सर मुड़ाते ही चाइनीस राजा पर ओले पड़े
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China’s warm welcome for Taliban sparks backlash at home
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References -
http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/85483151.cms?utm_source=contentofinterest&utm_medium=text&utm_campaign=cppst
अटल जी कहा करते थे, चिंगारी का खेल बुरा होता है, दूसरे के घर आग लगाने का सपना अपने ही घर में साकार होता है.
लेकिन चतुर चीन को यह बात समझ नहीं आएगी, क्योकि की अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकियों की पीठ देखकर उसे आजकल इतनी ख़ुशी हो रही है, की वह ना केवल ग्लोबल प्लेटफार्म पर तालिबान के पक्ष में तानपुरा बजा रहा है, बल्कि अपने देश के लोगों को भी बता रहा है, की तालिबान किस प्रकार से अफ़ग़ान लोगों की पहली पसंद है.
यहां तक की चाइनीस विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता का कहना है, की जिस तरह चिनिओ को ठंडा दूध नहीं पचता, अमेरिकियों को काटें से खाना नहीं आता, ठीक उसी प्रकार अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को लोकतंत्र नहीं सुहाता. इसलिए अफ़ग़ानिस्तान में जो हो रहा है वह सही हो रहा है.
लेकिन इसी चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी ने पहले अपने देश के लोगों को पाठ पढ़ाया था, की तालिबान आतंकवादी है, जाहिर है, अब चाइनीस लोग यह गोली नहीं चचोर पाएंगे, की तालिबान पर भरोसा किया जा सकता है.
या तो चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी कल गलत थी, या आज सही.
लेकिन चीन में अंधेर नगरी चौपट राजा का नाटक चल रहा है, तभी तो उसके सरकारी अख़बारों ने अब अपने ही लोगों को तालिबान के ऐसे इतिहास के बारे में बताना चालू कर दिया है, जिसमे तालिबान और आतंकवाद का कोई नाता ही नहीं है. बोले तो जैसे गधे के सर से सींघ गायब हो गए.
जाहिर है, चीन के लोगों ने ऐसे सरकारी वीडियो का विरोध किया, परिणाम क्या हुआ, चाइनीस peoples डेली को वह वीडियो उतारना पढ़ गया. लेकिन तब तक बिल्ली बहार आ चुकी थी, और चीन के लोगों के बीच वह वीडियो ट्रेंड कर गया.
तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की फर्स्ट चॉइस बताने वाली चाइनीस कम्युनिस्ट पार्टी खुद अपने देश में आज गालियां खा रही है. यही होता है, जब आप इंडेफेंसिवल को डिफेंड करते हैं.
जब तालिबान के पक्ष में माहौल बनाने की कोसिस भारी पड़ने लगी, तो चीन ने अपने ही लोगों की सोशल मीडिया पोस्ट को डिलीट करना चालू कर दिया.
अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं और बच्चों के साथ क्या हो रहा है, यह देखे बगैर उन्होंने भरोसा कर लिया तालिबान के सब्दो पर, तो उनकी दुर्गति तो होना बनती है.
एक और जहाँ अफ़ग़ानिस्तान के संकट ने पाकिस्तान में चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के भविस्य पर सवालिया निसान लगा दिया है, वही दूसरी और अफ़ग़ानिस्तान से उठी लपटें चीन के शिनजियांग प्रान्त तक पहुचेंगी, आज नहीं तो कल.
जहाँ तक कुछ विद्वानों का कहना हो सकता है, की चीन को अफ़ग़ानिस्तान में रेयर अर्थ एलिमेंट का जखीरा मिल जायेगा, तो सायद आपको याद हो, जब अमेरिका ने 20 सालों पहले अफ़ग़ानिस्तान में कदम रखा था, तब भी ऐसी ही बातें की गयी थी, की अमेरिका को ये मिल जायेगा वोह मिल जायेगा, लेकिन सच्चाई आपके सामने है आज अमेरिका लोटा बाल्टी लेकर अफ़ग़ानिस्तान से भागने पर मजबूर हो गया है.
चूँकि लहू लुहान अमेरिकन मुर्गा भाग खड़ा हुआ है, अब पाकिस्तान के हाथ में सिर्फ एक चाइनीस मुर्गा बचा है, जिसके हलाल होने का दिन कब आएगा.वह केवल वक़्त की बात है.
एनीवे चीन ही क्यों जनाब, हमारे देश में भी ऐसे लोगों की कहाँ कमी है, जो भारत की तुलना तालिबान से करने की कोसिस कर रहे है, ताकि भारत को नीचा दिखाकर तालिबान को डिफेंड किया जा सके.
अब आपकी अनुमति से टॉपिक से थोड़ा हटते हुए, हमें आपको बताते हुए संतुस्टी हो रही है, की 28 जुलाई को जब HUL 2350 के आस पास बॉटम पर मजबूती दिखा रहा था, तब बिलकुल मौके पर हमने इसे अपने टेलीग्राम चैनल ETF नॉलेज शो पर कवर किया था,
पिछले कुछ दिनों से मार्किट में मारकाट चल रही है, सब तरफ खून खराबा हो रहा है, लेकिन क्वालिटी की चमक आज भी बरक़रार है. तभी तो आज तक HUL ने 8 से 11 % का उछाल दे दिया है, और हमारे कई दर्शको ने इस क्वालिटी के खेल में पैसा भी बना लिया है.
HUL के शेयर में यह उछाल इसलिए आया, क्योकि मोदी जी ने 11 हज़ार करोड़ के पाम आयल मिशन की घोसना की, वैसे भी जिस तरह जंगल में बाढ़ आने पर सांप नेवला शेर और शिकार सब के सब पहाड़ की तरफ भागते हैं, ठीक वैसे ही कमजोर मार्किट में निवेशक क्वालिटी की शरण में चले जाते हैं.
मोदी जी के काम से आप सभी का मुनाफा होता रहे , हम इसी प्रयास में लगे रहेंगे, इसलिए आप भी हमारे टेलीग्राम चैनल ETF नॉलेज शो को ज्वाइन कर लीजियेगा.
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