म्यांमार ने की मोदी जी से मिन्नतें

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Myanmar pulses trade urges India to hike annual quota for imports of tur, urad

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Reference -

https://www.thehindubusinessline.com/markets/commodities/myanmar-pulses-trade-urges-india-to-hike-annual-quota-for-imports-of-tur-urad/article38241329.ece

पिछले महीने जब भारतीय विदेश मंत्री म्यांमार की यात्रा पर गए थे, तो उन्होंने म्यांमार की भूतपूर्व नेत्री से मुलाक़ात की रिक्वेस्ट की, लेकिन म्यांमार ने भारतीय विदेश मंत्री की मांग को ठुकरा दिया.


जाहिर था, चीन की गोद में बैठी म्यांमार की तानासाही सर्कार भारत को आँखे दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ती है.


लेकिन अब म्यांमार का ऊंट भारतीय पहाड़ के नीचे आ गया है. तो आप पूछेंगे कैसे.


दोस्तों, सायद आपको पता हो, दालें हम सभी के भोजन का मुख्य हिस्सा है, एक तरफ दालों  की डिमांड अधिक है, तो दूसरी तरफ सप्लाई उस हिसाब से नहीं हो पा रही है, इसलिए दालों की कीमतें चढ़ी हुई रहती है.


चूँकि डिमांड अधिक और सप्लाई कम है, इसलिए भारत ने पिछले साल म्यांमार के साथ किया था पांच साल का एग्रीमेंट, जिसके तहत भारत को म्यांमार से सालाना 2.5 लाख टन तुअर और एक लाख टन उड़द दालें इम्पोर्ट करनी थी.


और भारत इस एग्रीमेंट का पालन भी कर रहा था, लेकिन अब हुआ ऐसा की, म्यांमार के किसानो ने बहुत ज्यादा तुअर और उड़द का प्रोडक्शन कर डाला, अब उन्हें दिक्कत आ रही है, की जो ज्यादा दालों का उत्पादन हो गया, तो उसका क्या किया जाये.


म्यांमार की दिक्कत इसलिए भी बढ़ जाती है, की भारत उसकी दालों का सबसे बड़ा खरीददार है, यदि भारत म्यांमार से दालें नहीं खरीदेगा, तो म्यांमार के किसानो को होगा सीधा सीधा नुकसान,


इसलिए म्यांमार अब भारत से मांग कर रहा है, की एग्रीमेंट के मुताबिक भारत को जितनी तुअर और उड़द खरीदनी थी, उससे डबल तुअर और उड़द भारत ने म्यांमार से खरीद लेना चाहिए.


सरल सब्दो में पिछले साल के एग्रीमेंट में जितनी क्वांटिटी खरीदने की बात हुई थी, उससे डबल क्वांटिटी खरीदने की बात अब म्यांमार कर रहा है. और उसके लिए भारत पिछले साल के एग्रीमेंट में परिवर्तन करे, ऐसी रिक्वेस्ट म्यांमार की तरफ से की जा रही है.


हालाँकि भारत का काम अभी चल रहा है, लेकिन दिक्कत यह है, की यदि भारत ने म्यांमार से बड़ी हुई मात्रा में तुअर और उड़द नहीं खरीदी तो हो सकता है, म्यांमार के किसान नुकसान के डर के चलते इन दो फसलों का उत्पादन ही कम कर दें, तो लॉन्ग टर्म में भारत का सप्लाई सोर्स ख़तम हो जायेगा.


इसलिए म्यांमार की बात मानने में भारत का भी भला है,  जहाँ तक हम समझ सकते हैं, अब चूँकि म्यांमार को हमारी शार्ट टर्म में जरूरत है, और यदि हमने उसकी मदद की तो लॉन्ग टर्म में हमारा हित भी सुरक्षित बना रहेगा.


और लगे हाथों भारतीय ग्राहकों को भी सस्ती उड़द और तुअर दालें खरीदने को मिल जाएगी. लेकिन यहाँ पर देखना होगा, की इस पूरी प्रोसेस में दालों के दाम भारत में गिरने से कहीं भारतीय किसानो की जेब में चपत ना लग जाये. इसलिए सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए भारत सर्कार म्यांमार की रिक्वेस्ट पर पोसिटीवेली विचार करेगी ऐसी उम्मीद है.


अब दोस्तों, कल आईडिया वोडाफोन ने मार लिया था 20 से 25 प्रतिशत का गोता, तब उस निराशा और हताशा के माहौल में हमने आईडिया पर बनाया था उम्मीद भरा वीडियो. वैसे भी पूरी दुनिया गिरते आदमी को धक्का मारती है, असली साहस तो गिरते आदमी को सहारा देने में लगता है. 


और आज आप देख लीजिये, आईडिया ने बदले की भावना से 11% का बाउंस बैक मार दिया है. इस पूरी उठा पटक का मजे से आनंद ले रहे हैं सभी आत्मनिर्भर इन्वेस्टर और साथ में उनको मुनाफा भी हो रहा है.


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