कुछ भी हो जाये अंत में जीतेगा इंडिया ही
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Iran offers to transfer Indian wheat to Afghanistan
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Reference -
https://www.wionews.com/india-news/iran-offers-to-transfer-indian-wheat-to-afghanistan-443326
अभी कल ही तो हमने चर्चा करि थी, की एक ओर जमीनी रस्ते से पाकिस्तान भारतीय गेंहू को अफ़ग़ानिस्तान तक पहुंचने नहीं दे रहा है, तो दूसरी ओर भारत ने हवाई रस्ते से तीन तीन बार अफ़ग़ानिस्तान को दवाएं भेज कर दिखा दिया है, की जहाँ चाह वहां राह होती है.
अफ़ग़ानिस्तान की कोई मदद नहीं कर रहा है, यह कह कह कर कल तक अपना सीना पीटने वाला पाकिस्तान आज हर नए दिन के साथ नया बहाना ढूंढ लेता है, ताकि वह भारतीय गेंहू को अफ़ग़ानिस्तान तक ना पहुंचने दे.
इसी बैकग्राउंड में सायद आपको याद हो, पिछले अगस्त महीने में जब तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया, तब पाकिस्तानी छोड़िये हमारे देश के बड़े बड़े एक्सपर्ट्स ने यह ऐलान करने में बड़ी तेजाइ दिखाई, की चाबहार प्रोजेक्ट का अंत हो चूका है, कई विद्वानों ने तो सवाल तक पुछा, की आखिर जब यह सब ही होना था, तो भारत ने चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट में क्यों इंडियन टैक्स पेयर का पैसा फूंका.
लेकिन जिस पोर्ट का नाम ही चाबहार है, आखिर उससे बहार कब तक खफा रहेगी. जी हाँ दोस्तों, कल ही तो ईरान के विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री से बात की.
जिसमे ईरान ने भारत से कह दिया, की उसने चाबहार पोर्ट के रस्ते का इस्तेमाल करके अफ़ग़ानिस्तान को गेंहू एक्सपोर्ट करना चाहिए.
ईरान की भारत से अपेक्षा है, की हम भविस्य में अफ़ग़ानिस्तान के साथ मेल जोल और व्यापार चाबहार पोर्ट के रस्ते से बढ़ाये.
अब आपको लग सकता है, की ईरान के विदेश मंत्री हवा में बातें कर रहे हैं, तो आपको इस पॉइंट पर फोकस करना चाहिए, की अफ़ग़ानिस्तान की गैर मान्यता प्राप्त सर्कार के तालिबानी विदेश मंत्री भी ईरान की यात्रा पर गए हुए हैं, ताकि आर्थिक मुद्दों पर बातचीत हो सके.
कहने का मतलब यह है, की अफ़ग़ानिस्तान को ईरान की मदद चाहिए, तो वह ईरान के रस्ते पर नो एंट्री का बोर्ड नहीं लगा सकते हैं. इसलिए तालिबानियों को चाबहार पोर्ट का रास्ता खोलना ही पड़ेगा.
वैसे भी अफ़ग़ानिस्तान में खाने के लाले पड़े हुए हैं, इसलिए यह केवल वक़्त की बात है, जब चाबहार पोर्ट के रस्ते फिर इंडिया अफ़ग़ानिस्तान ट्रेड चालू हो जायेगा.
आपको तो याद होगा, कुछ सालों पहले भारत चाबहार के रास्ते अफ़ग़ानिस्तान को गेंहू भेजा करता था, और गवादर पर बैठा पाकिस्तान कुढ़ता रहता था.
पाकिस्तान कितनी ही कोसिस कर ले, उसके रास्ते से नहीं तो ईरान के रास्ते भारतीय गेंहू अफ़ग़ानिस्तान पहुंचकर ही दम लेगा.
जहाँ तक आपका यह कहना हो सकता है, की भारत अफ़ग़ानिस्तान की तालिबानी सर्कार की सपोलों की मदद क्यों कर रहा है. तो यहाँ पर भारत जानबूझकर सर्कार और लोगों में अंतर कर रहा है, अफ़ग़ान लोगों के बीच भारत की जो मित्रता पूर्ण इमेज है, उसे किसी भी हालत में चकनाचूर होने नहीं दिया जाना चाहिए.
और इस प्रकार लगे हाथों तालिबान की भी पाकिस्तान के खिलाफ मोलभाव करने की शक्ति बढ़ रही है, इसलिए एक दो जहाज गेंहू भेजने से बैचैन हुए बिना, हमने अभी बड़ी पिक्चर पर ध्यान देना चाहिए.
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