बुद्धू बाइडेन ने दांतो तले उंगलियां दबाई

 https://www.reuters.com/world/india/exclusive-india-plans-urea-import-deal-with-iran-using-rupee-payments-sources-2022-02-25/

India plans urea import deal with Iran using rupee payments-sources

अभी कुछ ही दिनों पहले तो हम चर्चा कर रहे थे, की भारत लम्बी समय अवधि के लिए सस्ते दाम पर रूस से यूरिया खरीदने की कोसिस कर रहा है.


कारण यह था, की भारत को यूरिया की शॉर्टेज का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए नए सप्लाई सोर्स खड़ा करने की जरूरत थी, लेकिन आपको तो पता है, अचानक से प्रेजिडेंट पुतिन ने यूक्रेन के ऊपर हमला बोल दिया है. और जवाब में अमेरिका ने उस पर प्रतिबन्ध लगा दिए है. दुर्भाग्य देखिये, दोनों ही रूस और यूक्रेन से भारत यूरिया नोर्मल्ली भी खरीदता रहा है. और दोनों ही आज युद्ध में एक दूसरे का सामना कर रहे हैं.


चालाकी दिखाते हुए अमेरिका ने प्रतिबन्ध ऐसे लगाए ताकि उसकी और यूरोप की कच्चे तेल और गैस की जरूरत रूस पूरी करता रहे, लेकिन अन्य सभी छेत्रों में दुनिया को रूस के साथ ट्रेड करने में पेमेंट प्राप्त करने में दिक्कत का सामना करना पड़े.


हालाँकि गुजरते समय के साथ इन अमेरिकन प्रतिबंधों का काट भी ढूंढ लिया जायेगा, लेकिन भारत को तत्काल यूरिया की जरूरत है, इसलिए भारत जो कुछ सालो पहले तक ईरान से बड़ी मात्रा में यूरिया इम्पोर्ट करता था, लेकिन ट्रम्प के आर्थिक प्रतिबंधों के कारण भारत ने ईरान से यूरिया खरीदना बंद कर दिया था.


अब चूँकि नुक्लेअर डील को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अंतिम चरण में है, नई नुक्लेअर डील हो या ना हो, भारत ने अपनी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ईरान के साथ मोलभाव चालू कर दिया है और पेमेंट सिस्टम भी डिज़ाइन किया जा रहा है.


यदि नुक्लेअर डील हो गयी तो भारत बिंदास डॉलर में पेमेंट ले लेगा, लेकिन यदि कहीं किसी भी कारणवस नुक्लेअर डील नहीं होती है, तो  ईरान भारत से इंडियन रुपये में पेमेंट प्राप्त कर लेगा.


इस रुपये का इस्तेमाल करके ईरान अपने जरूरत के सामान भारत से खरीद सकता है. इस प्रकार बाइडेन प्रसाशन के साथ डील हो या ना हो, दोनों ही हालत में भारत ईरान से पंद्रह लाख टन यूरिया इम्पोर्ट करने की कोसिस कर रहा है.


हालाँकि इस सिस्टम का विकास अभी किया जा रहा है, लेकिन यह देखकर अच्छा लगता है, की जैसे जैसे तेजी से घटनाक्रम बदल रहा है, चौककना भारत अपनी जरूरत के मद्देनजर रणनीति में भी परिवर्तन कर रहा है.


इसी बीच जैसे ही सम्भावना दिखी की रूस उक्रेन युद्ध विश्वयुद्ध में कन्वर्ट नहीं होगा, मार्किट जो कल तक लहूलुहान हो रखा था, आज उसमे हरियाली का मौसम आ चूका है,



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