जापान के साथ मिलकर भारत ने कर दिया हाइड्रोजन का धमाका
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Experts from India, Japan talk about decarbonisation and promotion of hydrogen
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References -
http://www.uniindia.com/india-needs-hydrogen-partnership-with-japan-for-clean-energy-goal-says-envoy/india/news/2375261.html
https://www.outlookindia.com/newsscroll/experts-from-india-japan-talk-about-decarbonisation-and-promotion-of-hydrogen/2067680
https://www.certifhy.ca/Green%20and%20Blue%20H2.html
आज के पाजिटिविटी पार्टनर हैं, मुकुल गर्ग जी (Mukul Garg ). स्पॉन्सरशिप के लिए आपको धन्यवाद.
सायद आपको जानकारी हो, की इस साल के बजट में नेशनल हाइड्रोजन एनर्जी मिशन की घोसणा की गयी है, जिसके तहत हाइड्रोजन को ऊर्जा के स्वच्छ और सस्ते विकल्प के रूप में विकसित किये जाने का लक्ष्य है. साथ ही साथ हाइड्रोजन गैस कच्चे तेल के इम्पोर्ट पर हमारी निर्भरता को कम करने में हमारी मदद करने बाली है.
सरल सब्दो में जब हाइड्रोजन को सीधा पानी को तोड़कर प्राप्त किया जाता है, तो उसे ग्रीन हाइड्रोजन कहते हैं, ओर यदि नेचुरल गैस को तोड़कर उसका कार्बन अलग से इखट्टा कर लिया जाये, तो जो हाइड्रोजन बचता है, उसे ब्लू हाइड्रोजन कहा जाता है. लेकिन दोनों ही प्रकार की हाइड्रोजन को जलाने से मिलता है, पानी ओर ऊर्जा. मतलब नो पोल्लुशन
चाहे ग्रीन हो या ब्लू हाइड्रोजन उनके दोहने के लिए बेहतर ओर लाभकारी टेक्नोलॉजी सोलुशन का विकास अभी चल रहा है, ओर साथ में इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाना अभी बाकि है.
हाइड्रोजन फ्यूल के इस लक्ष्य को हांसिल करने के लिए भारत अकेला कोसिस कर रहा है, लेकिन जापान दुनिया का ऐसा देश था, जिसने सबसे पहले हाइड्रोजन स्ट्रेटेजी का विकास किया था.
चूँकि इस रास्ते पर जापान सबसे पहले आगे बढ़ने वाले देशो में था, इसलिए जापान ने इस फील्ड में तुलनातमक रूप से महारत हासिल का ली हैं.
यहाँ तक की जापानी कंपनी टोयोटा ने तो हाइड्रोजन पॉवर्ड व्हीकल का विकास करके उसे बाजार में भी उतार दिया है.
जापान की इस दक्षता का लाभ उठाने की अब कोसिस कर रहा है, भारत. और इसके लिए बैठकों और विचार विमर्श का कार्यक्रम भी चालू हो चूका है.
हाल ही में इंडिया और जापान के बीच हाइड्रोजन इकॉनमी के ऊपर वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमे जापान के लिए भारत के राजदूत ने आह्वाहन किया, की दोनों देशो के बीच स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का विकास किया जाना चाहिए, ताकि हाइड्रोजन के दोहन और उपयोग के लिए जापानी टेक्नोलॉजी बिना रोक टोक और हिच कीचाहट के भारत को मिलने लगे.
यहाँ तक की भारत में जापान के दुताबास के वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस पहल का स्वागत किया, उनका कहना था, की नेचुरल गैस के अलावा दोनों देश मिलकर बायो फ्यूल से भी Hydrogen को प्राप्त करने की कोसिस करनी चाहिए. इस तरह से हाइड्रोजन का दोहन करना पूरी तरह से एक नया छेत्र है.
इस प्रकार साफ़ है, भारत और जापान १ और १ मिलकर ११ होने का प्रयास कर रहे हैं.
हाल ही में UAE का भी रुझान हाइड्रोजन की तरफ खूब बड़ा है. और उसने भारत के साथ मिलकर चलने की इच्छा भी जताई थी. कच्चे तेल को दुनिया भर में बेचने वाला UAE अब प्रमुख हाइड्रोजन सप्लायर भी बनना चाहता है. लेकिन टेक्नोलॉजी के लिए वह भी साउथ कोरिया और जापान के साथ सहयोग के रास्ते तलाश रहा है.
हमने इस टॉपिक पर बनाये पिछले video में हाइड्रोजन के लिए UAE के साथ पार्टनरशिप का समर्थन किया था. लेकिन स्वाभाविक रूप से UAE की तुलना में हम सभी जापान को अधिक प्राथमिकता देते हैं.
नेशनल हाइड्रोजन मिशन की घोसणा करके मोदी सरकार ने दिखा दिया, की वह हाइड्रोजन के ईंधन के रूप में बड़े पैमाने पर प्रयोग के प्रति गंभीर है, तभी तो पहले UAE और अब खुद जापान आगे बढ़कर आये है.
अपना शोषण रोकने के लिए खाड़ी के कुछ गिने चुने देशो के कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता को हमें कम करना ही होगा, इसलिए सही मायनो में देखा जाये, तो ऊर्जा के क्लीन एंड renewble सोर्स के रूप में हाइड्रोजन गैस हमारे लिए विकल्प नहीं मजबूरी बन चुकी है.
दोस्तों भारत और जापान के बीच जब इतनी महत्वपूर्ण पार्टनरशिप की नीव पड़ रही है, तब इस घटनाक्रम को हमारी बिजी मीडिया बड़े बड़े youtubers कवरेज नहीं दे पा रहे है. लेकिन हमारी फोकस इस तरह के टॉपिक्स पर हमेसा बनी रहेगी, इसलिए आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलियेगा.
अंत में इस वीडियो के Sponsor मुकुल गर्ग को धन्यवाद देते हुए हम यह वीडियो समाप्त करते हैं.
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