रूस यूक्रेन के बीच बढ़ी तनातनी

दोस्तों, जैसा की आप सभी देख रहे हैं, रूस और उक्रैन के बीच चल रही नौटंकी अब अपने चरम पर पहुंच रही है.


एक और रूस का कहना है, की यूक्रेन ने उसकी बॉर्डर पोस्ट को नेस्तोनाबूद कर दिया, तो दूसरी ओर रूस ने ताल ठोकते हुए यह भी कह दिया, की उसने भी यूक्रेन के लोगों को गिरा दिया है, जो की तोड़ फोड़ के काम में लगे हुए थे,


कौन सी न्यूज़ फेक है या रियल, इसका अनुमान लगाना तक मुश्किल हो रहा है, जितने मुँह उतनी बातें, हमारे चारों ओर हो रही हैं. जिस कारण निराशा और असमंजस का माहौल है, कहने की जरूरत नहीं है, मीडिया तो बेसब्री से तीसरे विश्वयुद्ध की राह देख रही है.


जबकि रूस और यूक्रेन के बीच विवाद का क्या अंजाम होगा, यह देखना अभी वाकी है, लेकिन इतिहास तो हमारे सामने हैं ना, हम उसे देखकर भी तो अंदाज़ा लगा सकते हैं,


तो दोस्तों, ध्यान से सुनियेगा अब, पिछले बीस बाईस सालों में एक दो नहीं आठ जी हाँ आठ बड़े युद्ध हुए हैं, जिनमे बड़े पैमाने पर जान और माल की हानि हुई है.


अफ़ग़ानिस्तान वॉर, इराक वॉर, सीरियन वॉर सभी हमारी आँखों के सामने हुए हैं, रही बात यूक्रेन और रूस के विवाद की, तो आपको याद होगा, अच्छा बोलने वाले लेकिन ख़राब काम करने वाले प्रेजिडेंट ओबामा के काल में रूस ने यूक्रेन के हिस्से क्रिमीआ को कब्ज़ा लिया था.


आठ बार यह सब हो चूका है, जहाँ तक रूस और यूक्रेन की तनातनी है, वह तो अभी भी युद्ध के रूप में classify  नहीं की जा सकती है. अभी भी सिर्फ युद्ध की बातें हो रही है, किसी ने किसी दूसरे की जमीं पर कब्ज़ा नहीं किया है.


यहाँ पर हम सिर्फ यह कहना चाह रहे हैं, की जो अभी हो रहा है, वह ना तो पहली बार हो रहा है, और ना आखिरी बार हो रहा है. 


जब भारत पिछले आठ युद्धों के बाबजूद आगे बढ़ता रहा है, तो कोई आश्चर्य नहीं है, की भारत फिर भी आगे बढ़ता रहेगा, निफी 50 इंडेक्स जो की मोटा मोटी भारत की नब्ज माना जा सकता है. उसका चार्ट आपके सामने हैं. आठ युद्ध हो गए फिर भी निफ़्टी की उड़ान को कोई माई का लाल नहीं रोक पाया. थोड़ा बहुत उतार आया, लेकिन अंत में गया निफ़्टी ऊपर ही है, क्योकि गिरावट टेम्पररी है, उछाल परमानेंट है.


इसलिए दोस्तों, वर्तमान हताशा से हम विचलित नहीं है, बल्कि इतिहास पर विचार करते हुए हमें विस्वास है, की जैसे पिछले आठ युद्ध निकल गए, सबसे ख़राब हालत में वैसे ही यह संभावित युद्ध या जो कुछ आप इसे कहना चाहे वह भी निकल जाएगा, लेकिन फिर भी भारत काले घोड़े की रफ़्तार से सरपट सरपट आगे दौड़ता रहेगा.


इस विस्वास को आधार बनाकर हम आप सभी से बार बार आग्रह कर रहे हैं, की यदि आप निवेशक हैं, तो यह निरास होने का समय नहीं है, आशावादी होकर अच्छा माल सस्ते दाम और बिलकुल मौके पर खरीदने का सुनहरा अवसर है, लेकिन इसके लिए आपको आनी चाहिए टेक्निकल और फंडामेंटल एनालिसिस की कला.


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