मालदीव्स में हो गया सबसे बड़ा कांड, China India Relations



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Under Fire, Maldives Govt Says 'Leaked' Draft of Controversial Indian Defence Pact is 'Fake

Indian troops to freely operate in Maldivian island of Uthuru Thalafalhu

India, Maldives sign defence and security-related pacts

India, Maldives sign agreements for developing naval harbour, boosting defence

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References -

https://thewire.in/external-affairs/under-fire-maldives-govt-says-leaked-draft-of-controversial-indian-defence-pact-is-fake

http://www.sundaytimes.lk/210321/columns/indian-troops-to-freely-operate-in-maldivian-island-of-uthuru-thalafalhu-437089.html

https://www.thehindu.com/news/national/india-maldives-sign-defence-and-security-related-pacts/article33894011.ece

https://www.hindustantimes.com/india-news/india-maldives-sign-agreements-for-developing-naval-harbour-boosting-defence-101613921874713.html



 सायद आपको जानकारी हो, पिछले फरबरी महीने में भारतीय विदेश मंत्री मालदीव्स की यात्रा पर गए थे, जिसके दौरान भारत ने मालदीव्स को 50 मिलियन डॉलर लाइन ऑफ़ क्रेडिट के रूप में मुहैया करवाए थे, जिसका उपयोग करके मालदीव्स भारत से डिफेंस इक्विपमेंट की खरीद और डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर सकता है.


साथ में यह भी तय हुआ था, की भारत के सहयोग से मालदीव्स के UTF आइलैंड पर नेवल फैसिलिटी का निर्माड किया जायेगा, ताकि उसका उपयोग मालदीव्स की आर्म्ड फोर्सेज कर सकें.


तब इस टॉपिक को बड़े पैमाने पर कवर भी किया गया था, और इसे चीन के खिलाफ भारत की जीत के रूप में दिखाया गया था, क्योकि इस एक स्ट्रेटेजिक आइलैंड पर चालबाज़ चीन की भी काफी समय से नजर टिकी हुई थी.  


तब इस एग्रीमेंट के हो जाने के बाद हम सभी ने गरमा गरम ख़याली पुलाव खा भी लिए, लेकिन असली खेल तो शुरू हुआ उसके बाद. जिसे कवर करने की किसी के पास फुर्सत नहीं है.


जी हाँ दोस्तों,  कुछ दिनों पहले मालदीव्स की विपक्षी पार्टी और अख़बारों ने मिलकर UTF आइलैंड डेवलपमेंट को लेकर भारत और मालदीव्स के बीच के एग्रीमेंट के ड्राफ्ट को छाप दिया.


इस ड्राफ्ट में यह दिखाया गया, की मालदीव्स की सर्कार ने भारत को इस UTF आइलैंड पर अपने हथियार बंद सैनिक तैनात करने का अधिकार दे दिया है. इस प्रकार अगले 30 सालों तक भारत के सैनिक वहां पर फ्रीली ऑपरेट करते रहेंगे, और अगर दोनों देशो में सहमति बनी, तो इस एग्रीमेंट को अगले 30 सालों के लिए आगे बड़ा दिया जायेगा.


अब आपको लग सकता है, की यह तो बड़ी अच्छी खबर है. लेकिन दोस्तों, जिस तरह इस ड्राफ्ट को लीक करके बात का बतंगड़ बनाया गया, उसमे यह दर्शाया गया, की मालदीव्स की वर्तमान सरकार ने अपनी सम्प्रभुता भारत को गिरवी रख दी है.


यह विवाद कितना तूल पकड़ चूका है, यह बात इसी से समझ आती है, की इस मुद्देद पर मालदीव्स की पार्लियामेंट में चर्चा हो चुकी है, और मालदीव्स की सरकार और डिफेंस फोर्सेज ने यह भी कह दिया है, की जो ड्राफ्ट लीक किया गया है, वह फेक है.


साथ में यह साफ़ किया गया, की नेवल डाकयार्ड का मालिकाना हक़ पूरी तरह से मालदीव्स के हाथ में रहेगा, और वही उसे ऑपरेट करेगा. और यदि कोई टेक्निकल स्टाफ भारत से आता है, तो वह भी मालदीव्स की परमिशन से आएगा और मालदीव ही तय करेगा, की वह कब तक UTF आइलैंड में रहें.


लेकिन ऐसा कह देने मात्र से मुद्दा कहाँ मरता है. मालदीव्स में अब मांग उठ रही है, की यदि वह ड्राफ्ट फेक है, तो रियल ड्राफ्ट को रिलीज़ कर दो.


आपको अच्छे से याद होगा, अभी कुछ ही दिनों पहले श्री लंका का ईस्ट कंटेनर टर्मिनल प्रोजेक्ट हमारे हाथों से फिसल गया, वहां भी इसी तरह का लॉजिक दिया गया था. 


और पीछे जाएँ तो इसी तरह का राष्ट्रवादी बबंडर खड़ा किया गया, सेशेल्स में, जिसके परिणाम स्वरुप assumption आइलैंड का नेवल प्रोजेक्ट कैंसिल हो गया.


इसलिए यदि आप इन सभी डॉट्स को कनेक्ट करने की कोसिस करें, तो आप पाएंगे, की same to same एक ही कहानी को अलग अलग प्रोजेक्ट पर बेचकर भारत के बने बनाये काम को बिगाड़ा गया. इन सबके पीछे किस देश का अदृश्य लाल हाथ और पैसा काम कर रहा है, वह तो आपको भी पता है.


लेकिन बड़ी बात यहाँ पर यह है, की पहले तो हमारे यहाँ की मीडिया समय से पहले बूंदी के लड्डू बाँट देती हैं, मतलब काम हुआ नहीं है, लेकिन ढिढोरा पहले पीट दो. और फिर बचा कुचा भारत विरोधी काम दूसरे देश की मीडिया और opposition पार्टिया कर देती है.


जहाँ तक मालदीव्स के UTF प्रोजेक्ट का सवाल है, अब तो रायता फ़ैल चूका है, इस प्रोजेक्ट पर भारत की गाड़ी पटरी से उतरती है या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा. लेकिन कम से कम हमें यह तो सीखना होगा, की देश विदेश में अपने प्रोजेक्ट का प्रचार कैसे किया जाये, नहीं तो हर बार यही होगा, मीटिंग रूप में हुए स्ट्रेटेजिक एग्रीमेंट को चाइना स्पॉन्सर्ड मीडिया ट्रायल के द्वारा तोड़ देगी.

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