नहीं,
इस बैकग्राउंड में आपको याद होगा, कुछ सप्ताह पहले जब लद्दाक विवाद चरम पर था, तब भारत को दिल्ली मेरठ रेलवे कॉन्ट्रैक्ट चाइनीस कंपनी को देना पड़ गया था, क्योकि जिन ग्लोबल बैंक्स ने इस प्रोजेक्ट को फंडिंग दी थी, उन्होंने हमें बाध्य किया था, की प्रोजेक्ट देते समय यह नहीं देखा जाना चाहिए, की कंपनी चीन की है, या पाकिस्तान की,
तब हम सभी करेले का कड़वा घूँट पीकर बैठे रह गए थे, क्योकि तब भारत ने लोन लिया था, लेकिन अब वर्ल्ड सोलर बैंक के माद्यम से भारत लोन लेने वाला नहीं, बल्कि देने वाला बनने जा रहा है. कहने का मतलब यह है, की भारत अब निश्चित कर सकेगा, की वर्ल्ड सोलर बैंक किसी भी देश को बाध्य नहीं करेगा, की वह अपने दुश्मन देश की कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दे.
यह तो सिर्फ शुरुआती उदहारण है. वर्ल्ड सोलर बैंक का भारत में हेड क्वार्टर का होना पूरी तरह खेल को पलटने वाला है, और जब इंटरनेशनल सोलर अलायन्स के पास फंडिंग की रियल पावर होगी, तो दुनिया के शेष देश भी इस अलायन्स में शामिल होने के लिए लाइन में अपने आप लग जायेंगे. मोदी जी के नेतृत्वा में भारत फ्रांस के साथ जिस रस्ते पर अकेला ही चला था, वह काफिला अब बढ़ता चला जा रहा है, और हम सभी के लिए यह गौरव का कारण होना चाहिए.
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