अब दबता नहीं, दबाता है इंडिया
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India delays COVID-19 vaccine supplies to WHO-backed COVAX, sources say
Waiting for more data, can’t cut corners to list Covaxin, says WHO
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References -
https://www.reuters.com/world/india/india-delays-covid-19-vaccine-supplies-who-backed-covax-sources-say-2021-10-19/
https://indianexpress.com/article/india/covaxin-covid-vaccine-who-approval-7578616/
पुरानी कहावत है, लातों के भूत बातों से नहीं मानते.
यह बात सच साबित होती है, ना केवल आदमियों पर बल्कि आर्गेनाइजेशन पर भी.
पिछले महीने अमेरिका जाने के पहले ही मोदी सर्कार की तरफ से ऐलान कर दिया गया, की भारत कोरोना वैक्सीन का एक्सपोर्ट खोलने वाला है.
तभी से WHO इन्तजार कर रहा है, भारत से होने वाली कोरोना वैक्सीन की सप्लाई का, लेकिन अब उनके धैर्य ने जवाब दे दिया है, और वह मीडिया में आकर खिसियानी बिल्ली की तरह खम्बा नोच रहे हैं, की भारत ने वादा तो कर दिया, लेकिन अभी तक वैक्सीन नहीं दी.
यदि आप पप्पू पुजारी है, तो आपको यह एक सुनहरा मौका लगेगा, मोदी जी के माथे पर कालिख पोतने का, की देखो देखो मोदी जी की कथनी और करनी में अंतर है, वह भारत का नाम बदनाम कर रहे हैं.
लेकिन दोस्तों, यदि आप थोड़ी गहराई में जाएँ, तो आपको पता लग जायेगा, की WHO को भारत में प्रोडूस की जाने वाली सिर्फ ब्रिटिश कोवीसील्ड चाहिए.
हद तो तब हो जाती है, की भारत में ही विकसित Covaxin को आज भी WHO के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, ताकि WHO उस पर अपनी स्वीकृति का ठप्पा लगा दे.
WHO भी ऑफिस ऑफिस का नाटक खेल रहा है, नए नए डॉक्यूमेंट मांग रहा है, और साथ में यह भी कह रहा है, की उसके अप्रूवल में देरी इसलिए हो रही है, क्योकि भारत बायोटेक उसे समस्त जानकारी नहीं दे पा रही है.
वैसे WHo ही क्यों, हमारे देश में भी बड़े बड़े बिद्वानो के द्वारा भारत बायोटेक की कोवाक्सिन को शक की निगाह से देखा जाता है, जबकि वह ब्रिटिश कोवीसील्ड के टक्कर की वैक्सीन है.
यही होता है, जब हम खुद अपने हुनर की क़द्र नहीं करते, तो दुसरो को क्या पड़ी है?
लेकिन मोदी जी कहाँ माफ़ करने वाले हैं, WHO को, वह भी घडी लिए बैठे हैं, की जितना टाइम WHo भारतीय वैक्सीन को अप्रूवल देने में लगाएगा, उतनी ही देरी भारत भी उसे वैक्सीन सप्लाई चालू करने में करेगा.
अब ऐसा तो होगा नहीं, की अमीर देशो की कोरोना वैक्सीन्स इस वैश्विक व्यापारिक अवसर का लाभ उड़ा ले जाएँ, और भारतीय अप्रूवल के घडी की टिक टिक सुनता रह जाये.
भाई जी, आदर्शवाद की बात नहीं है यह बात है मोलभाव की, यदि हमने पहले सप्लाई खोल दी, तो फिर भारत बायोटेक चक्कर ही काटता रह जाएगा, हमारे पास फिर बचेगा ही क्या दवाब डालने के लिए.
वैसे भी भारत ने WHo को कोरोना वैक्सीन नहीं दी है, लेकिन ईरान बांग्लादेश को तो दे दी है, इसलिए हम अपना काम बराबर कर रहे हैं, चीन की गोदी में बैठे WHO को आइना दिखाना भी तो जरूरी है, की भाई जी, ऐसा नहीं चलेगा, की आप कोवीसील्ड ले लो, और कोवाक्सिन को अनंतकाल तक अप्रूवल का इंतजार करना पढ़े.
इसे कहते हैं सर्कार, जो की भारतीय कंपनियों के हितों की आगे बढ़कर रक्षा करती है, अमेरिका को देख लीजिए, अपनी कंपनियों के स्वार्थ साधने के लिए वह दुनिया से भीड़ जाता है, अब हम वही कर रहे हैं, तो WHO को नानी याद आ रही है.
देख लीजिये आप मोदी सर्कार इंडियन फार्मा इंडस्ट्री का कितना पक्ष ले रही है, इसी तरह कुछ महीनो पहले भारत ने फार्मा प्रोडक्शन को बढ़ाने और इस फील्ड में आत्मनिर्भर बनने के लिए लांच की थी, दो दो PLI स्कीम,
जिनसे डायरेक्ट एंड फ़ास्ट मुनाफा आप सभी उठा सकें, इसलिए आज हमने अपने आत्मनिर्भर इन्वेस्टर यूट्यूब चैनल पर बनाया एक नया वीडियो, जो की आपको बताएगा की कैसे आप महज 14 रुपये में 20 फार्मा कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद सकते हैं, बोले तो कैसे आप एक तीर से दो नहीं 20 शिकार कर सकते हैं.
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साथ में आप हमें जरूर बताएं, की क्या मानवता के खातिर मोदी सर्कार ने Indian कोवाक्सिन के अप्रूवल का इंतजार किये बगैर WHo को British Covisield की सप्लाई पहले चालू कर देना चाहिए.
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