बिना लड़े ही भारत ने यूरोपियन जंग जीती
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EU Parliament refuses to endorse investment pact with China after India Summit
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References -
https://economictimes.indiatimes.com/news/international/business/eu-parliament-refuses-to-endorse-investment-pact-with-china-after-india-summit/articleshow/82838888.cms
आज के टॉपिक की चर्चा करने के पहले जरा आप कल्पना कीजिये, भारतीय मीडिया और यूट्यूब पर कितना बबंडर खड़ा होता, यदि यूरोपियन यूनियन भारत के साथ लगभग फाइनल हो चुकी डील को अस्वीकार करके चीन के साथ उसी डील के लिए बातचीत चालू कर देता.
मोदी जी की विदेश निति हुई असफल, भारतीय हितों को लगा धक्का ऐसी ही ना जाने कितनी हेड लाइन्स के साथ अभी तक कई आर्टिकल और वीडियो छप जाते.
लेकिन अब चूँकि हो रहा है, इसका ठीक उल्टा तो भारत में किसी को फुर्सत ही नहीं है, चीन का गुणगान करने वाले बड़े बड़े youtubers आज ऐसे टॉपिक खोज रहे होंगे,जहाँ भारत की नाक कटी हो, एनीवे हम ऐसे ही टॉपिक जिन्हे सब इग्नोर कर देते हैं उन्हें हम आपके लिए कवर करते रहेंगे, इसलिए आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिये.
तो दोस्तों 5 मई को एक वीडियो में हमने इस सम्भावना की चर्चा की थी, और यदि आपके यह वीडियो नहीं देखा, तो पुरे केस को समझने के लिए जरूर देख लीजियेगा.
सरल सब्दो में मुद्दे की बात यह थी, की सात सालों की लम्बी बातचीत के बात पिछले साल के अंत में चीन और यूरोप के बीच कम्प्रेहैन्सिव एग्रीमेंट on इन्वेस्टमेंट फाइनल हो गया था. और उसे इस सप्ताह तक यूरोपियन यूनियन की पार्लियामेंट और मेंबर स्टेट के द्वारा अप्रूव किया जाना था,
लेकिन इससे पहले की यूरोपियन पार्लियामेंट बैठ पाती, चीन में मुसलमानो के ऊपर हत्याचारों के खिलाफ कदम उठाते हुए यूरोपियन यूनियन ने चीन के दोषी अधिकारियो के ऊपर प्रतिबन्ध लगा दिए, तो अपनी गलती स्वीकारने के बजाय उल्टा चीन ने यूरोपियन यूनियन पार्लियामेंट के निर्वाचित सदस्यों के खिलाफ सैंक्शंस ठोक दिए.
तब जाके यूरोपियन यूनियन को हवा लगी, की जिसे दोस्त समझकर वह सालों साल पाल पोस रहे थे, वह असलियत में भस्मासुर निकला.
फिर क्या था, पिछले गुरुवार को यूरोपियन यूनियन पार्लिमेंट की एक तरफा वहुमत ने चीन के साथ ट्रेड डील पर ठप्पा लगाने से मना कर दिया.
और साथ में यह भी कह दिया, की एग्रीमेंट पर बातचीत तभी होगी, जब पहले तो चीन यूरोपियन यूनियन के सांसदों के ऊपर से प्रतिबन्ध हटाएगा, और साथ में यूरोपियन यूनियन चीन और होन्ग कोंग में मानव अधिकारों की स्थिति में सुधार देखना चाहती है.
और तो और यूरोपियन यूनियन की पार्लियामेंट ने यह तक कहा, की चीन के साथ जो भी तना तनी होती रहे, उसका ताइवान के साथ हो रहे एग्रीमेंट और आपसी व्यापर पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए.
आज कल चीन जितना अड़ियल हो गया है, वह यह बात अपनी नाक पर ही लेगा, इसलिए उसके झुकने का सवाल ही नहीं होता, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे के सिद्धांत पर काम करके वह यूरोपियन यूनियन से भिड़ता रहेगा,
वैसे भी कोई अचरज नहीं है, जब लोमड़ी की मौत आती है, तो वह शहर की तरफ भागती है, इसलिए चीन जिस रस्ते पर चल नहीं बल्कि भाग रहा है, वह उसके विनास की और ही जाता है.
लेकिन जहाँ चीन के सात सालों के प्रयासों पर प्रश्न चिन्न लग गया, वहीँ हाल ही में यूरोपियन यूनियन ने भारत के साथ व्यापक ट्रेड एग्रीमेंट के लिए सालों से रुकी हुई बातचीत आधिकारिक रूप से चालू कर दी है.
इस प्रकार साफ़ हो जाता है, जिस डील के लिए चीन तड़प रहा था, वह डील अब यूरोपियन यूनियन भारत के साथ करने जा रहा है.
और पिछले गुरुवार को यूरोपियन यूनियन के द्वारा लिया गया निर्णय साबित करता है, की 5 मई को हमने इस सम्भावना पर वीडियो बनाया था, तब हम कोई ख़याली पुलाव नहीं पका रहे थे.
कई बार कुछ दर्शक कहते हैं, की हम जाने कहाँ कहाँ से टॉपिक उठा लाते हैं, तो दोस्तों, बड़े बड़े youtubers की तरह हेडलाइंस पर वीडियो बनाना बहुत आसान होता है, लेकिन इस तरह टॉपिक ढूंढ़ ढूंढ़कर भूतकाल और वर्तमान को मद्दे नजर रखते हुए हम भविस्य की सम्भावनाओ की चर्चा करते हैं. इस पुरे एनालिसिस में समय और मेहनत दोनों तो लगते ही है साथ ही गलत पड़ने की रिस्क भी होती है.
सच बात कहें तो ऐसे इम्पोर्टेन्ट टॉपिक को कवर करने में हमें मजा आता है, जिन्हे सब लोग इग्नोर कर देते हैं, इसलिए हमारे वीडियो देखते रहने के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद.
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