भारत को कमाए आम के आम और गुठलियों के भी दाम

 

KVIC proposes lifting of ‘export prohibition’ on bamboo charcoal for higher profitability

https://www.livemint.com/news/india/kvic-proposes-lifting-of-export-prohibition-on-bamboo-charcoal-for-higher-profitability-11645949816299.html

दोस्तों, जैसा की आपको जानकारी है, मोदी सरकार के पहले भारत जिसमे बांस का भर भर के उत्पादन होता है, वह तक बांस का भर भर के इम्पोर्ट करता था.


फिर धीरे धीरे कदम उठाये गए, जिसके अंतर्गत बांस के इम्पोर्ट को लगातार हतोत्साहित किया गया.


लेकिन फिर भी अगरबत्ती और bamboo क्राफ्ट इंडस्ट्री के लिए भारतीय बांस चाइनीस बांस महंगा पड़ता था. तो आपका बाजिव  सवाल हो सकता है, की आखिर चीन इतने सस्ते भारत की तुलना में मोटा मोटी आधे दाम पर बांस कैसे बेचता है??


दरअसल बांस का केवल बाहरी 16% हिस्सा ही अगरबत्ती और क्राफ्ट इंडस्ट्री में इस्तेमाल किया जाता है, और शेष बचा बांस बेकार ही चला जाता है.


मतलब बांस खरीदो पूरा, लेकिन उसका बहुत ही कम हिस्सा काम में आता था, इसलिए कीमत बढ़ जाती थी. तो चालक चीन जो करता था, उसे सुनकर आपको लगेगा की चाइनीस बड़े चालाक हैं.


शेष बचे बांस से चीन बनाता था, बैम्बू चारकोल, जिसकी भारत में भले ही कोई डिमांड ना हो, लेकिन विदेशो में वह बांस का कोयला बड़ा महंगा 21 से 25 हज़ार रुपये प्रति टन बिकता है.


बोले तो ऐसे चीन आम के आम और गुठलिओं के भी दाम कमाता है, अब बड़ा सवाल उठता यह है, की आखिर भारत क्यों बैम्बू चारकोल का प्रोडक्शन करके उसे अमेरिका जैसे देशो में एक्सपोर्ट नहीं करता?


तो दोस्तों, इसका कारण यह था, की भारत में बांस से चारकोल बनाने की इंडस्ट्री खड़ी ना हो, इसलिए पुरानी सरकारों ने बैम्बू चारकोल के एक्सपोर्ट पर पूरी तरह से पावंदी लगा रखी थी.


देख लीजिये, किस तरह की सरकारों ने भारत पर राज किया है, इन्होने पहले पर्यावरण के नाम पर बांस की कटाई को रोके रखा, फिर बांस से चारकोल ना बने, तो बैम्बू चारकोल के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी.


ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी, के सिद्धांत का पहले की सरकारों ने कितने अच्छे से इस्तेमाल किया आपके सामने है, लेकिन इस कुनीति का खामियाज़ा भुगता भारतीय किसानो, और व्यापारियों ने, कहने की जरूरत नहीं, साल दर साल भारत को बांस बेच कर चीन और वियतनाम जैसे कई देशो ने भर भर के मलाई उड़ाई है.


लेकिन अब यह सब बंद हो ने जा रहा है, क्योकि मोदी सरकार विचार कर रही है, की क्या बैम्बू चारकोल के एक्सपोर्ट को allow किया जा सकता है. यदि यह परमिशन दे दी गयी, तो बैम्बू इंडस्ट्री जो की अभी मेजोरिटी बांस को फेंक देती है, वह उसी से चारकोल बनाके उसे दबाके विदेशो में एक्सपोर्ट करेगी और भारत के लिए डॉलर भी कमाएगी.


सरल सब्दो में अब आम के आम और गुठलियों के दाम कमाने का टाइम भारत के लिए आ गया है.


देख लीजिये मोदी सरकार कितनी मेहनत मसक्कत कर रही है, की हर संभव प्रयास के जरिये भारत की विकास रफ़्तार को बढ़ाया जाये, मोदी जी की इसी मेहनत से आपका भी मुनाफा होना चाहिए.


लेकिन वह तभी होगा जब आप फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस के बल पर सही मौके और किफायती दाम पर अच्छी कंपनियों में निवेश करेंगे. यदि इन दोनों कलाओं को आप सीखना चाहते हैं, तो ध्यान दीजिये एक दिन बाद १ मार्च को कोर्स फीस बढ़ने के पहले आप आत्मनिर्भर इन्वेस्टर कोर्स को जितने जल्दी ज्वाइन करेंगे, उतने ज्यादा फायदे में रहेंगे.

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