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India in talks on multi-year fertiliser import deal with Russia
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Reference -

https://economictimes.indiatimes.com/industry/indl-goods/svs/chem-/-fertilisers/india-in-talks-on-multi-year-fertiliser-import-deal-with-russia/articleshow/89328028.cms?utm_source=contentofinterest&utm_medium=text&utm_campaign=cppst

जबकि रूस और अमेरिका यूक्रेन के मुद्दे पर एक दूसरे का सर खपा रहे हैं, भारत अपने राष्ट्रीय हित साधने में दिन रात लगा हुआ है.


और इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए भारतीय फ़र्टिलाइज़र मंत्री जल्द ही रूस की यात्रा करने वाले है, जहाँ पर उनकी मुलाक़ात होगी, रसियन ट्रेड मिनिस्टर के साथ.


इस यात्रा का मुख्य उद्देस्य है, भारत के लिए DAP और NPK जैसे बेहद जरूरी फ़र्टिलाइज़र की लॉन्ग टर्म सप्लाई सुनिश्चित करना. 


सायद आपको जानकारी हो, पिछले साल ग्लोबल मार्किट में इन फ़र्टिलाइज़र की किल्लत के चलते उनके भाव चढ़ने लगे थे, वह तो हमारे यहाँ खाद पर सरकार सब्सिडी देती है, नहीं तो किसानो की जेब पर इस उछाल की तगड़ी चपत लगती.


भले ही सब्सिडी हो, लेकिन फिर भी इस बार फ़र्टिलाइज़र की सप्लाई में कमी के चलते किसानो को परेशान तो होना ही पड़ा.


चूँकि भारत को दुनिया के सबसे बड़े फ़र्टिलाइज़र इम्पोर्टर के रूप में गिना जाता है, और हम सभी की खाद्य सुरक्षा के लिए यह जरूरी भी है, की किसानो को यह खाद समय पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाये.


अभी भारत जितनी खाद रूस से इम्पोर्ट कर सकता है, वह पूरा का पूरा कोटा भारत उठा लेता है, लेकिन अलग अलग कंपनियां जब अलग अलग थोड़ा थोड़ा एक्सपोर्ट  करती है, तो उन्हें सस्ता भाव नहीं मिल पाता है.


वैसे भी यह कॉमन सेंस की बात है, जब थोक में माल ख़रीदा जाता है, तो मजबूती से मोलभाव करने से कम भाव मिल जाता है,


इसी कॉमन सेंस का इस्तेमाल करते हुए अब भारतीय फ़र्टिलाइज़र मंत्री सभी कंपनियों के लिए एक भी बार में एग्रीमेंट करने जा रहे हैं, ताकि ज्यादा क्वांटिटी के  सस्ते भाव के लिए मजबूती से मोलभाव हो सके. 


इसलिए हमें पूरी पूरी उम्मीद है, की इस बार भारत को सफलता हांसिल होगी, क्योकि एक ओर रूस को जरूरत है पैसे की और लम्बीअवधि के धंधे की, तो दूसरी ओर भारत को जरूरत है बड़ी मात्रा में फ़र्टिलाइज़र की. 


जबकि बड़े बड़े एक्सपर्ट भारत को सलाह दे रहे थे, की यूक्रेन विवाद को सुलझाने के लिए भारत ने अमेरिका और रूस के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए, तब भारत दूसरों के फटे में टाँग अड़ाने के बजाये अपने हित साध रहा है. 


ताकि किसानो की जेब और उपभोक्ता के पेट की व्यवस्था की जा सके.


इसी बीच दोस्तों, शेयर मार्केट के लगातार चल रहे उतार चढ़ाव का आनंद लेने के लिए और इस प्रक्रिया में लगातार प्रॉफिट बांधने के लिए अनपढ़ इन्वेस्टर बनने से काम नहीं चलेगा,आत्मनिर्भर इन्वेस्टर बनना पड़ेगा.


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