भारत के दाव से सब खा गए गच्चा, Indian Smart Trade Policy
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Govt to Boost Buffer Stock of Onion by 100 per cent to Avert Price Rise of Kitchen Staple
Few takers for Turkish onions in Sahibabad
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References -
https://www.news18.com/news/india/govt-to-boost-buffer-stock-of-onion-by-100-per-cent-to-avert-price-rise-3563510.html
https://www.thehindu.com/news/national/few-takers-for-turkish-onions-in-sahibabad/article30259474.ece
हर साल कभी न कभी प्याज़ की बढ़ती कीमते खरीदते समय हमारी आँखों से आंसू निकाल देती है.
यह एक आम अनुभव की बात है, की प्याज़ की बढ़ती कीमतों का लाभ किसानो को कभी नहीं मिलता है, बल्कि होर्डिंग और ब्लैकमार्केटिंग के जरिये दलाल लोग प्याज़ के धंधे में मालामाल होते हैं. गरीब किसान तो दोनों तरफ से कटते हैं.
मौसम की मार पड़ने से प्याज़ का उत्पादन कम होता है, तो प्याज़ की कीमतें केवल तब बढ़ती है, जब वह अपना माल सस्ते भाव पर बेच चुके होते हैं.
परन्तु जब उनके खेतों में उत्पादन भर भर के होता है, तो प्याज़ की कीमतें तुरंत धड़ाम से नीचे गिर जाती है.
मतलब दोनों ही केस में दलालों के वारे न्यारे हो जाते हैं, लेकिन उत्पादक और उपभोक्ता को एक साथ चपत लगती है.
अब यदि आप देश के लेवल पर देखें, प्याज़ की कीमतों के बेलगाम हो जाने के बाद पिछले साल भारत ने टर्की इजिप्ट और अफ़ग़ानिस्तान से प्याज़ इम्पोर्ट को चालू किया और तुरंत प्रभाव से ओनियन के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी.
अचानक से लिए गए इस निर्णय से बांग्लादेश जैसे देशो का हाज़मा बिगड़ गया, यहाँ तक की बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तक तब बेचैन हो उठी थी. कहने की जरूरत नहीं है, ओनियन एक्सपोर्ट पर रोक लगने से विदेशी मुद्रा कमाने का मौका भी हमारे हाथों से निकल गया.
जब टर्की और इजिप्ट से प्याज़ भारत आयी तो पता चला की वहां की प्याज़ भारतीय प्याज़ के मुकाबले कम तेज है, परिणाम स्वरुप डिस्काउंट के बाबजूद उस सफ़ेद प्याज़ के खरीददार ढूंढे नहीं मिल रहे थे. यहाँ तक ही जब प्याज़ भारत पहुंच चुकी थी ,तो राज्य सरकारों ने अपने हाथ खड़े कर दिए, वह इस प्याज़ को पोर्ट से उठाये इसके लिए मोदी सरकार को मीटिंगें करनी पड़ी थी.
इस प्रकार साफ़ हो जाता है, प्याज़ के खेल में भारत सरकार को दोनों ही तरफ नुकसान हुआ है, और यहाँ पर हम जिस पैसे के नुकसान की बात कर रहे हैं, वह हम टैक्स पेयर का ही तो पैसा है, जिसकी बलि चढाई गयी टर्की और इजिप्ट से प्याज़ खरीदने के लिए.
कहने का मतलब है, कुछ भी बुरा कहीं पर भी हो, अंत में उसका बिल फटता आम आदमी पर ही है, जो चुपचाप हर चीज़ पर टैक्स भरता रहता है.
एनीवे सवाल यहाँ पर यह है, की आखिर प्याज़ के इस चक्रव्यूह से बहार कैसे निकला जाये. इसी उधेड़ बुन में लगी हुई है, मोदी सरकार.
और उसने अब निर्णय लिया है, की इस साल से प्याज़ के बफर स्टॉक को डबल कर दिया जाये, यानि की अब 2 लाख मीट्रिक टन का बड़ा प्याज़ का स्टॉक भारत सरकार खुद तैयार रखेगी.
जिसे प्याज़ की फसल आते ही खरीद कर उन स्ट्रेटेजिक लोकेशसं पर रखा जायेगा, जहाँ पर आम तौर पर प्याज की किल्लत आती है, ताकि जैसे ही प्याज़ की कीमतें बेलगाम हों, बफर स्टॉक से निकालकर माल मार्किट में पटक दिया जाये.
जब भारत सरकार के पास डबल कैपेसिटी का ओनियन बफर स्टॉक होगा, तो दलालो की भी हिम्मत नहीं होगी, की वह प्याज़ की होर्डिंग करें. सरल सब्दो में यह प्याज़ का बफर स्टॉक दलालो के दिल में डर पैदा करेगा.
यहाँ पर कहना जरूरी है, अब चूँकि सरकार प्याज़ की खरीद को डबल कर रही है, किसानो को उनकी फसल का बेहतर भाव मौके पर मिल पायेगा.
साथ ही प्याज़ की किल्लत होने पर मोदी सरकार को विदेशो से महँगी प्याज़ खरीदकर उसे भारत में सड़ने के लिए फेंकना नहीं पड़ेगा.
अब यह सही निर्णय कितना कारगर होता है, यह तो इस साल सितम्बर से दिसंबर के बीच ही पता चलेगा, लेकिन अच्छी बात यह है, की पुराणी गलतियों से हम सीख रहे हैं, और उन्हें सुधारने की कोसिस बराबर चालू है.
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