मोदी जी के खिलाफ होसियारी सऊदी को पड़ी बहुत भारी ,Crude Oil Price Fall
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Oil Prices Fall on Fresh Fears of Dwindling Demand
Oil drops nearly 6% as dollar rises and vaccine rollout stalls
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References -
https://www.wsj.com/articles/oil-prices-fall-on-fresh-fears-of-dwindling-demand-11616096649
https://auto.economictimes.indiatimes.com/news/oil-and-lubes/indias-oil-demand-falls-5-in-february/81481439
https://economictimes.indiatimes.com/markets/commodities/news/oil-drops-nearly-6-as-dollar-rises-and-vaccine-rollout-stalls/articleshow/81575592.cms
आज के पाजिटिविटी पार्टनर हैं, एडवोकेट गंगाधर रामराव चव्हाण जी (Adv Gangadhar Ramrao Chavan ) फ्रॉम पुणे. स्पॉन्सरशिप के लिए आपको धन्यवाद.
आम तौर पर किसी भी चीज़ का जैसे जैसे भाव ऊपर चढ़ता है, वैसे वैसे उसकी मांग भी नीचे गिरने लगती है. यही देखने को मिला आंकड़ों में, जनवरी महीने की तुलना में फरबरी महीने में पेट्रोलियम प्रोडक्ट की consumption में 5 फीसदी की गिराबट आ गई. और इस प्रकार फरबरी महीने में भारत में पेट्रोल डीज़ल जैसे ईंधन की खपत पिछले सितम्बर के बाद सबसे निचले स्तर तक पहुंच गयी है.
इसी बीच भारत में कोरोना के केस बढ़ रहे है, साथ ही साथ यूरोप में भी कोरोना लहर जोर पकड़ रही है. यहाँ तक की फ्रांस ने पेरिस में lockdown लगा दिया, और कई यूरोपियन देशो में कोरोना वैक्सीन के साइड इफ़ेक्ट को लेकर भी चिंता और संदेह का माहौल बना हुआ है,
इस प्रकार एक और जहाँ कीमतों में उछाल के कारण खपत में गिरावट आ ही रही थी, तो दूसरी और कोरोना के कारण डिमांड के बढ़ने की सम्भावना पर लग गया सवालिया निशान.
इसी के साथ रिपोर्ट आयी, की टेक्सास में हाल में मौसम की खराबी के चलते कुछ रिफाइनरी को बंद रखना पड़ा, लेकिन तेल का उत्पादन उस दौरान जारी रहा, परिणाम स्वरुप अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार लबालब भर चूका है.
यहाँ तक की इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की लेटेस्ट मंथली रिपोर्ट में निकलकर आया है, की दुनिया भर में आयल के स्टोरेज भरे पड़ें हैं, और डिमांड के मुकाबले सप्लाई में कोई कमी नहीं है. इसलिए यह डर निराधार है, की ओपेक के प्रोडक्शन कट से बढ़ती डिमांड के सामने सप्लाई कम पड़ जाएगी.
इस प्रकार क्रूड आयल की डिमांड बढ़ने की बात तो छोड़ ही दीजिये, उल्टा उसकी सप्लाई बढ़ गयी. परिणाम स्वरुप कल अमेरिका में कच्चे तेल की कीमतों में आयी 7 फीसदी की भारी गिरावट. यह कितना बड़ा घटनाक्रम है, यह सिर्फ इसी बात से क्लियर हो जाता है, की पिछले सितम्बर महीने की तुलना में एक ही दिन में कच्चे तेल की कीमतों में आयी यह सबसे बड़ी गिरावट है.
इस डिमांड सप्लाई सिचुएशन में कच्चे तेल का भाव कैसे रियेक्ट करेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा.
लेकिन प्रोडक्शन कट करके सऊदी अरब के पिछलग्गू देश जिस जैकपॉट की जुगाड़ लगाए बैठे थे, हाल फ़िलहाल वह भी उनके हाथो से फिसलता नजर आ रहा है. यही होता है, सयाने के साथ.
इस पुरे घटनाक्रम से सीखते हुए, भारत ने भी खाड़ी के कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए अमेरिका से तेल की खरीद बड़ा दी थी, और रूस से नए लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर भी बात चालू हो गयी थी.
इस सन्दर्भ में यह भी कहा जा सकता है, की चतुर ओपेक को डिमांड के गिरने और सप्लाई के बढ़ने के इस एडवर्स सिनेरियो के बारे में पहले से पता था, और इसीलिए उन्होंने प्रोडक्शन कट को मेन्टेन रखने का निर्णय लिया था. एक हद तक यह बात सही भी है, क्योकि इस हालत में यदि ओपेक आयल प्रोडक्शन को बड़ा देता, तो सायद अभी कच्चे तेल की कीमतों में ऐसी गिरावट आती, की हाहाकार मच जाता.
लेकिन प्रोडक्शन कट मेन्टेन करके भी ओपेक ने कौन सा तीर मार लिया, भाव में तो कमजोरी आ ही गयी ना, मुद्दे की बात यह है, की कीमतों में तेजी से आने वाला उतार चढ़ाव ना तो उत्पादक और ना ही उपभोक्ता, किसी के लिए भी लाभकारी नहीं है, हम उम्मीद करते हैं, सयाने सऊदी अरब को अब यह छोटी सी बात समझ आएगी. समझ आये अथवा ना आये, भारत के सामने उसका असली रूप तो उजागर हो ही गया है.
जबकि कच्चे तेल के भावो में नरमी आ रही है, मोदी सर्कार भले ही पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर टैक्स में कटौती नहीं कर सकी, परन्तु हम उम्मीद करते हैं, की आयल मार्केटिंग कम्पनीज कम से कम अब पेट्रोल और डीज़ल के भाव कम करके आम आदमी को राहत देने का काम जल्दी से जल्दी करेंगी.
अंत में इस वीडियो के Sponsor पुणे के एडवोकेट गंगाधर रामराव चव्हाण जी को धन्यवाद देते हुए हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
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