चोट ऐसी लगाई की अफ़ग़ानिस्तान को भूल गया अमेरिका

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India overtakes US to become second-most sought-after manufacturing destination

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References -

https://www.businesstoday.in/latest/economy/story/india-overtakes-us-to-become-second-most-sought-after-manufacturing-destination-305048-2021-08-24

दो साल पहले जब कोरोना का जिन्न चाइनीस बोतल से बहार निकल कर बेकाबू हुआ, और पड़े लिखे Left Liberal विद्वान लोग कॉकरोचों की तरह इधर उधर बिलबिला रहे थे, तब हमें अच्छे से याद है, आप में से कई दर्शको ने सबसे पहले 100 सालों में एक बार आने वाली इस आपदा में छुपे हुए सुनहरे अवसर को पहचान लिया था.


की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग के आकाश में अब भारत का सूरज उगने वाला है, क्योकि कोरोना ने रुला रुला कर सबको समझा दिया, ग्लोबल सप्लाई चैन सही मायनो में ग्लोबल तभी बनेगी, जब वह चीन पर अपनी निर्भरता को ख़तम करेगी.


फिर जाके बाद में मेक इन इंडिया के दूसरे अवतार के रूप में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया फॉर the वर्ल्ड के मिशन ने जन्म लिया.


यह तो हो गयी पृष्ठ भूमि, अब देखिये अमेरिकन कंपनी The Cushman and Wakefield ने निकाली है, साल 2021 के लिए Global Manufacturing Risk इंडेक्स.


जिसके अनुसार भारत दुनिया की दूसरी सबसे आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग हब बनकर उभरी है, और तो और अपने आपको यूनिक मानने वाले अमेरिका को पछाड़ कर भारत ने अपनी यह जगह बनाई है.


हालाँकि अभी भी चीन नंबर एक की पोजीशन पर बना हुआ है, लेकिन भारत अब उसको तगड़ी चुनौती देने जा रहा है, क्योकि अब ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां जो की चीन से भागने की सोच रही है, उन्हें भारत अपनी और आकर्षित कर रहा है.


लेकिन इस रिपोर्ट की एक सच्चाई यह भी है, की तेवर दिखाने वाले ट्रम्प और बेवकूफी दिखाने वाले बाइडेन की लाख कोशिशों के बाद अमेरिका की अवनति बराबर हो रही है, और चीन अपनी राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है,


अमेरिका के लिए खतरे की घंटी इसलिए भी बज रही है, की जो चीन कल तक उसके लिए सिर्फ जूते चप्पल सिला करता था, आज वह हाई टेक इलेक्ट्रॉनिक्स टेलीकम्यूनिकेशन की फील्ड में अपनी धाक जमाता चला जा रहा है.


इसका मतलब यह नहीं है, की हम हाल के बर्षो में अमेरिका के द्वारा किए गए प्रयासों पर पानी फेर रहे हैं, हम सिर्फ यह कह रहे हैं, की अमेरिका अभी आधे मन से कोशिस कर रहा है, अगर जल्दी से परिणाम प्राप्त करने है तो उसे पूरी सिद्दत के साथ चीन के साथ इस लड़ाई में अपने आपको झोकना पड़ेगा.


जहाँ तक भारत का सवाल है, तो भले ही अमेरिका के सर का ताज हमारे सर पर आ गया है. लेकिन अभी भी लैंड और लेबर रिफार्म किया जाना वाकी है,  साथ में भारत में मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को कण्ट्रोल करना होगा. 


क्योकि अभी भी खर्चे के मामले में भारत की तुलना में इंडोनेशिया तक में काम सस्ते में हो जाता है. वैसे यहाँ पर क्लियर करना जरूरी है, जब हम कॉस्ट की बात करते हैं, तो भारत में कॉस्ट अधिक इसलिए है, क्योकि हमारे यहाँ  रूल्स एंड रेगुलेशन का मकड़ जाल बना हुआ है, logistic और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट भी अधिक है.


इस प्रकार यदि हमने इन फालतू के खर्चो को कम कर लिया, तो हो सकता है, की लोगो की आय बढ़ने के बाबजूद हमारे यहाँ की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम बनी रहे. हमें उम्मीद है, तमाम विरोध और अड़चनों के बाबजूद मोदी सरकार इस दिशा में लगातार आगे बढ़ती रहेगी.


एनीवे जो कुछ हुआ, उसकी हमें संतुस्टी जरूर है, लेकिन साथ में इसका भी आभाष है, की अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है. वैसे भी प्रगति तो कभी भी ना रुकने वाली यात्रा है. कल को यदि हमने चीन को भी पीछे छोड़ दिया तब भी सुधार की गुंजाईश तो बनी ही रहेगी. इसलिए भविस्य के बारे में ज्यादा चिंता करने के बजाये अच्छा होगा, की मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स में भारत की रैंकिंग में आये सुधार की हम आज खुसी मनाये.

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