आसान नहीं है मोदी की मार से बच पाना
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ONGC Videsh asks Iran to share details of Farzad-B gas field contract
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जहाँ हक़ ना मिले वहां लूट सही होती है. लेकिन लूट के पहले हक़ मांगना पड़ता है.
बिलकुल यही कर रहा है, भारत. जी हाँ दोस्तों, आपको तो पता होगा, की ONGC विदेश ने साल 2008 में ईरान की फरज़ाद बी गैस फील्ड को डिस्कवर किया था.
लेकिन पिछले दस से भी अधिक सालो में फरज़ाद गैस फील्ड से गैस नहीं निकल पायी, उसका एक प्रमुख कारण यह था, की इस दौरान ईरान पर लगातार अमेरिकन आर्थिक प्रतिबंधों का काला साया मंडराता रहा.
बीच बीच में भारत पर दवाब बनाने के लिए ईरान की तरफ से मीडिया में स्टोरी प्लांट की जाती रही, की भारत ने इस गैस फील्ड को डेवेलोप नहीं किया, इसलिए ईरान ने यह प्रोजेक्ट इसे दे दिया, उसे दे दिया. भारत को दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया.
इसी बैकग्राउंड में हाल ही में गुजरे मई महीने में ईरान ने अपनी किसी कंपनी को फरज़ाद बी गैस फील्ड का कॉन्ट्रैक्ट दे दिया, फिर क्या था, हमारे यहाँ की मीडिया ने रुदाली की तरह रोना चालू कर दिया.
लेकिन जमीनी सच्चाई सायद आपको पता हो, की ईरान को जिसे यह प्रोजेक्ट देना हो वह दे सकता है, लेकिन इस प्रोजेक्ट में 30 प्रतिशत हिस्सा भारत का है. शुरुआत एग्रीमेंट के हिसाब से. जिसको मद्दे नजर रखते हुए ही भारत ने ईरान में निवेश किया था.
इसलिए अब ONGC विदेश ने ईरान से अपना हक़ मांग लिया है. ईरान को लिखित में कहा गया, की उसने जिस किसी के साथ जो भी एग्रीमेंट किया है, उस एग्रीमेंट की एक कॉपी भारत भेजी जाये, ताकि भारत तय करे, की उसे अब आगे क्या करना है.
ईरान का 70 प्रतिशत का हिस्सा है, उसे जो करना है वो अपने हिस्से के साथ करे, लेकिन वह किसी भी हालत में तीस प्रतिशत का भारतीय हक़ नहीं मार सकता है.
और यदि ईरान ने भारत को उसका हक़ नहीं लौटाया तो हक़ लूटना भी हमें आता है, अंतरास्ट्रीय स्तर पर कई मंच है, जहाँ ईरान को कटघरे में खड़ा किया जा सकता है, भारतीय टैक्स पेयर का पैसा है कोई हराम की कमाई थोड़े है, की जिसे ईरानी रेगिस्तान में उड़ा दिया जाये. ईरान के होश फिर भी ठिकाने पर नहीं आये तो उसको चावल और शक्कर का भारत एक दिन में पता लग जायेगा, यदि भारत का दिमाग ठनका तो. पॉइंट सिंपल है, यदि सीधी उंगली से घी नहीं निकला तो मोदी जी को उंगली टेढ़ी करना भी आता है.
अभी भी जबकि ईरान और अमेरिका पर प्रतिबंधों को हटाने को लेकर औपचारिक रूप से बात चालू होना वाकी है, मतलब यह पता नहीं, की ईरान पर लगे हुए आर्थिक प्रतिबंधों का भविस्य क्या होगा.
लेकिन ONGC विदेश ने देर से ही सही लेकिन अपना हक़ दुरुस्त तरीके से मांग लिया है, अब गेंद ईरान के पाले में हैं.
अभी जबकि एक बार फिर कच्चे तेल का भाव जंगली घोड़े की तरह भाग रहा है, आप ONGC के शेयर का भाव खुद गूगल पर देख सकते हैं.
आम तौर पर कच्चे तेल के भाव के हिसाब से ही ONGC का शेयर ऊपर नीचे जाता है, इसलिए कुछ दिनों पहले हमने आपसे आग्रह किया था, की बढ़ते पेट्रोल डीज़ल के भाव के खिलाफ आपके सामने दो विकल्प है.
पहला यह, की मोदी जी को गलियां देकर अपना ब्लड प्रेशर बढ़ाओ, दूसरा ONGC में निवेश करके अपना मुनाफा बढ़ाओ.
यदि आप दूसरे विकल्प में रूचि रखते हैं, तो आप तुरंत शामिल हो जाएँ हमारे आत्मनिर्भर इन्वेस्टर कोर्स में. जिसके बल पर आप कैंडल चार्ट पड़ने टेक्निकल एंड फंडामेंटल एनालिसिस की फील्ड में महारथी बन जायेंगे.
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