बाइडेन पुतिन की चक्की में मोदी जी फालतू में पिसे

 Will Russia-Ukraine war impact India's defence imports? Delivery of orders worth $9 billion still pending

https://www.indiatoday.in/india/story/russia-ukraine-war-india-defence-import-orders-pending-1921374-2022-03-06

दोस्तों, जैसा की रूस यूक्रेन युद्ध धधक रहा है, कोई अंदाज़ा नहीं है, की इस युद्ध में कब क्या होगा??


तब भारत कैलकुलेटर लेकर बैठ गया की यदि यह युद्ध आग खिचता है, और लम्बी अवधि का कनफ्लिक्ट बन जाता है, तो भारत को कहाँ कहाँ कितना कितना नुकसान होगा.


पिछले साल हुई थी, भारत और रूस के बीच पहली 2+2 मीटिंग, जिसमे दोनों देशो के रक्षा और विदेश मंत्रियो ने भाग लिया था, और तब दोनों देश इस सहमति पर पहुंचे थे, की अगले दस सालों में भारत और रूस के बीच 9 बिलियन डॉलर यानी की करीब करीब 70 हज़ार करोड़ का रक्षा व्यापर होगा.


जिसमे डिफेंस इक्विपमेंट की डायरेक्ट खरीददारी से लेकर जॉइंट डेवलपमेंट और प्रोडक्शन जैसे सभी प्रोजेक्ट शामिल थे.


इसलिए जिस प्रकार अफ़ग़ानिस्तान अमेरिका के लिए कुछ दिनों से चालू होकर बीस सालों का युद्ध बन गया, उसी तरह यदि कहीं यूक्रेन में रूस अगले दस सालों के लिए फंस गया, तो क्या यह पूरा 70 हज़ार करोड़ का कारोबार लटक जायेगा, यह सबसे बड़ा सवाल हमारे सामने खड़ा है.


भारत के दोनों ही पडोसी कितने खुरापाती है, वह तो आपको पता ही है, इसलिए दोनों पड़ोसियों के द्वारा पेश एक खतरे से निपटने के लिए जरूरी है, की रूस और भारत के बीच S400 के इम्पोर्ट से लेकर AK203 के जॉइंट प्रोडक्शन तक के अनेकानेक छेत्रों में डिफेंस कोलैबोरेशन एंड cooperation बना रहे. यह वक़्त की मांग है.


जबकि 70 हज़ार करोड़ का दैत्याकार सवाल भारत के सामने खड़ा है, तभी एक और बड़ी बुरी खबर आ गयी है शेयर मार्किट से.


जहाँ पर पिछले अक्टूबर महीने से विदेशी निवेशकों ने छोटी मोटी नहीं भारी भरकम दो लाख करोड़ की बिकवाली कर दी है. बिकवाली का आलम तो साहब ऐसा है, की मार्च 2020 में कोरोना की पहली लहर भी मात खा गयी है. वह तो भला हो, भारतीय निवेशकों का, जिन्होंने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के सामने डेढ़ लाख करोड़ की खरीददारी मजबूती से कर डाली.


नहीं तो निफ़्टी 50 इंडेक्स जो अभी 16 हज़ार के लेवल पर लड़खड़ा रहा है, ना जाने कब का 8 हज़ार के लेवल पर धुल चाट रहा होता.


जबकि चारों और सभी नेगटिव फैक्टर्स एक दूसरे के ऊपर चढ़े चले जा रहे हैं, तब भी जी हाँ तब भी भारत के भविस्य पर हमें भरोषा है, और हमारा भरोसा अटल है.


वैसे भी भारत की जमीनी हक़ीक़त के बारे में विदेशी निवेशकों से ज्यादा पता हमारे घरेलु निवेशकों को हैं. इसलिए विदेशी को जहाँ जाना है चले जाएँ, उन्हें लौटकर फिर भारतीय दरवाजे पर दस्तक देनी होगी.


जब विदेशी निवेशक थक हारकर लौटके आएंगे,तो आज की नरम निफ़्टी किस लेवल की तरफ मजबूती से दौड़ रही होगी, उसका अंदाज़ा आप स्वयं लगा लीजिये.


युद्ध काल में हमें लड़ना नहीं पड़ रहा है, तो क्या हम बिना लड़े ही हौसले का युद्ध हार जाएँ, इसलिए इस पुरे नकारात्मक वातावरण में हम आपसे आग्रह करते रहे हैं, की निवेश करने का मौका यही कभी है, तो अभी है अभी है.


बस अच्छी कंपनियों में सस्ते दाम और बिलकुल मौके पर निवेश करने के लिए आपको सीखना होगी फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस की कला, जो आपको बनाएगी एक आम आदमी से आत्मनिर्भर इन्वेस्टर. इसी वीडियो के डिस्क्रिप्शन बॉक्स में दी गयी है लिंक, उस पर क्लिक करके आप आत्मनिर्भर इन्वेस्टर कोर्स को जितने जल्दी ज्वाइन करेंगे, उतने ज्यादा फायदे में रहेंगे.

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