मोदी जी ने स्टार्ट अप के मामले में किया चीन का "The End"


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 India speeds past China in the unicorn race

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References -

https://www.thehindubusinessline.com/data-stories/data-focus/india-speeds-past-china-in-the-unicorn-race/article37087689.ece


सालों से हमारे यहाँ एक चलन रहा है, की अपने आप को ऊँचा दिखाने के लिए देश को नीचे दिखाओ, दिन रात देश को गालियाँ दो, जिस थाली में खाओ, उसी में छेद करो.


सायद यही कारण है, की हमें घर की मुर्गी दाल बराबर लगती है. अब आप पूछेंगे की भला भारत ने ऐसा क्या गजब ढा दिया, जो हम ऐसी बातें कर रहे हैं.


तो दोस्तों, आपको सायद जानकारी हो, नए नए स्टार्ट अप में से जिस स्टार्ट अप की वैल्यू सात हज़ार करोड़ रुपये यानि की 1 बिलियन डॉलर से अधिक हो जाती है, उसे यूनिकॉर्न कहा जाता है.


यूनिकॉर्न की संख्या को देखकर अंदाज़ा लगाया जाता है, की कौन सा देश स्टार्ट अप के मामले में कितना आगे हैं. जिस तरह साश भी कभी बहु थी, ठीक उसी प्रकार आज के गूगल और फेसबुक भी कभी अमेरिकन यूनिकॉर्न हुआ करते थे.


इसलिए यदि आज हम यूनिकॉर्न के मामले में आगे निकल गए, तो हो सकता है, भविस्य की गूगल फेसबुक आज भारत में ही पैदा हो रही हो.


हमारी तरह आपको जानकर ख़ुशी और आश्चर्य भी होगा, की पिछले साल चीन में 16 के मुकावले भारत में 17 यूनिकॉर्न ने जन्म लिया था, और इस साल तो जनाब कमाल ही हो गया, इस साल चीन में महज 19 यूनिकॉर्न पैदा हुए तो उसके मुकावले भारत ने जन्म दिया 33 यूनिकॉर्न को.


एक दो साल पहले तक चीन बड़ा इतराता फिरता था, की देखो देखो हमारे यूनिकॉर्न, लेकिन आज चीन को भारत ने उसी के अखाड़े में धर पटका है.


और तो और यूनिकॉर्न पैदा करने के मामले में भारत ने इस साल असाधारण सफलता प्राप्त की है, ना सिर्फ भारतीय स्टार्ट अप के पास अब बेहतर आइडियाज हैं, बल्कि उन्हें अब महंगा वैल्यूएशन भी मिल रहा है.


उधर चीन में अंधेर नगरी चौपट राजा का नाटक चल रहा है, वहां निवेश करने से सब कतराते हैं, इसलिए चाइनीस यूनिकॉर्न में किसी को चमक नहीं दिखाई दे रही है.


आप में से कुछ लोगों को यदि यह कोई छोटा मोटा घटनाक्रम लग रहा हो, तो याद कीजियेगा, यूनिकॉर्न के मामले में भारत को कैसे कैसे ताने दिए जाते थे, जब भारतीय कंपनियों में निवेश करने को लेकर चीन को मिली हुई खुली छूट को गलवान के बाद भारत ने वापस ले लिया, तो हमारे देश के ही पड़े लिखे विद्वानों ने खूब अखबारी पन्ने भरे  थे, की चाइनीस फंडिंग के आभाव में भारतीय स्टार्ट अप जल बिन मछली की तरह तड़प तड़प कर दम तोड़ देंगे.



लेकिन हमें अच्छे से याद है, आप सभी ने साफ़ साफ़ कह दिया था, की चाहे कुछ भी हो जाये, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के चलते भारतीय कंपनियों को ओने पोने दाम पर चीन के हाथो बिकने नहीं दिया जायेगा, इसलिए आज समय की कसौटी पर आप खरे उतरे हो, ना सिर्फ इंडियन स्टार्ट अप फल फूल रहे हैं, बल्कि उनमे भर भर के विदेशी निवेश भी आ रहा है, 


इसी दौरान मोदी जी लगातार इंडियन स्टार्ट अप की उंगली थामे रहे, और उनकी राह आसान बनाते रहे. मोदी जी की प्ररिश्रम का परिणाम आज आपके सामने हैं.


अब आपका यह कहना वाजिब हो सकता है, की भाई जी, यूनिकॉर्न स्टार्ट अप से हमें क्या, हम क्यों फालतू में ख़ुशी हों.


तो दोस्तों, इंडियन स्टार्ट अप से यदि आपको पैसा कमाना है, तो आप ध्यान दीजिये, इन्फोएज नौकरी पर. जो की पूत के पांव पालने में देखकर उनमे निवेश करती है.


होनहार बालक की पहचान करने में इन्फोएज नौकरी की क्या महारत है, वह आपको इस बात से पता लग जायेगा, की जोमाटो और पालिसी बाजार को जब कोई जानता ना था, तब उनमे में कई सालों पहले  इन्फोएज नौकरी ने निवेश किया था.


सच कहें दोस्तों, हमारे आत्मनिर्भर इन्वेस्टर कोर्स के कई सदस्यों ने इन्फोएज नौकरी में निवेश करके पहले ही गुलाबी गुलाबी नोट छाप लिए हैं और हमारा भी इसमें निवेश है.


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