अमेरिका के बाद ताइवान ने भारत के लिए छप्पर फाड़ा

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SBI to tap Taiwan debt market with $500 million Formosas

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Reference - 

https://economictimes.indiatimes.com/markets/bonds/sbi-to-tap-taiwan-debt-market-with-500-million-formosas/articleshow/88799166.cms?utm_source=contentofinterest&utm_medium=text&utm_campaign=cppst

अभी कुछ दिनों पहले ही भारतीय कंपनी रिलायंस नेअमेरिकन मार्किट से चंद घंटों के भीतर चार बिलियन डॉलर का कर्जा उठा लिया था.


आप में से जिन लोगों को 1990 का दशक याद हो, तो आपको अच्छे से पता होगा, तब विदेशी मेहमान भारत आते थे, और चंद डॉलर भारत को कर्जा देने की बात करके अख़बारों में सुर्खियां और धन्यवाद बटोर लेते थे.


एक वक़्त वह था, जब भारत सर्कार को पैसा जुगाड़ने में पसीने छूटते थे, और एक वक़्त यह है, जब भारत की कंपनियां घूमते फिरते जाती है, और बोरा भर भर के पैसा उठा के ले आती है.


रिलायंस ने उठाया तो पैसा था, अमेरिका से, लेकिन ताइवान के भी कई इन्वेस्टर्स ने बिना शोर सराबा मचाये रिलायंस को फंडिंग मुहैया करवाई.


ताइवान के इन्वेस्टर्स के द्वारा रिलायंस में दिखाए रुझान ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के कान खड़े कर दिए, बेहद सरल सब्दो में जब रिलायंस अमेरिका के जरिये ताइवानी पैसा उठा सकती है, तो SBI सीधा  ताइवान के मार्किट में जाकर ताइवान का पैसा क्यों खड़ा नहीं कर सकती. यही सबाल SBI को सताने लगा.


फिर क्या था, SBI ने आव देखा ना ताव, लोहा गरम है मार दो हथोड़ा, इसलिए तो SBI ताइवान से उगाने जा रही है, 500 मिलियन डॉलर यानि की  मोटा मोटी साढ़े तीन हज़ार करोड़ रुपये.


और जैसा की SBI को पूर्व अंदाज़ा है, उसे यह पैसा खड़ा करने में कोई मसक्कत नहीं करनी पड़ेगी, इसलिए प्रोसेस समाप्त करने में कितना समय लगेगा, यह सवाल पुछा जाना चाहिए.


दुनिया भर में व्याज दरों के बढ़ने का खतरा सबको शता रहा है, इसलिए इससे पहले की पैसा उधार लेना महंगा हो जाये, SBI ताइवान में अपनी किस्मत आजमाने जा रही है.


सरकारी स्तर पर यदि ताइवान के साथ 500 मिलियन डॉलर की डील होती, तो चीन में खतरे की घंटियां बजने लगती, लेकिन अब चूँकि SBI पैसा उठा रहा है, इसलिए चीन को यह बुरा तो पक्के से लगेगा लेकिन वह चिल्ला चोट नहीं मचा पायेगा.


इसे कहते हैं, सांप भी मर गया और लाठी भी ना टूटी,वैसे भी आप सभी तो हमेसा से भारत और ताइवान के बीच बढ़ते सम्बन्धो के समर्थक रहे हैं.


रिश्ते मजबूत होने चाहिए, सरकारों के बीच हो या कंपनियों के बीच, उल्टा हम तो कहेंगे, यदि भारतीय कंपनियां ताइवान का निवेश आकर्षित करें, तो यह काम तेजी से बड़ी स्केल पर बिना किसी हो हल्ला के आगे बढ़ाया जा सकता है. इसलिए स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को हम साधुबाद देते हैं.


यहाँ पर फिर यह बात हाई लाइट करना जरूरी है, की यदि ताइवान को भारत के भविस्य को लेकर को टेंशन होती, तो 500 मिलियन डॉलर छोड़िये, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ताइवान से पांच पैसा तक उठाने की जुर्रत नहीं कर पाता.


अब आप स्वयं देख लीजिये,भारतीय सरकारी बैंक जिन्हे एक दो साल पहले तक हर राह चलता आदमी गाली दे देता था, आज वही बैंक शान से विदेशो से पैसा ऊगा रहे हैं, और सरकारी बैंकों की औकात में आये इस बदलाव का लाभ आप सभी को मिले इसलिए हमने बार बार अनेक बार कवर किया हुआ है, PSUBNKBEES नामका ETF जो की एक ही झटके में करता है, भारत के टॉप सरकारी बैंको में निवेश.


मोदी जी ने सात साल लगातार मेहनत करके सरकारी बैंको का हुलिया संवारा है, इसलिए PSU बैंक की उन्नति से उठने वाली मलाई पर आप सभी मोदी भक्तो का हक़ है.


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