बाइडेन और मोदी जी की चाणक्य नीति कर गयी कमाल
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China offers to host peace talks between Afghan government and Taliban
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References -
https://www.livemint.com/news/world/china-offers-to-host-peace-talks-between-afghan-government-and-taliban-11621346265014.html
https://www.aninews.in/news/world/asia/pak-makes-strategic-shift-against-taliban-to-balance-us-china-relations20210519144705/
जैसा की हमने पिछले कुछ दिनों में चर्चा की है, की अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका का भाग खड़ा होना, पाकिस्तान के लिए सबसे बुरी खबर है.
जबसे बाइडेन साहब ने घोसणा की है, की चाहे जो कुछ हो जाये, वह तो इस साल ११ सितम्बर के पहले अफ़ग़ानिस्तान की धरती छोड़ के ही रहेंगे. तभी से पाकिस्तान के पसीने छूटे हुए हैं.
जीत का जश्न मनाना तो छोड़ दीजिये साहब, उल्टा पाकिस्तान को दिन में तारे दिखने लगे है. क्योकि अमेरिका का अफ़ग़ानिस्तान रहना मतलब की उसका पाकिस्तान पर निर्भर बना रहना, निर्भरता सिर्फ शोषण को जन्म देती है, यह तो हमें पता है ही.
इसलिए अफ़ग़ानिस्तान छोड़ देने के बाद वह अमेरिका की कनपटी पर कोन सी खाली बन्दूक रखेगा, इसी सोच में पाकिस्तान के होश उड़े हुए हैं.
यही दिखाई दिया, ANI की रिपोर्ट में, जिसके अनुसार पाकिस्तान ने तालिबान को साफ़ साफ़ सन्देश दे दिया है, की उसे अफ़ग़ानिस्तान की सर्कार से बात चीत करनी ही होगी, और मिल बांटकर अफ़ग़ानिस्तान पर राज करना होगा. नहीं तो पाकिस्तान तालिबान की हवा टाइट कर देगा.
ANI की रिपोर्ट की माने तो पाकिस्तान को डर है, की यदि तालिबान का अफ़ग़ानिस्तान पर एक छत्र राज्य हो गया, तो देर सवेर रावलपिंडी के राज्य पर भी संकट के बादल मंडराने लगेंगे. जिस सांप को पाकिस्तान ने पाल पोस कर बड़ा किया, कहीं अब वह उसे ही ना डस ले. इसी डर से पाकिस्तान अब पतला हो रहा है.
पाकिस्तान के रवैये में परिवर्तन हुआ है, या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन यदि पाकिस्तान ने अपनी साजिस में बदलाव नहीं किया, तो वह और भी अच्छा होगा, तालिबान ने अफ़ग़ान सर्कार को उखाड़ फेंकने की कोसिस की, तो पाकिस्तान पर अमेरिकी और यूरोपियन गाज पक्के से गिरेगी. इसलिए इस समय पाकिस्तान के आगे कुआ और पीछे खाई है.
इसलिए अपन को टेंशन नहीं लेना है, टेंशन लेने का काम अब चीन पाकिस्तान करेंगे.
यही देखने को मिला जब चीन के विदेश मंत्री तक कहने लगे हैं, की वह अफ़ग़ान सर्कार के साथ खड़े हैं, और तालिबान के साथ उसकी बातचीत भी करवाने के लिए भी तैयार हैं.
भारत और अमेरिका का सरदर्द यदि पाकिस्तान और चीन पर transfer हो जाये, तो उससे अच्छी बात और क्या होगी.
अब इस खेल का अच्छा पहलू यह है, की अफ़ग़ान सर्कार तो भारत की दोस्त है ही, इसलिए अफ़ग़ान सर्कार के हाथ यदि चीन और पाकिस्तान मजबूत करें, तो यह ऐसा होगा, मानो की हमारा दुश्मन ही हमारा काम पूरा कर जाये.
चीन और पाकिस्तान की हाल की कोसिसें तालिबान के पर कतरने वाली है,
इसलिए सायद आपके ध्यान में होगा, जब भारत के बड़े बड़े डरपोक एक्सपर्ट ज्ञान पेल रहे थे, की भारत ने बदलती स्थति के मद्देनजर तालिबान को दोस्त बना लेना चाहिए, तब हम सभी का साफ़ तौर पर मत था, की जब इतने उतार चढ़ाव के बाबजूद पाकिस्तान ने अपना पाला नहीं बदला, तो भारत क्यों अफ़ग़ानिस्तान के खेल में अपनी टीम बदल ले.
भारत की इसी रणनीति का कमाल देखिये, अब चीन और पाकिस्तान कोसिस कर रहे हैं, की अफ़ग़ान सर्कार और तालिबान एक टेबल पर बैठे.
बाइडेन के अफ़ग़ानिस्तान के छोड़ने के ऐलान से पाकिस्तान का अमेरिका के ऊपर बना बनाया तिलिस्म टूट चूका है, जो की भारत के लिए एक बेहद अच्छी खबर है, बिना किये ही सब काम अपेक्षा के अनुरूप हो जाये, तो उससे बढ़िया क्या है.
जहाँ तक आपका यह कहना हो सकता है, की ऐसा कुछ नहीं होगा, पाकिस्तान का प्यादा तालिबान अफ़ग़ानिस्तान की सर्कार का तख्ता पलट कर देगा, तो दोस्तों, हम तो यही कहेंगे, आपके मुँह में घी शक्कर, ऐसा हो जाये, तो तो मजा आ जायेगा, काबुल के जलने के पहले पाकिस्तान पर प्रतिबंधों की आग गिरेगी.
पिछले चालीस सालों में यह पहली बार हो रहा है, जहा अफ़ग़ान खेल का परिणाम चाहे कुछ भी हो, भारत की जीत सुनिश्चित है.
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