तीन सौ साल बाद ब्रिटैन ने सुधारी सबसे बड़ी भूल
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Exclusive | "Operating environment favourable in India than China," UKIBC Chief
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Reference -
https://www.wionews.com/world/exclusive-operating-environment-favourable-in-india-than-china-ukibc-chief-429473
चीन में अंधेर नगरी चौपट राजा का नाटक चल रहा है, ना तो आज का और ना ही कल का कुछ अता पता है. इस अनिश्चितता का सबसे अधिक नुकसान भुगतना पड़ता है, निवेशकों को.
हम सभी तो यह बात काफी लम्बे समय से करते चले आ रहे हैं. लेकिन अब UK इंडिया बिज़नेस कौंसिल के चेयरमैन ने कह दिया है. की चीन की तुलना में भारत में ना सिर्फ बेहतर वातावरण है, बल्कि अधिक सुनहरे अवसर भी मौजूद हैं.
व्यापर करने की सरलता ease ऑफ़ doing बिज़नेस हो, या पारदर्शिता हो या कानून का राज हो, यह सभी ऐसे कारण हैं, जो की भारत को ब्रिटिश व्यापारियों की पहली पसंद बनाते है.
कुछ समय पहले तक चीन का राग अलापने वाला ब्रिटैन आज भारत का गुणगान कर रहा है. यह बात और है, जब ब्रिटैन चीन की बड़ाई करता था, तो उसकी मीडिया में जोरों से चर्चा होती थी. लेकिन आज जब इंग्लैंड भारत के भविस्य में भरोसा दिखा रहा है, तो उसकी बात तक करने से हमारे यहाँ सब कतराते हैं.
एनीवे यह देखने में अच्छा लगता है, की देर से ही सही लेकिन अंग्रेजों को भारत का महत्वा दुरुस्त रूप में समझ आ रहा है.
ब्रिटिश अस्ट्रज़ेनेका और सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया ने किस प्रकार Covisield का उत्पादन किया, वह साफ़ साफ़ दर्शाता है, की दोनों देश साथ मिलकर क्या कमाल कर सकते हैं.
ठीक इसी प्रकार अब ब्रिटैन कोसिस कर रहा है, की उनके यहाँ उदहारण के लिए नयी बैटरी टेक्नोलॉजी को भारत में डेप्लॉय and लार्ज स्केल प्रोडक्शन किया जाये. ताकि दोनों देश मिलकर पूरी दुनिया के मार्किट पर राज कर सकें.
अब आप का यह कहना बाजिव हो सकता है, की यह सब तो बातें हैं, बातों का क्या. तो दोस्तों चलो आंकड़े देख लेते हैं, जहाँ इंग्लैंड के भारत में निवेश से सात लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए, वही भारत के ब्रिटैन में निवेश से पांच हज़ार जॉब क्रिएट हुए हैं. मतलब यह सम्बन्ध आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है.
जहाँ तक दोनों देशों के बीच की फ्री ट्रेड डील का सवाल है, तो ब्रिटिश अधिकारी का कहना है, अब एक बार में एक ही झटके में कोई बड़ी डील नहीं होगी, बल्कि छोटे छोटे हिस्स्सों में लम्बे समय के दौरान कई डील की जाएँगी, ताकि दोनों देशों के बीच लगातार व्यापर फल फूल सके.
और दोस्तों जहाँ तक हम समझ सकते हैं, वह अप्प्रोच सही भी है, क्योकि कई बार एक बड़ी डील को जल्दी में ख़तम करने के चक्कर में कई कमिया छूट जाती हैं, हड़बड़ी में गड़बड़ी हो जाती है. दशकों के व्यापर को प्रभावित करने के निर्णय महीनो और सालों में ना लिए जाएँ तो अच्छा ही होगा.
धीरे धीरे कई छोटी छोटी डील होंगी, तो पुरानी कमियों और खामियों को दूर करने का मौका भी मिलता रहेगा. वैसे भी यह फ्री ट्रेड डील हो इसलिए रही है, की दोनों देशों का भला हो, इसलिए देरी हो चलेगा, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए, की जल्दबाजी के चक्कर में ब्रिटिश स्वार्थ साधने के लिए भारतीय हितों की कुर्वानी दे दी जाये.
हम सभी ने देखा है, जल्दवाजी में UPA के द्वारा किये गए पुराने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने अब कई देशों के साथ हमारे फ्रेंडली रिलेशनशिप में खटास डाल दी है. भारत को नुकसान हुआ सो वह अलग. इसलिए पुराने अनुभव से सीखते हुए, अब जो नया तरीका अपनाया जा रहा है, वह बेहतर प्रतीत होता है.
अब तो दोस्तों, जबकि मोदी सर्कार की कोशिशों की सफलता गोरों को तक दिखने लगी है.
लेकिन आकंड़े गवाह हैं दोस्तों, अटल जी की मेहनत के फलस्वरूप साल 2001 और 2008 के बीच निफ़्टी पांच गुना हो गया था, ठीक इसी प्रकार यदि पास्ट की परफॉरमेंस जैसा भविस्य का प्रदर्शन रहा तो मोदी जी की मेहनत के बल पर अगले दस साल में निफ़्टी पांच गुना हो जायेगा. वर्तमान 18 हज़ार से 90 हज़ार तक की निफ़्टी की उड़ान से मुनाफा बांधने के लिए आप फटाफट शामिल हो जाएँ भारत के सर्वश्रेष्ठ आत्मनिर्भर इन्वेस्टर कोर्स में, जिसके बारे में समस्त जानकारी व्हाट्सप्प पर प्राप्त करने के लिए आप इसी वीडियो के डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दी गयी लिंक पर कीजिये अभी के अभी क्लिक.
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