लड़ाई में भारत को मिल गयी मलाई

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Russia, Ukraine crisis might give India opportunity to export more wheat


रूस यूक्रेन क्राइसिस से भारत को कौन सा घाटा कितना होगा, उस पर सबका ध्यान है, लेकिन हमेसा की तरह हम फोकस करेंगे, की इस क्राइसिस से भारत को कैसे और कितना लाभ होगा. जब देखना ही है, तो क्यों ना आधा भरा गिलास देखा जाए.


आपको तो पता है, भारत में गेंहू का भर भर के उत्पादन होता है, परिणामस्वरूप जितना गेंहू भारत को सामान्य और आपातकालीन जरूरत को पूरा करने के लिए रखना होगा, उससे डबल मात्रा में  24 मिलियन टन गेंहू हमारे गोदामों में पड़ा हुआ है.


हमारे यहाँ गेंहू इतना है, की हम उसे फ्री में अपने खर्चे पर ट्रांसपोर्ट करके अफ़ग़ानिस्तान तक को बाँट रहे हैं.


अब आप देखिये, दुनिया में गेंहू का सबसे अधिक एक्सपोर्ट करने वाले देश है, रूस और यूक्रेन,  दुनिया में जितने गेंहू का एक्सपोर्ट होता है, उसमे से 25 फ़ीसदी हिस्सा रूस और यूक्रेन का है.


अब आप तो हमसे ज्यादा समझदार हैं, जब रूस और यूक्रेन के बीच गुत्थम गुत्था हो रही है, तो उन्हें कहाँ समय मिलेगा गेंहू एक्सपोर्ट करने का.


प्रेजिडेंट पुतिन ने यूक्रेन के फ्यूचर के ऊपर लगा दिया है सवालिया निशान, तो जबाब में यदि अमेरिका और यूरोप ने रूस पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगाए तो रूस को भी गेहू का एक्सपोर्ट करने में दिक्कत आ सकती है.


गेहू के दो बड़े सप्लायर रूस और उक्रैन अभी कमजोर है, मतलब भारत के सामने मौका है मौका, जिससे हमें बस भुनाना है.


हमारे पास गेंहू की सप्लाई है, दुनिआ में सप्लाई डिमांड गैप है, तो फिर क्या चालू करो दबा के गेंहू का एक्सपोर्ट.


यह मुनाफे का मौका खुद हमारे सामने खड़ा है, इसलिए इसका लाभ तो उठाना ही चाहिए, जिसको जिसको लड़ना हो लड़ता रहे, किसी से माफ़ी मांगने की जरूरत ही क्या है, भारत तो पैसा कमाने का मौका नहीं छोड़ने वाला. 


भारत से बड़े पैमाने पर गेंहू का एक्सपोर्ट होगा तो हो सकता है इसका लाभ भारतीय किसानो को भी मिले.


इसी बीच, अचानक से आज जो नेगेटिव न्यूज़ फ्लो आया है, उसके कारण मार्किट डूब गया है, इस डर हतासा और निराशा के माहौल में भारत को लेकर हमारा होंसला बुलंद है, और आत्मनिर्भर इन्वेस्टर वाजीराव की वेल्थ क्रिएशन स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करके अच्छा माल सस्ते दाम पर खरीद रहे हैं.




जब मार्किट टॉप पर था, तब आत्मनिर्भर इन्वेस्टर्स ने प्रॉफिट बुक करके कॅश रिज़र्व खड़ा किया था,  आज जब मार्केट में डर का माहौल है तब वह उस कॅश रिज़र्व को अब डेप्लॉय कर रहें हैं.,  ताकि भविस्य में जब मार्किट में लालच होगा तो वह अभी ख़रीदे गए माल को बेच पाएं,




डर को खरीदने और लालच को बेचने के सिद्धांत ने हमेसा सदियों से काम किया है, और वह इस बार भी काम करेगा.




इसलिए तो दोस्तों, आपसे आग्रह है, की आप एक आम इन्वेस्टर नहीं आत्मनिर्भर इन्वेस्टर बनिए. ताकि आप इस मार्किट के उतार चढ़ाव का बिना डरे घबराये लाभ उठा सकें, अगले चार दिनों बाद फीस बढ़ने के पहले आत्मनिर्भर इन्वेस्टर कोर्स को ज्वाइन करने के लिए आप इसी वीडियो के डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दी गयी लिंक पर क्लिक कर सकते हैं.

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