महँगी गैस की टेंशन हुई ख़तम

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ExxonMobil Eyes More Long-Term Gas Supply Deals With India

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Reference -

http://www.businessworld.in/article/ExxonMobil-Eyes-More-Long-Term-Gas-Supply-Deals-With-India/05-02-2022-419699/

सायद आपके ध्यान में हो, मोदी सरकार ने लक्ष्य अपने सामने रखा है, की भारत की कुल ऊर्जा जरूरत में से आज LNG महज 6 प्रतिशत ऊर्जा ही प्रदान करती है, लेकिन इसे साल 2030 तक बढ़ाकर 15% किये जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हमारे सामने हैं. 


चूँकि भारत सरकार की भरपूर शक्ति LNG के उपयोग को बढ़ाने पर लगी हुई है, इसलिए बड़ी बड़ी कंपनियों ने LNG इम्पोर्ट और सप्लाई करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने पर अच्छा खासा पैसा खर्च कर दिया है. इस प्रकार जबकि भारत भविस्य में अधिक LNG की खपत के लिए तैयारी कर रहा है, तभी ग्लोबल मार्किट में LNG के भाव में उबाल आने लगा है.


साल 2020 में जहाँ LNG का भाव 2 डॉलर प्रति mmbtu हुआ करता था, वही आज 56 डॉलर के आस पास खड़ा हुआ है.


लेकिन LNG की बढ़ती कीमतों के बाब जूद वह देश खुश हैं, जिन्होंने सस्ते दाम पर LNG खरीदने के लिए पहले से लॉन्ग टर्म सप्लाई एग्रीमेंट किये हुए थे.


उदहारण के लिए लॉन्ग टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार भारतीय कंपनी पेट्रोनेट LNG अमेरिकन कंपनी एक्सान मोबिल से हर साल १.५ मिलियन टन नेचुरल गैस खरीदती है. इसी एग्रीमेंट का असर था, की LNG की बढ़ी हुई कीमतों के बाबजूद भारत की टेंशन नहीं बढ़ी.


परन्तु चूँकि भारत का LNG इम्पोर्ट बढ़ना ही बढ़ना है, इसलिए इस बात की जरूरत भी आन पड़ी है, की भारत और भी अधिक लॉन्ग टर्म LNG सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट करे,  ताकि भाव के उतार चढ़ाव के झंझट से भारतीय उपभोक्ता को सुरक्षित रखा जा सके.


अभी और भी अच्छी बात यह है, की अमेरिकन एक्सान मोबिल खुद आगे बढ़कर आ गयी है, की वह भारतीय कंपनियों के साथ बड़े पैमाने पर नए नए लॉन्ग टर्म LNG सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट फाइनल करने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठी है.


भारत के साथ लम्बी अवधि का एग्रीमेंट करने का फायदा यह है, की कल को यदि नेचुरल गैस का दाम धड़ाम से नीचे गिर पड़ा, तो भी एक्सान मोबिल भारत के विशाल मार्किट को LNG सप्लाई करके प्रॉफिट कमा पायेगी.


इस प्रकार लॉन्ग टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट होने से ना केवल पेट्रोनेट LNG जैसी भारतीय कंपनियों, बल्कि एक्सान मोबिल जैसी अमेरिकन कंपनियों दोनों को लाभ बराबर होता है, LNG का भाव ऊपर नीचे होता रहे, दोनों कंपनियों का बजट नहीं बिगड़ेगा.


जब भाव की टेंशन ख़तम हो जाएगी, तो कंपनियां बेहतर LNG इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने पर फोकस कर पायेगी, जो की अंत में सबके लिए अच्छा होगा.


इसलिए जहाँ तक हम समझ सकते हैं, यदि एक्सान मोबिल बाजिव दाम पर लॉन्ग टर्म के लिए LNG सप्लाई एग्रीमेंट करने के लिए तैयार है तो भारत ने भी आगे बढ़कर उसके साथ हाथ मिलाना चाहिए.


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