Smart Move by Modi Ji - Super Important Infrastructure to be developed in Arunachal
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Centre okays 18 border foot tracks in Arunachal Pradesh
Centre clears over ₹1,100 crore for more roads on Arunachal border
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References -
https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/centre-okays-18-border-foot-tracks-in-arunachal/articleshow/81097554.cms
https://www.thehindu.com/news/national/over-1100-crore-for-critical-infra-along-china-border/article33873143.ece
आज के पाजिटिविटी पार्टनर हैं, J जयरामन जी (J Jayaraman ). स्पॉन्सरशिप के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद.
हम सभी देखते हैं, की लेफ्ट लिबरल मीडिया में satellite इमेज के साथ आये दिन ऐसी खबरें छपती रहती हैं, जिनमे दिखाया जाता है, की चीन ने LAC के अपनी और ये बना लिया, और हमारी और वह बना दिया. चूँकि satellite इमेज में पिछले 73 सालों का इतिहास नहीं दिखता है, इसलिए यह दर्शाना आसान हो जाता है, जबकि चीन इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माड़ कर रहा है, राष्ट्रवादी मोदी सर्कार घोड़े बेचकर सो रही है.
लेकिन सच्चाई हम सभी को पता है, की पिछले 7 सालों में सीमा वर्ती इलाकों में जिस गति से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ है, वह पहले कभी नहीं हुआ था, यहाँ तक की इंडियन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को देखकर चीन को भी मिर्ची लगती रहती है, जिसका प्रकटीकरण होता है, डोकलाम और लद्दाक विवादों के दौरान.
इस बैकग्राउंड में जब भी कभी हम बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करते हैं, तो हमारे ध्यान में आते हैं, सड़क और पुल. लेकिन जितना रोड्स एंड ब्रिड्जस का उपयोग है, उतना ही महत्वा है, फुट ट्रैक्स का, जिन पर चलकर ITBP के सैनिक LAC पर गस्त लगाया करते हैं, और इस तरह के फुट ट्रैक्स की इम्पोर्टेंस और अधिक बढ़ जाती है, जब हमें पता चलता है, की उत्तरी एवं उत्तर पूर्वी अरुणाचल प्रदेश में फुट ट्रैक्स का अभी तक आभाव था.
इसलिए जो लोग यह सवाल पूछते हैं, की चीन ने LAC के आस पास गाँव बसा लिया, उन्हें इस प्रश्न का जबाब भी तलासना चाहिए, की 2014 के पहले के सालो में फुट ट्रैक्स जैसे बेसिक एंड क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास क्यों नहीं हो पाया.
यह नकारात्मक विचार इतिहास की किताबों में दर्ज है, की border areas में इंफ़्रा डेवलपमेंट इसलिए नहीं किया गया, क्योकि चीन हमारी सडको का इस्तेमाल हमारे ही खिलाफ कर सकता है, तो कहीं सिक्योरिटी एंड एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस ने सीमा वर्ती इलाकों में आधारभूत संरचना के विकास की राह में रुकावटें पैदा कर दी.
पॉइंट सिंपल है, काम ना करने के 100 बहाने चाहिए, और करने के लिए सिर्फ एक हाँ.
जब हमारे पास चुस्त मुस्त गस्त लगाने की व्यवस्था ही नहीं थी, तो यह अपेक्षा करना कोरी मूर्खता होगी, की चीन जैसा कपटी दुश्मन LAC का सम्मान करेगा.
इस सन्दर्भ में मोदी सर्कार के निर्णय के अनुसार 1162 करोड़ रुपयों का निवेश करके अधिकतर अरुणांचल प्रदेश में 598 किलोमीटर लम्बे 18 फुट ट्रैक अथवा बॉर्डर पेट्रॉल ट्रैक्स का निमाड़ किया जायेगा.
यहाँ पर गौर करने वाली बात यह है, की 1126 किलोमीटर लम्बा बॉर्डर अरुणाचल प्रदेश चीन के साथ साझा करता है, तो इस प्रकार कहा जा सकता है,की अब भारत सर्कार लगभग आधे अरुणाचल प्रदेश के बॉर्डर पर मूलभूत इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रही है.
हालत तो जनाव इतनी गंभीर थी, की गस्त लगाने के लिए बनी लास्ट पोस्ट तक अभी ITBP के जवानो को पहुंचने में 27 दिन लगते हैं, अब आप स्वयं कल्पना कीजिये की इस दौरान चाइनीस ड्रैगन क्या कुछ नहीं कर सकता था. कॉमन सेंस कहता है, की दुश्मन कमजोरी का लाभ उठाने की फ़िराक़ में ही बैठा रहता है, इसलिए देर से ही सही अब भारत अपनी वीकनेस को स्ट्रेंथ में कन्वर्ट कर रहा है, यह एक संतोशजनक घटनाक्रम हैं.
जहाँ तक हम समझ सकते हैं. हमारी मेन स्ट्रीम मीडिया के द्वारा इस पॉजिटिव डिसिशन को कवर ना किये जाने से, इसका महत्वा किसी भी प्रकार से घट नहीं जाता है.
अंत में इस वीडियो के Sponsor J जयरामन जी को धन्यवाद देते हुए हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
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