भारत ने डूबते अमेरिकन ब्रांड को बचाया
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ABFRL Reebok acquisition
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Reference -
https://www.bseindia.com/xml-data/corpfiling/AttachLive/c0ef3a53-a0f2-490e-b3e8-8e0cb9a6bb91.pdf
कोई बहुत पुरानी बात नहीं है दोस्तों, तीस साल पहले जब भारतीय इकॉनमी को खोला जा रहा था, तब यह डर बड़े पैमाने पर प्रकट किया जाता था, की विदेशी कंपनियां भारत में आकर भारतीय कंपनियों को बर्बाद कर देंगी, उन्हें ओने पौने दाम पर खरीद लेंगी.
इस बैकग्राउंड में अब आप जरा ध्यान से सुनियेगा, रीबॉक के जूते आपने पहने हो या ना पहने हों, लेकिन आपने रीबॉक ब्रांड के बारे में पक्के से सुना होगा.
जर्मन कंपनी एडिडास ने अमेरिकन ब्रांड रीबॉक को साल 2005 में खरीद लिया, तभी से एडिडास रीबॉक ब्रांड का मालिक रहा. लेकिन पिछले सोलह सालों में वित्तीय समस्याओं के कारण एडिडास ने कुछ समय पहले रीबॉक को बेच दिया, अमेरिकन कंपनी Authentic Brands ग्रुप को.
इस प्रकार अमेरिकन कंपनी Authentic Brands ग्रुप के जिम्मे आ गया, रीबॉक का भविस्य.
इधर भारत में भी रीबॉक का ब्रांड तो मजबूत है ही, इसके जूते नाम से बिकते हैं. और अगले दो तीन सालों के बाद भारत में हर साल 14 बिलियन डॉलर के जूते ही जूते बिकेंगे, मतलब सबको अच्छे से पता है, की भारत में जूतों के मार्किट का भविस्य उज्जवल है. और इस मार्किट ने हर साल 14 प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ना ही बढ़ना है.
इसलिए अमेरिकन कंपनी Authentic Brands ग्रुप की मदद करने के लिए सामने आया, भारत का आदित्य बिरला फैशन रिटेल (ABFRL), हो सकता है, आपने ABFRL का नाम ना सुना हो, लेकिन आप अपनी अलमारी को खोल के देख लीजियेगा, यदि आपके पास पीटर इंग्लैंड, एलन सोल्ली, के कपड़ें हैं, तो आप पहले ही ABFRL के कस्टमर बन चुके हैं.
ABFRL भारत की सबसे बड़ी फैशन रिटेल कंपनी है, और अब उसने अमेरिकन कंपनी Authentic Brands ग्रुप से खरीद लिया है, रीबॉक ब्रांड के जूते कपडे और अन्य सामान भारत में बेचने का पूरा का पूरा अधिकार.
अब यदि भारत में रीबॉक ब्रांड का कोई भी सामान बिकेगा, तो उसे बेचने की पूरी जिम्मेदारी ABFRL ने ले ली है, और ABFRL ही सुनिश्चित करेगा, की भारत में रीबॉक का कारोबार बड़े,फले फूले.
कहाँ तीस साल पहले के हिसाब से हम डरते थे, की रीबॉक ABFRL को खरीद लेगी, लेकिन आज हो उल्टा रहा हैं, भारतीय ABFRL ने रीबॉक को खरीद लिया है. इसलिए दोस्तों, हम सभी बार बार चर्चा करते हैं, की भारतीय कंपनियां दुनिया जीत सकती है, उन्हें सिर्फ एक मौका चाहिए. परिदें उड़ने के लिए उताबले रहते हैं, हमें सिर्फ उनका पिंजड़ा खोलना है.
देख लीजिये ना तो जर्मन एडिडास सम्हाल पाया रीबॉक को, और रीबॉक अमेरिकन कंपनी ने ख़रीदा लेकिन अमेरिकन कंपनी को भी घूम फिरकर भारतीय कंपनी ABFRL की मदद लेनी पड़ी, ताकि तेजी से बढ़ते इंडियन फैशन रिटेल के मार्किट में रीबॉक का हिस्सा बढ़ सकें. नहीं तो वह दिन दूर नहीं है, जब भारतीय लोग रीबॉक का नाम तक भूल जायेंगे.
सरल सब्दो में इस प्रकार डूबते रीबॉक के लिए तिनके का सहारा बनकर उभरी है, भारतीय कंपनी ABFRL
इसे सुखद संयोग ही कहेंगे, की ABFRL को हमने आत्मनिर्भर इन्वेस्टर कोर्स के अंतर्गत साझा किया हुआ है, और जिन जिन आत्मनिर्भर इन्वेस्टर्स ने ABFRL में निवेश किया है, आज उन्हें इस पूरी डील से मुनाफा भी हुआ है. वह भी तब जबकि आज मार्किट में मातम का माहौल है.
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इसलिए दोस्तों, हम कहते हैं, भारत में भरोषा है, तो भरोसा अटल होना चाहिए, ऐसी अच्छी और सस्ती कंपनियों में मौके पर आप हिस्सेदारी खरीद पाएं, इसके लिए आप जल्दी से जल्दी शामिल हो जाये, आत्मनिर्भर इन्वेस्टर कोर्स में, क्योकि आगामी 1 जनवरी से इस कम्प्रेहैन्सिव कोर्स की कीमत में पचास फ़ीसदी का इजाफा होने जा रहा है.
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