भारत से दोखेवाजी पड़ी नेपाल,साउथ अमेरिका पर भारी, Indian Import
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India asks Nepal to check authenticity of certificate of origin of soybean oil
Curb illegal palm, soybean oil imports from Nepal, urges industry body
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References -
https://kathmandupost.com/money/2021/03/21/india-asks-nepal-to-check-authenticity-of-certificate-of-origin
https://www.thehindubusinessline.com/markets/commodities/curb-illegal-palm-soybean-oil-imports-from-nepal/article26982082.ece
हमारी तरह आपको जानकर हैरानी होगी, की नेपाल ना तो बड़े पैमाने पर सोयाबीन का उत्पादन करता है, और ना ही नेपाल के पास बड़े पैमाने पर कैपेसिटी है, की वह विदेशो से सोयाबीन को इम्पोर्ट कर उससे तेल निकालकर भारत में एक्सपोर्ट करे.
फिर भी कमाल देखिये, नेपाल सबसे अधिक एक्सपोर्ट करता है, सोयाबीन आयल का. जी हाँ दोस्तों, यह सोयाबीन आयल डंप हो रहा है, भारत में.
पहले यही नेपाल भारत में मलेशिया और इंडोनेशिया का पाम आयल डंप करता था, लेकिन पिछले साल जनवरी में भारत ने पाम आयल के इम्पोर्ट को रेस्ट्रिक्ट कर दिया, मतलब पाम आयल की डंपिंग का रास्ता तो बंद हो गया.
तुम डाल डाल हम पात पात के मुहाबरे पर चलते हुए नेपाल ने पाम आयल की जगह भारत में सोयाबीन आयल को एक्सपोर्ट करना चालू कर दिया, परिणाम स्वरुप नेपाल से भारत को होने वाले सोयाबीन आयल के एक्सपोर्ट में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है.
दरअसल नेपाल साल 2004 के साउथ एसीएन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की मलाई उड़ा रहा है. जिसके तहत नेपाल भारत में ड्यूटी फ्री एक्सपोर्ट कर सकता है. लेकिन किसी भी अन्य देश को यही सोयाबीन आयल भारत में एक्सपोर्ट करने के लिए 45 फीसदी की इम्पोर्ट ड्यूटी देनी पड़ेगी.
इस इम्पोर्ट ड्यूटी की चोरी से, भारत सर्कार को सोयाबीन आयल के प्रति टन इम्पोर्ट पर 35 हज़ार का लोस्स खाना पड़ रहा है, क्योकि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के कारन नेपाल बिना इम्पोर्ट ड्यूटी पे किये सोया बीन आयल को इंडियन मार्किट में डंप कर रहा है.
अब सवाल उठता है, की नेपाल के पास इतना सोयाबीन आयल आखिर आ कहाँ से रहा है?
सायद आपको जानकारी हो, साउथ अमेरिका, जहाँ पर सोयाबीन के सबसे बड़े उत्पादकों में गिना जाने वाला ब्राज़ील स्थित है, उसी का सोयाबीन आयल नेपाल के रास्ते भारत के मार्किट में पहुंच रहा है.
जिसका नुकसान उठाना पड़ रहा है, भारत के सोयाबीन उत्पादक किसानो और सोयाबीन से तेल निकालकर बेचने वाली कंपनियों को, और उन्होंने जोर शोर से यह मुद्दा उठाया भी था. की नेपाल की दलाली को बंद किया जाये.
देख लीजिए, कैसे पडोसी हैं हमारे, ये खून चूस रहे हैं, हमारा, और गालियां भी देते हैं हमें ही, अरे नेपाल में हिम्मत है, तो अपने प्यारे चीन के साथ करके दिखाए यह सब.
एनीवे नेपाल की इन हरकतों से तंग आकर भारत सर्कार ने आधिकारिक रूप से कह दिया है, की नेपाल को चेक करना होगा, की क्या उसने अपने सोया बीन आयल एक्सपोर्टर्स को सही सर्टिफिकेट ऑफ़ ओरिजिन दिया है.
सरल सब्दो में नेपाल को यह निश्चित करने को कहा गया है, की वही सोयाबीन आयल भारत में नेपाल एक्सपोर्ट करे, जिसका वह स्वयं उत्पादन करता हो.
और नेपाल के पास इस शिकायत पर अमल करने के लिए तीन महीने है, और इस दौरान भारत अपने हिसाब से उचित निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है.
अब आप में से कुछ लोग कहेंगे, की ऐसा करने से तो सोयाबीन आयल भारत में महंगा हो जायेगा, तो आप ही बताएं, ऐसा कब तक चलेगा, की आपको नौकरी चाहिए मोदी जी से, लेकिन सस्ता माल चाहिए चीन से, किसानो की आय बढ़ाएं मोदी जी, लेकिन ब्राज़ील का सोयाबीन आयल और मलेशिया का पाम आयल सस्ते दामों पर बराबर आते रहना चाहिए नेपाल से.
मतलब ऐसा कैसा यह खेल है, जिसमे चित्त भी आपकी है, और पट्ट भी आपकी है.
हर दिन कोई न कोई बड़ा अर्थ शास्त्री ज्ञान देता रहता है, की भारत ने इम्पोर्ट ड्यूटी कम कर देनी चाहिए, सब देशो के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर लेने चाहिए. अरे भाई, तो जरा ये भी बता दो, की लोगों को रोजगार देने के लिए कौन कौन से दूसरे देश जिम्मेदार हैं.
हमने कभी इन अर्थ शास्त्रियों को यह अफ़सोस जताते नहीं सुना है , की इस फ्री ट्रेड के फ़र्ज़ी बाड़े से भारत को बहुत नुकसान हुआ है, दोस्त हो या दुश्मन हो, पडोसी हो या दूर का देश हो, जिसको जहाँ जैसा मौका मिला, उसने वहां भारत का खून चूसा है
चलिए इन पाखंडी लोगों के बारे में और क्या बात करना, मुद्दे की बात यह है, की समय पर मोदी सरकार ने नेपाल और साउथ अमेरिका की लगाम कसने की कोसिस की है.
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