अमेरिका ब्रिटैन और जापान सबने मान लिया भारत को अपना नेता


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UK liaison officer at Indian navy facility that monitors threats in Indian Ocean

India, US to kick off air combat exercise in Indian Ocean to 

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References -

https://timesofindia.indiatimes.com/india/india-us-to-kick-off-air-combat-exercise-in-indian-ocean-tomorrow/articleshow/83747985.cms

https://www.hindustantimes.com/india-news/uk-liaison-officer-at-indian-navy-facility-that-monitors-threats-in-indian-ocean-101624357779719.html

https://news.google.com/u/1/articles/CAIiEOE4QZT_mUF71C_UfbQgzTEqGQgEKhAIACoHCAow2pqGCzD954MDMPTVigY?hl=en-IN&gl=IN&ceid=IN%3Aen


यह बात आप सभी ने हमेसा हाईलाइट की है, जबकि दुनिया का 75 समुद्री ट्रैफिक हिन्द महासागर से गुजरता है, इसलिए यह इलाका यातायात की आवाजाही हेतु सबके के लिए खुला रहे, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सभी लोकतान्त्रिक देशो की है, क्योकि साउथ चाइना सी को डकारने के बाद भी चीन की प्यास नहीं बुझी है, और अब उसकी लालची नजर हिन्द महासागर पर टीकी हुई है.


इतने विशाल महासागर में अलग अलग सोर्सेज से आने वाली जानकारी को मिलाकर कब और कहाँ कौन सा कदम उठाना है, इस बात का निर्णय लेने केलिए भारत सर्कार ने वर्ष 2018 से इनफार्मेशन फ्यूज़न सेण्टर इंडियन ओसेन रीजन की स्थापना की थी. 


और जब यह कैपबिलिटी हमारे पास आ गयी तो शक्तिशाली व्यक्ति से हर कोई दोस्ती करना चाहता है, परिणाम स्वरुप धीरे धीरे अमेरिका फ्रांस ऑस्ट्रेलिया और जापान सभी ने अपने अपने नौसैनिक अधिकारियो को इस इंडियन सेण्टर में डेप्लॉय कर दिया. ताकि जरूरत पड़ने पर सभी लोकतान्त्रिक देश बिना समय गवाय चाइनीस चुनौती का सामना कर सके.


और इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए UK ने भी अपने सैन्य अधिकारी को इंडियन इनफार्मेशन फ्यूज़न सेण्टर में डेप्लॉय कर दिया है, ताकि यदि रॉयल नेवी को हिन्द महासागर में इंडियन नेवी के साथ कोई भी कोआर्डिनेशन करना पड़े, तो घर में आग लगने के बाद उन्हें कुआ ना खोदना पड़े. सरल सब्दो में इस एक अधिकारी की तैनाती से पूरा सिस्टम बन जाता है, जिसके द्वारा इनफार्मेशन फ्लो तो होता है ही, साथ में ताबड़ तोड़ एक्शन भी लिया जाता है.


उदहारण के लिए जल्द ही UK के सबसे बड़े युद्द पोतों में से एक युद्ध पोत हिन्द महासागर से गुजरते समय कुछ दिनों के लिए भारत में भी लंगर डालेगा, इसलिए इस पुरे ऑपरेशन के लिए होने वाले सभी कोर्डिनेशन में इस अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है.


यहाँ पर फिर साफ़ करना जरूरी है, की लोकतान्त्रिक देशो का यह जो सिस्टम खड़ा हो रहा है, वह युद्ध लड़ने के लिए नहीं है, वल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है, की चीन की कभी हमसे लड़ने की हिम्मत ही ना हो पाए.


इधर ब्रिटैन और भारत नौसेना के छेत्र में करीब आ रहे हैं, उधर जापान ने भारत की राह पर चलते हुए यूरोपियन यूनियन से कहा है, की दूर बैठकर तमसा देखने के बजाय उसने भी हिन्द प्रशांत महासागर में एक्टिव होना ही पड़ेगा.


अब यह तो नहीं होगा, की यूरोपियन यूनियन दोनों तरफ मलाई उडाता रहे, वैसे भी भारत ने इटली हो फ्रांस हो, उनके साथ अलग अलग त्रिपक्षीय सिस्टम का विकास कर लिया है, जिनका इक मात्रा उद्देश्य लोकतान्त्रिक देशो में कम्युनिस्ट चीन के खिलाफ आम सहमति बनाना और साथ मिलकर चलने की कला का विकास करना है.



देख लीजिये जनाब, जापान जैसा दुनिया का सबसे शांतिप्रिय देश, जो अपनी सुरक्षा तक पर पैसा खर्च करना पसंद नहीं करता था, उसे चीन ने आक्रामक बनने पर मजबूर कर दिया, वैसे भी यह जापान की महानता नहीं बल्कि मजबूरी है.


क्योकि अभी भी यदि जापान शांति की बंशी बजाता रहा तो वह दिन दूर नहीं है, जब साउथ चाइना सी के बाद उसे ईस्ट चाइना सी से भी हाथ धोना पड़ेगा.


इसी बैकग्रॉउंड में कल भारत और अमेरिका हिन्द महासागर छेत्र में एयर कॉम्बैट की प्रैक्टिस करने वाले है.  वैसे भी कॉमन सेंस की बात है, जो लोग साथ मिलकर खेलते हैं, वही लोग  युद्ध के मैदान में साथ मिलकर लड़ते भी है. मजे की बात यह है, की चीन यह सब एक्टिविटी देखकर सिर्फ अपने कर्मो को दोष ही दे सकता है, क्योकि समय से पहले तेजी में आकर उसने अपने नापाक इरादे उजाकर कर दिए, जिससे अब उसकी राह और अधिक कठिन हो चली है

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